मुंबई से श्रीनगर आ रही IndiGo की फ्लाइट 6E 225 को लैंडिंग के बाद तकनीकी हादसे का सामना करना पड़ा। विमान का ब्रेक सिस्टम अचानक फेल होने से वह पार्किंग बे में लगे पोल यानी VDGS सिस्टम से टकरा गई। इस टक्कर में विमान का नोज सेक्शन क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित रहे।
लैंडिंग के बाद बढ़ा हादसे का खतरा
देश के सबसे बड़े निजी एयरलाइन कैरियर IndiGo की फ्लाइट 6E 225 मुंबई से श्रीनगर पहुंची और रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, लैंडिंग के बाद जब विमान अपनी तय पार्किंग की ओर टैक्सी कर रहा था, ठीक उसी समय उसका ब्रेक सिस्टम फेल हो गया। ब्रेक फेल होने की वजह से पायलट विमान को समय रहते रोक नहीं पाए और विमान पार्किंग बे में स्थापित पोल यानी VDGS सिस्टम से जा टकराया। इस टक्कर से विमान के आगे के हिस्से यानी नोज सेक्शन को खासी नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया, लेकिन एयरपोर्ट की टीम ने तुरंत स्थिति को काबू में ले लिया।
सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित
इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान सुरक्षित रही। किसी भी यात्री या क्रू सदस्य के घायल होने की कोई खबर नहीं है। घटना के बाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया गया। यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मैनुअल सीढ़ियों का इस्तेमाल किया गया और सभी यात्रियों को सलामती के साथ उतार लिया गया। क्षतिग्रस्त होने के चलते विमान की आगे की उड़ान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। बता दें कि ऐसी तकनीकी खराबियों की स्थिति में विमान को ग्राउंडेड कर दिया जाता है और इंजीनियरिंग टीम के फिट करार सर्टिफिकेट के बाद ही उसे दोबारा उड़ान की मंजूरी मिलती है।
क्या होता है VDGS सिस्टम?
जिस VDGS सिस्टम से विमान की टक्कर हुई है, वह एक विशेष तकनीक है जिसका इस्तेमाल एयरपोर्ट पर विमानों को सही पार्किंग स्थिति में खड़ा कराने के लिए किया जाता है। इसे Visual Docking Guidance System कहा जाता है। यह सिस्टम पायलट को पार्किंग के दौरान सही दिशा में आने और सटीक जगह पर विमान रोकने के लिए विजुअल सिग्नल देता है, जिससे विमान एरोब्रिज के साथ बिल्कुल सही तरीके से डॉक हो सके। यह उपकरण आमतौर पर पार्किंग बे के सामने एक पोल की शक्ल में स्थापित होता है।
जांच में जुटे अधिकारी, अभी कोई निष्कर्ष नहीं
घटना के बाद जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि इस घटना की जानकारी और इससे जुड़ी परिस्थितियों की जांच तय प्रक्रियाओं के अनुसार संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाएगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि आखिर ब्रेक सिस्टम फेल क्यों हुआ। विमानन विशेषज्ञों के मुताबिक, जांच के दौरान विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड, पायलट से मिली जानकारी और एयरपोर्ट के टैक्सीवे तथा पार्किंग बे की स्थिति को खास तौर पर ध्यान में रखा जाता है। एयरलाइन ने साफ किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण का पता चल पाएगा और इस चरण में किसी तरह का निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है।
एयरपोर्ट पर आना-जाना सामान्य
इस पूरी घटना के बीच श्रीनगर एयरपोर्ट का कामकाज पूरी तरह सामान्य बना रहा। एयरपोर्ट से फ्लाइट का आना-जाना तय समय के अनुसार जारी रहा और किसी भी फ्लाइट के रद्द होने की खबर नहीं है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहा है कि वह सभी यात्रियों और स्टेकहोल्डर्स के लिए सुरक्षित और सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पर्यटन की बढ़ती रफ्तार के बीच बढ़ा महत्व
गौर करने वाली बात यह है कि श्रीनगर एयरपोर्ट जम्मू-कश्मीर का सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट है। हाल के वर्षों में पर्यटन को मिले बूस्ट के चलते यहां यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। यहां से दिल्ली, मुंबई, जम्मू और चंडीगढ़ समेत कई बड़े शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स संचालित होती हैं। पर्यटन सीजन के दौरान यह एयरपोर्ट रोजाना हजारों यात्रियों को हैंडल करता है। ऐसे में इस तरह की तकनीकी घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं पर फिर से बारीकी से नजर रखी जा रही है।
दोहा-बेंगलुरु फ्लाइट की मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग
वहीं दूसरी ओर, इससे पहले गुरुवार को भी IndiGo की एक और फ्लाइट से जुड़ी खबर सुर्खियों में रही थी। दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E 1302 को ओमान की राजधानी मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। दरअसल, फ्लाइट चला रहे पायलट की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद विमान को एहतियात के तौर पर मस्कट डायवर्ट किया गया। बताया जा रहा है कि पायलट की हालत को देखते हुए क्रू सदस्यों ने लैंडिंग की प्रक्रिया पूरी की और बीमार पायलट को जल्द मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया।
सुरक्षा मानकों पर लगातार बढ़ रहा जोर
विमानन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को लेकर लगातार सख्ती बरती जा रही है। DGCA यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के नियमों के मुताबिक, किसी भी विमान को हादसे के बाद जांच पूरी होने तक उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती। इसी तरह, क्रू सदस्य की सेहत से जुड़ी चिंता की स्थिति में फ्लाइट को नजदीकी एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जाना एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया मानी जाती है। श्रीनगर और मस्कट, दोनों घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि समय रहते बरती गई एहतियातों से किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में असली वजह सामने आएगी।

























