ग्रेटर नोएडा में निजी बसों के संचालन को लेकर लंबे समय से चल रही अनियमितताओं पर आखिरकार प्रशासन की गदा पड़ गई है। परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चल रही एक स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ हुई जघन्य घटना के बाद जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस एक साथ मैदान में उतर आए हैं। संयुक्त जांच अभियान के पहले ही दौर में ऐसी 9 निजी बसें पकड़ी गईं, जो यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े तमाम मानकों को ताक पर रखकर चल रही थीं।
जांच में खुली सुरक्षा मानकों की पोल
परिवहन विभाग की टीमों ने जब इन बसों का निरीक्षण किया, तो अंदर की तस्वीर देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, इन बसों की खिड़कियों पर इतने गहरे रंग के पर्दे लटकाए गए थे कि अंदर बैठे यात्री बाहर से बिल्कुल नहीं झलकते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कुछ बसों में शीशे से बंद करके अवैध प्राइवेट केबिन बना दिए गए थे, जो किसी भी सूरत में नियमों के अनुरूप नहीं थे।
इसके अलावा सवाल-ए-जवाबदेह यह है कि इन बसों में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे थे और न ही आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जाने वाला पैनिक बटन। यानी अगर कोई यात्री बस के अंदर मुसीबत में फंसे, तो उसके पास मदद की कोई चूं तक नहीं होती।
4 अगस्त की घटना बनी कार्रवाई की वजह
बता दें कि 4 अगस्त को इसी तरह की एक बस में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत की गई थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन यह मामला यहीं नहीं रुका। जब जांच एजेंसियों ने इसी ट्रेवल्स और उसी रूट पर चल रही दूसरी निजी बसों की पड़ताल शुरू की, तो पर्दा और भी उठ गया। जिस बस में छात्रा के साथ घटना हुई थी, वह भी सुरक्षा मानकों की त्रासद उल्लंघन की गवाह बनी।
छलेरा से जब्त, मोरना डिपो में खड़ी कीं बसें
परिवहन विभाग की टीम ने सेक्टर-44 स्थित छलेरा क्षेत्र से इन सभी उल्लंघन करने वाली 9 बसों को जब्त कर लिया है। इन बसों को अभी मोरना डिपो में खड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन बसों के मालिक तमाम कमियां दूर नहीं कर देते और वांछित सुरक्षा उपकरण नहीं लगवाते, तब तक इन्हें रोड पर उतरने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जिले में कितनी निजी बसें चलती हैं?
गौतमबुद्ध नगर जिले में इस समय कुल 696 निजी बसें पंजीकृत हैं, जिनका संचालन 90 अलग-अलग ऑपरेटर्स करते हैं। इनमें से अधिकतर बसें नोएडा के बॉटनिकल गार्डन से अपनी यात्रा शुरू करती हैं और दिल्ली समेत आसपास के इलाकों तक यात्रियों को ढुलाई का काम करती हैं।
पंजीकृत रूट के अलावा ये बसें कई जगहों पर बीच रास्ते रुककर अवैध रूप से सवारियां भरती हैं। चिल्ला बॉर्डर, महामाया फ्लाईओवर, सेक्टर-52, सेक्टर-76, मॉडल टाउन, छिजारसी, एडवंट और जीरो प्वाइंट जैसे इलाकों में यह अनियमितता लंबे समय से चली आ रही है।
इससे दोहरा खतरा पैदा होता है। पहली दिक्कत यह कि तेज रफ्तार वाले हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अचानक बस रुकने से पीछे आ रही गाड़ियों को टक्कर का खतरा रहता है, जो कई बार भीषण हादसों का कारण बन चुका है। दूसरी तरफ, बड़ी बसें अनियंत्रित तरीके से रुकने से ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति पैदा होती है और पूरे रूट का व्यवस्थित प्रवाह चौपट हो जाता है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन को मिली सख्त चेतावनी
एक्शन के बाद ट्रैफिक पुलिस ने ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की है। बैठक में ऑपरेटर्स को साफ-साफ बता दिया गया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बताया गया है कि सीसीटीवी और पैनिक बटन जैसे उपकरण लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें चालू और बेहतर हालत में रखना भी ऑपरेटर की जिम्मेदारी होगी।

























