श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र ने बांधा समां

Noida News:कथा के दौरान पं. राकेश शास्त्री जी ने सुदामा जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुदामा जी जितेंद्रिय और भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। हालांकि वे भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे।

श्री राधावल्लभ मंदिर में भव्य कथा, सुदामा-कृष्ण मित्रता का अद्भुत वर्णन

HIGHLIGHTS

  • राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग से गूंजा कथा पंडाल
  • कृष्ण-सुदामा मिलन कथा से श्रद्धालु हुए भावुक
  • द्वारका में सुदामा के स्वागत का दिव्य चित्रण
  • भागवत कथा में भक्ति, प्रेम और मोक्ष का संदेश
  • श्रीमद्भागवत कथा में सजी सुदामा भक्ति की अमर गाथा

Noida News: ग्राम झटटा, सेक्टर 159 नोएडा स्थित श्री राधावल्लभ मंदिर में श्री श्री 1008 श्री किशोरी शरण जी महाराज बाबा सूरदास जी की कृपा से आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का सातवां दिन बेहद भव्य और भावनापूर्ण रहा। बृहस्पतिवार को कथा वाचक पं. श्री राकेश शास्त्री जी ने श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता तथा राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

सुदामा चरित्र का वर्णन

कथा के दौरान पं. राकेश शास्त्री जी ने सुदामा जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुदामा जी जितेंद्रिय और भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। हालांकि वे भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे। पत्नी सुशीला के बार-बार आग्रह करने पर जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो भगवान कृष्ण ने अपने मित्र के लिए जो प्रेम दिखाया, वह अद्भुत था।

कृष्ण का स्नेह और सुदामा की निस्वार्थ भक्ति

कथा में वर्णन हुआ कि जब द्वारपाल ने भगवान कृष्ण को सुदामा के आगमन की सूचना दी, तो कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़कर आए और उन्हें गले से लगा लिया। सुदामा की दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा बह निकली। भगवान ने अपने मित्र को सिंहासन पर बैठाकर उनके चरण धोए और सभी पटरानियों ने सुदामा जी से आशीर्वाद लिया। जब सुदामा वापस लौटे, तो भगवान की कृपा से उनके घर में महल बन चुका था, लेकिन उन्होंने अपनी फूंस की कुटिया को ही अपना ठिकाना बनाया रखा और भगवान का सुमिरन किया। कथा वाचक ने कहा कि जब भी भक्तों पर विपदा आई है, प्रभु उन्हें तारने जरूर आए हैं।

परीक्षित मोक्ष और फूलों की होली

अगले प्रसंग में शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाने का वर्णन किया गया, जिससे उनके मन से मृत्यु का भय समाप्त हो गया। तक्षक नाग द्वारा डसने के बाद भी कथा श्रवण के प्रभाव से राजा परीक्षित सीधे भगवान के परमधाम को पहुंच गए। इस मौके पर आज श्रीकृष्ण, रुक्मणी और सुदामा के साथ फूलों की होली भी खेली गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

भंडारे का आयोजन

श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन का भंडारा चौधरी बीर सिंह टाइगर (सुपुत्र स्व. बदले सिंह टाइगर) परिवार के सौजन्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रीमद्भागवत भगवान की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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