श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व नोएडा के ब्रह्माकुमारी राजयोग केन्द्रों पर अभूतपूर्व उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। सेक्टर 46, सेक्टर 51, सेक्टर 56 तथा सेक्टर 15 स्थित इन आध्यात्मिक केन्द्रों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। दिनभर चले विशेष कार्यक्रमों में नगर के विभिन्न इलाकों से आए सैकड़ों लोगों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया और दिव्य वातावरण में डूबकर अपार आनंद का अनुभव किया।
जन्माष्टमी का गूंजा आध्यात्मिक संदेश
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की मुख्य वक्ता रहीं ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी लीना दीदी ने विभिन्न केन्द्रों पर उपस्थित भारी संख्या में जमा श्रोताओं को संबोधित करते हुए जन्माष्टमी के गहरे आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डाला। अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में उन्होंने कहा कि यह पर्व मात्र द्वापरयुगीन एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण भर नहीं है, अपितु यह मानव जीवन में दिव्य गुणों को जन्म देने और आत्मिक परिवर्तन की ओर बढ़ने का एक जीवंत प्रतीक है।
लीना दीदी ने कहा, “श्रीकृष्ण का जन्म उस समय होता है जब अधर्म और अशांति चरम सीमा पर होती है। ठीक इसी प्रकार जब हमारे मन के अंधकार सबसे अधिक बढ़ जाते हैं, तब हमारे भीतर दिव्यता का उदय हो सकता है। जन्माष्टमी हमें यही शिक्षा देता है कि प्रकाश की प्रतीक्षा बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर की जानी चाहिए।”
सोलह कलाओं के संपूर्ण श्रीकृष्ण — दिव्यता की अवधारणा
व्याख्यान के दौरान लीना दीदी ने बताया कि श्रीकृष्ण सोलह कलाओं से संपन्न, सर्वांग सुंदर, पूर्ण पवित्र और दैवीय गुणों की पराकाष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण यह संदेश देता है कि पवित्रता, शांति और सुख से परिपूर्ण सतयुग अर्थात स्वर्ग की स्थापना धरती पर किस प्रकार संभव होती है।
उन्होंने आगे कहा कि राजयोग की शिक्षा के माध्यम से प्रत्येक आत्मा अपने संस्कारों को शुद्ध कर सकती है और श्रीकृष्ण जैसे दिव्य एवं चैतन्य स्वरूप को प्राप्त कर सकती है। इसके लिए आवश्यक है दृढ़ संकल्प, नियमित ध्यान और अपने विचारों पर सजग नियंत्रण। उन्होंने उपस्थित लोगों को रोजाना कुछ समय आत्म-चिंतन में बिताने और राजयोग ध्यान के अभ्यास की प्रेरणा भी दी।
आत्मा के जागरण का आह्वान है जन्माष्टमी
अपने संबोधन के दौरान लीना दीदी ने वर्तमान समय की चुनौतियों — तनाव, आक्रोश, लोभ और अशांति — से मुक्ति का मार्ग भी सुझाया। उन्होंने कहा, “जन्माष्टमी हमें अपने भीतर निहित वासनाओं और विकारों के कंस को समाप्त कर आत्मिक शक्ति जगाने के लिए प्रेरित करता है। यह पर्व हमें जीवन में प्रेम, शांति, खुशी और करुणा जैसे गुणों को अपनाने का संदेश देता है। सच मानिए तो जन्माष्टमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य आह्वान है।”
बच्चों की प्रस्तुतियों ने चुरा लिया सबका दिल
कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र छोटे-छोटे बच्चों की वो प्रस्तुतियां रहीं, जिनमें उन्होंने बालकृष्ण और बालगोपाल के रूप में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। माखन चोरी करते नटखट कान्हा और रास रचाते गोपियों के दृश्यों को देखकर उपस्थित श्रद्धालु अभिभूत हो उठे। भक्ति गीतों, भजनों और कृष्ण जन्म कथा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और दिव्य बना दिया।
मंच पर झूलते बालकृष्ण की झांकी और मटकियों से सजाए गए परिसर ने वृंदावन की झलक उपस्थित सभी को दी। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों को सत्विक प्रसाद वितरित किया गया तथा प्रत्येक अतिथि को आशीर्वाद और आध्यात्मिक साहित्य भेंट किया गया।
ब्रह्माकुमारी संस्था: विश्व कल्याण की ओर कदम
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी विश्व विद्यालय के प्रतिनिधियों ने बताया कि संस्था विश्वभर में मुफ्त राजयोग ध्यान की शिक्षा दे रही है और नोएडा के इन केन्द्रों पर नियमित रूप से आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान शिविर तथा चिकित्सा के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। नगर के निवासी अपने मानसिक तनाव और जीवन की समस्याओं के समाधान हेतु इन केन्द्रों पर किसी भी दिन जा सकते हैं।
कार्यक्रम में आए अनेक श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऐसे आयोजन से उन्हें मानसिक शांति, नई ऊर्जा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त होता है। कई श्रद्धालुओं ने राजयोग की शिक्षा लेने में भी अपनी रुचि व्यक्त की।


























