UP News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ऊर्जा की बचत और संयम बरतने की अपील के बीच, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को एक बड़ा बयान दिया है। मायावती ने पीएम मोदी की इस अपील पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आम जनता के पास अब संयम बरतने या खोने के लिए कुछ भी खास नहीं बचा है।
बसपा सुप्रीमो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि कोरोना काल के बाद देश की करोड़ों गरीब और मेहनतकश जनता पहले से ही रोजी-रोटी के संकट से जूझ रही है। ऐसे में उनके पास और अधिक संयम बरतने या खोने के लिए बहुत कुछ नहीं बचा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि वे इस कठिन समय में शब्दों की बजाय ठोस कदम उठाएं और गरीब परिवारों को राहत प्रदान करें।
युद्ध और आर्थिक संकट का जिक्र
मायावती ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव को भी आधार बनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की स्थिति और इसके समाप्त होने को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते ऊर्जा संकट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा संयम की अपील इस बात का संकेत है कि भारत के सामने केवल पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी पेट्रोलियम वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है।
पीएम मोदी ने की थी ये अपील
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे युद्ध के मद्देनजर देशवासियों को संबोधित किया था। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, यथासंभव पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने और काम के लिए घर से काम करने (Work From Home) की व्यवस्था को फिर से अपनाने की अपील की थी।
पीएम मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी, विशेष रूप से सोना खरीदने से बचने और विदेश यात्राओं पर भी रोक लगाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि युद्ध के इस दौर में देशभक्ति सिर्फ शहीद होना नहीं है, बल्कि मुश्किल समय में जिम्मेदारी से चलना भी देशभक्ति है।
मायावती के इस बयान को मौजूदा आर्थिक हालात और केंद्र सरकार की नीतियों पर विपक्ष के बढ़ते हमलों के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से आर्थिक राहत पैकेज और गरीबों के लिए विशेष प्रबंधों की मांग करते हुए कहा है कि जनता केवल अपीलों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से ही राहत महसूस करेगी।























