नोएडा में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन भक्तिमय उल्लास के साथ संपन्न

Noida News:कथा के दौरान पं. राकेश शास्त्री ने रास पंचाध्याय (रास पांच अध्याय) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महारास में पांच अध्याय हैं और इनमें गाए जाने वाले पांच गीत स्वयं श्रीमद्भागवत के पांच प्राण हैं। उन्होंने कहा कि जो भी भक्त ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भावविभोर होकर गाता है।

महारास जीव और ब्रह्म का दिव्य मिलन : पं. राकेश शास्त्री

HIGHLIGHTS

  • श्री राधावल्लभ मंदिर में गूंजा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का दिव्य प्रसंग
  • पं. राकेश शास्त्री ने रास पंचाध्याय का बताया आध्यात्मिक महत्व
  • श्रीमद्भागवत कथा में भक्त हुए कृष्ण भक्ति में सराबोर
  • नोएडा के श्री राधावल्लभ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
  • संगीतमय श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर

Noida News: नोएडा ग्राम झटटा, सेक्टर-159 स्थित श्री राधावल्लभ मंदिर में श्री श्री 1008 श्री किशोरी शरण जी महाराज बाबा सूरदास जी की कृपा से आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का छठा दिन बुधवार को विशेष आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर कथा वाचक पंडित राकेश शास्त्री जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के पावन प्रसंग पर संगीतमय और भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे भक्तगण रोमांचित हो उठे।

रास पंचाध्याय का गहन विवेचन

कथा के दौरान पं. राकेश शास्त्री ने रास पंचाध्याय (रास पांच अध्याय) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महारास में पांच अध्याय हैं और इनमें गाए जाने वाले पांच गीत स्वयं श्रीमद्भागवत के पांच प्राण हैं। उन्होंने कहा कि जो भी भक्त ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भावविभोर होकर गाता है, वह इस संसार रूपी भव सागर से पार हो जाता है और उसे वृंदावन की भक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है।

जीव और ब्रह्म का मिलन है महारास

आचार्य ने अपने व्याख्यान में कहा कि महारास की लीला में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी की धुन से गोपियों का आह्वान किया था। महारास लीला के माध्यम से ही जीवात्मा और परमात्मा का दिव्य मिलन हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीव और ब्रह्म के इसी मिलन को ‘महारास’ कहा जाता है।

लीलाओं का चित्रण

इस दौरान कथा में भगवान की विभिन्न लीलाओं का सुंदर वर्णन किया गया, जिसमें मथुा प्रस्थान, दुष्ट कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन वध, ऊधव-गोपी संवाद और ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाने का प्रसंग प्रमुख था। साथ ही, द्वारका की स्थापना और श्री रुक्मिणी विवाह के प्रसंग को भी संगीतमय ढंग से प्रस्तुत किया गया।

भंडारे का आयोजन

श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन का भव्य भंडारा चौधरी सुंदर भाटी (सुपुत्र स्व. चौ. बेगराज भाटी) परिवार के सौजन्य से आयोजित किया गया। परिवार के सभी सदस्यों ने भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन श्रीमद्भागवत भगवान की भव्य आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और भक्तों ने ईश्वर से जीवन में सुख-शांति की कामना की।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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