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16 मई का पावन दिन: तीन बड़े पर्वों का अद्भुत संगम

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महिला सती सावित्री ने अपनी पतिव्रता और तप के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान को वापस लिया था।

गजकेसरी योग: भाग्य और शक्ति के लिए श्रेष्ठ

HIGHLIGHTS

  • ज्येष्ठ अमावस्या: पितृ दोष मुक्ति का विशेष अवसर
  • शनि जयंती: शनि दोष से राहत पाने का सही समय
  • वट सावित्री व्रत: पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए
  • 300 साल बाद बना दुर्लभ योगों का संयोग
  • शश महापुरुष योग और इसके लाभ

The Auspicious Day of May 16th: सनातन धर्म में 16 मई का दिन अत्यंत विशेष महत्व रखता है। इस दिन तीन बड़े पर्व एक साथ मनाए जा रहे हैं- ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन लगभग 300 वर्षों के बाद कई दुर्लभ शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इस तिथि का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं कल के इस पावन दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और क्या खास है इस बार।

300 साल बाद बना दुर्लभ संयोग

ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जन्मोत्सव और वट सावित्री व्रत के पावन अवसर पर इस बार शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, सौभाग्य योग और शोभन योग जैसे दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि इतने दिनों बाद बने इस योग में किए गए दान, पूजा और व्रत का कई गुना फल मिलता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वट सावित्री व्रत: पति की लंबी आयु के लिए

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महिला सती सावित्री ने अपनी पतिव्रता और तप के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान को वापस लिया था। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) के वृक्ष की जड़ में जल, फूल, चावल और फल चढ़ाकर पूजा करती हैं।

शनि जयंती: शनि दोष से मुक्ति का अवसर

ज्येष्ठ अमावस्या को ही शनि देव का जन्मोत्सव यानी शनि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था। शनि जयंती पर शनि शांति पूजा और तेलाभिषेक करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और महादशा के कष्टों से राहत मिलती है। भक्त काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

ज्येष्ठ अमावस्या: पितृ दोष से मुक्ति

यह तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना और पितरों के नाम पर तर्पण व दान करना शुभ माना जाता है। विधि-विधान से किए गए श्राद्ध से पितृ दोष का नाश होता है और परिवार में सुख-शांति आती है।

16 मई का शुभ-अशुभ मुहूर्त और समय

तिथि व समय:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई, सुबह 05:11 मिनट
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई, देर रात 01:30 मिनट
  • सूर्योदय: सुबह 05:30 मिनट
  • सूर्यास्त: शाम 07:05 मिनट

शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat):

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 से 04:48 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:45 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 से 03:28 तक
  • अमृत काल: दोपहर 01:15 से 02:40 तक
  •  गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 से 07:25 तक

अशुभ समय (Ashubh Samay):

  • राहुकाल: सुबह 08:54 से 10:36 तक
  • यमगंड: दोपहर 02:00 से 03:42 तक
  • गुलिक काल: सुबह 05:30 से 07:12 तक
  • दुर्मुहूर्त: सुबह 05:30 से 06:24 तक और 06:24 से 07:19 तक

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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