मालेगांव क्षेत्र के लेंडाणा गांव के पास हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। इस हादसे में एक मासूम बच्ची की जान चली गई और इसी घटना के अगले दिन टिंगरी गांव के पास ब्रिज के नीचे एक बुजुर्ग महिला वाहन की चपेट में आकर दम तोड़ देती है। लगातार हो रहे इन हादसों से गुस्साए लोगों ने अब सड़क पर उतरकर आवाज उठाना शुरू कर दिया है। मैक्स स्टेप्स फाउंडेशन की पहल पर हाईवे प्रशासन और टोल ठेकेदारों के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया गया है।
दो दिन, दो हादसे — इलाके में शोक की लहर
लेंडाणा गांव के पास हुए हादसे में बच्ची की मौत का सदमा अभी उतरा भी नहीं था कि टिंगरी गांव के समीप ब्रिज के नीचे बुजुर्ग महिला की दुर्घटना में मौत ने इलाके के लोगों का सब्र तोड़ दिया। यही वजह है कि ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है।
पीड़ित परिवारों के द्वार तक पहुंचा फाउंडेशन
हादसों की खबर मिलते ही मैक्स स्टेप्स फाउंडेशन की टीम सबसे पहले लेंडाणा गांव पहुंची, जहां बच्ची के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांसा दिया गया। इस मौके पर फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह बच्ची सिर्फ आपके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे मालेगांव की बच्ची थी। पूरा शहर इस दुख की घड़ी में आपके साथ खड़ा है।
परिजनों ने भावुक पल में कहा कि वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उन्हें किसी आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। उनके लिए इससे बड़ी बात यह है कि फाउंडेशन के लोग उनके घर आकर उनके दुख में सहभागी बने। इसके बाद टीम टिंगरी गांव पहुंची, जहां बुजुर्ग महिला के परिजनों से मुलाकात कर आर्थिक सहायता के रूप में एक बड़ी रकम का चेक सौंपा गया।
घटनास्थल पर ही बुलाए गए हाईवे अधिकारी
इस दौरान फाउंडेशन के पदाधिकारी रिजवान बैटरीवाला ने घटनास्थल पर ही हाईवे अथॉरिटी के जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाया। मौके पर पहुंचे अधिकारों को छोटे और अधूरे स्पीड ब्रेकर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और गुस्से में उसे उखाड़ दिया।
अधिकारियों से सख्त सवाल करते हुए बैटरीवाला ने कहा कि पिछले तीन साल में इसी जगह पर 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इतनी मौतों के बाद भी आप हाथ पर हाथ रखकर बैठे क्यों हैं? जिम्मेदारी कौन लेगा? मौके पर मौजूद हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी इन सवालों के जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखे। फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
टोल ठेकेदार से भी किए गए कड़े सवाल
फाउंडेशन ने डोंगराले टोल नाके के ठेकेदार को भी मौके पर बुलाकर जमकर सवालों की झड़ी लगाई। ग्रामीणों का आरोप है कि दिनदहाड़े भारी वाहनों को शहर की दिशा में तेज रफ्तार से रवाना किया जा रहा है, जिससे हादसों का खतरा हर वक्त बना रहता है।
विरोध दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों और फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने मौके पर कई भारी वाहनों को रोककर खड़ा किया, जिससे आंदोलन का असर साफ देखा जा सकता था।
दिन के समय भारी वाहनों की एंट्री बंद करने का अल्टीमेटम
आंदोलन के दौरान फाउंडेशन की ओर से मुख्य मांग सामने रखी गई — दिन के समय शहर में भारी वाहनों की एंट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही हाईवे पर उचित ऊंचाई के स्पीड ब्रेकर, साफ-साफ रेंजिंग और वॉर्निंग बोर्ड लगाए जाने की मांग भी उठाई गई।
फाउंडेशन और क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों के नियंत्रण की मांगें मानी जाने तक आंदोलन को और आगे बढ़ाया जाएगा।
हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ बड़ा आंदोलन का आह्वान
इस पूरे आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी जाति या धर्म की सीमा नहीं रखी गई। फाउंडेशन की ओर से हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ पूरे क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर आने का आह्वान किया गया है, ताकि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि हर उस परिवार की लड़ाई बने जिसका कोई ना कोई सदस्य इस हाईवे पर सफर करता है।
























