गोकुलाष्टमी का पर्व मुंबई के लिए केवल एक धार्मिक अवसर नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। कृष्ण जन्मोत्सव के इस दिन मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की गलियों, चौकों और मैदानों में हजारों युवा ‘गोविंदा’ बनकर मानव पिरामिड खड़े करते हैं और ऊंचाई पर सजाई गई दही हांडी फोड़ने की कोशिश करते हैं। इस उत्सव का रोमांच अपने आप में अनोखा है, लेकिन इसी जोश के बीच चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। पिरामिड से गिरने, मोच आने और हड्डियां टूटने जैसी घटनाएं हर साल सामने आती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) इस बार पहले से ही पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और शहरभर के अस्पतालों को इमरजेंसी तैयारी के लिए खास निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
दही हांडी का सांस्कृतिक महत्व
दही हांडी का इस त्योहार से गहरा नाता है। कहा जाता है कि बालकृष्ण माखन-दही के मटके चुराने के लिए अपने साथियों के साथ मानव पिरामिड बनाते थे और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र में इसे उत्सव का रूप दिया गया। समय के साथ यह आयोजन महज धार्मिक अनुष्ठान से निकलकर बड़े पैमाने पर होने वाले सामुदायिक उत्सव में बदल गया है। मुंबई के साथ-साथ ठाणे जैसे शहरों में भी बड़ी-बड़ी गोविंदा टोलियां महीनों पहले से अभ्यास करती हैं और गोकुलाष्टमी के दिन पुरस्कार जीतने के लिए आपस में होड़ करती हैं।
गोविंदा टीमों की कड़ी तैयारी
इस बार भी मुंबई शहर, पूर्वी सबअर्ब और पश्चिमी सबअर्ब की अलग-अलग गोविंदा टीमें इस दिन को ऐतिहासिक बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। ऊंचे पिरामिड बनाने के शौकीन ये टीमें सुबह से शाम तक अभ्यास करती हैं। लेकिन जितनी ऊंचाई बढ़ती है, गिरने का खतरा भी उतना ही बढ़ जाता है। इसीलिए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सजगता बेहद जरूरी हो जाती है।
चोटिल गोविंदाओं का होगा मुफ्त इलाज
निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दही हांडी के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी से बचाव के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी की जाएं। इस दौरान घायल होने वाले गोविंदाओं का इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। अस्पतालों के डीन, चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट और मेडिकल सुपरिटेंडेंट को गोविंदाओं के उपचार के लिए अपने-अपने अस्पतालों को हर हाल में तैयार रखने के निर्देश भेजे गए हैं, ताकि इमरजेंसी में एक पल की भी देरी न हो।
तीन बड़े अस्पतालों में विशेष सुविधाएं
गोविंदाओं के घायल होने की आशंका को देखते हुए शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों में खास इलाज की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। इनमें सियॉन स्थित लोकमान्य तिलक सर्वोपचार अस्पताल, परेल स्थित राजे एडवर्ड स्मारक (K.E.M.) अस्पताल और मुंबई सेंट्रल स्थित नायर अस्पताल शामिल हैं। ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक इलाज के लिए ये तीनों अस्पताल शहर में सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं, इसलिए इन्हें तैयारी की दृष्टि से सबसे आगे रखा गया है।
16 सबअर्बन अस्पतालों में 105 बेड आरक्षित
सिर्फ शहर के मुख्य हिस्से ही नहीं, पूर्वी और पश्चिमी सबअर्ब्स के गोविंदाओं को भी खास ध्यान में रखा गया है। 16 सबअर्बन अस्पतालों में कुल 105 बेड आरक्षित किए गए हैं और हर अस्पताल में 5 से 10 बेड इमरजेंसी के लिए खाली रखे गए हैं। इससे किसी बड़ी घटना की स्थिति में भी मरीजों को भर्ती करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
तीन शिफ्ट में तैनात रहेगा मेडिकल स्टाफ
इस व्यवस्था के तहत मामूली चोटों से घिरे गोविंदाओं को तय प्रक्रिया के अनुसार फर्स्ट एड देकर घर भेज दिया जाएगा। वहीं, गंभीर रूप से घायल उन गोविंदाओं के लिए भी इलाज की पूरी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी, जिन्हें लंबे समय तक उपचार की जरूरत है। इसके लिए नगर निगम ने मेडिकल ऑफिसरों और स्टाफ को तीन शिफ्ट में तैनात किया है, ताकि दिन हो या रात, स्वास्थ्य सेवा में कोई कमी न रहे।
दवाइयों से लेकर एक्स-रे तक सब तैयार
निगम के सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि जरूरी दवाइयां, इंजेक्शन, सर्जिकल सामग्री और प्लास्टर (POP) पहले से तैयार रखें। एक्स-रे समेत अन्य मशीनें भी चालू हालत में रखी गई हैं। प्रशासन की ओर से सभी अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम को साफ कहा गया है कि उत्सव के दिन हर डॉक्टर और कर्मचारी पूरी तरह सतर्क रहें और किसी भी इमरजेंसी का तुरंत जवाब दें।
























