नोएडा में किसानों की अर्जित भूमि के बदले दिए जाने वाले अधिकारों को लेकर अब बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। नोएडा प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए जाने और “आबादी जहां है, जैसी है” के आधार पर भूमि छोड़ने सहित अन्य लंबित मांगों को शामिल करने का आश्वासन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह ने दिया है। यह आश्वासन ग्राम विकास संगठन नोएडा के पदाधिकारियों द्वारा सौंपे गए प्रत्यावेदनों पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद सामने आया है।
जनसुनवाई कक्ष में पहुंचे किसान पक्ष के पदाधिकारी
ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी आज सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय के जनसुनवाई कक्ष पहुंचे। यहां उन्होंने अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह को दो अलग-अलग प्रत्यावेदन सौंपे और क्षेत्र के किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं से प्रशासन को रूबरू कराया।
वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक
प्रत्यावेदन सौंपते समय संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने एसीईओ को अवगत कराया कि इससे पूर्व दिनाँक 29 मई को संगठन के पदाधिकारियों की प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल के अलावा विशेष कार्य अधिकारी क्रांति शेखर, महाप्रबंधक (नियोजन) अरविंद कुमार, महाप्रबंधक अशोक कुमार अरोड़ा और महाप्रबंधक एसपी सिंह उपस्थित रहे। उक्त बैठक में किसानों से जुड़े तीन प्रतिवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें
- करार नियमावली 1997 के अनुसार 10 प्रतिशत आबादी भूखंड: किसानों की अर्जित भूमि के सापेक्ष करार नियमावली 1997 का पालन करते हुए समस्त किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड प्रदान किए जाएं। दरअसल, इस नियमावली के तहत अधिगृहीत भूमि के बदले किसानों को आबादी भूखंड देने की व्यवस्था है, जिसका पूरा लाभ किसान परिवारों तक अब तक नहीं पहुंचा है।
- “आबादी जहां है, जैसी है” के आधार पर डी-नोटिफिकेशन: जिन भूखंडों पर आबादी बसी है, वहां भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 48 के तहत ऐसी भूमि को डी-नोटिफाई किए जाने की मांग की गई है, ताकि वर्षों से विवाद में फंसी आबादी को कानूनी रास्ता मिल सके।
- गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करना: नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया था, जिससे गांवों की बुनियादी ढांचा सुविधाओं में सुधार हो सके।
अशोक चौहान ने बताया कि इन मुद्दों पर हुई बैठक का कार्यवृत्त नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने सक्षम स्तर से अनुमोदन के उपरांत जारी किया था। अर्थात बैठक में हुई बातचीत आधिकारिक रूप से दर्ज है और उसके दस्तावेज किसान पक्ष के पास मौजूद हैं।
“किसानों का कागज बोलता है” अशोक चौहान
प्राधिकरण पर सीधा हमला बोलते हुए अशोक चौहान ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण ने किसानों के साथ छल-कपट किया है। उन्होंने कहा, “किसानों का कागज बोलता है कि प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों के साथ धोखा किया है और उनके अधिकारों पर डाका डाला है।”

उन्होंने कहा कि किसानों के पक्ष में सभी साक्ष्य और दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद प्राधिकरण ने किसानों को उनका हक और अधिकार नहीं दिया है। इसी वजह से आए दिन किसान प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।
एसीईओ ने दिया आश्वासन
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह ने संगठन के पदाधिकारियों की बातें गंभीरता से सुनीं और दोनों प्रत्यावेदनों को ध्यान से पढ़कर उनका अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आगामी बोर्ड बैठक में किसानों के 10 प्रतिशत आबादी भूखंड तथा “आबादी जहां है, जैसी है” के आधार पर भूमि छोड़ने सहित अन्य मुद्दों को शामिल किया जाएगा।
साथ ही उन्होंने ओएसडी हर्षिता तिवारी को बोर्ड बैठक के लिए एजेंडा तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों के मुद्दे बिना किसी देरी के बैठक के एजेंडे का हिस्सा बन सकें।
अब बोर्ड बैठक का फैसला तय करेगा रास्ता
एसीईओ के आश्वासन के बाद किसान पक्ष में उम्मीद की लहर दौड़ी है, लेकिन असली अग्निपरीक्षा तब होगी, जब बोर्ड बैठक में ये प्रस्ताव स्वीकृत होंगे और उन पर जमीनी कार्रवाई शुरू होगी। किसानों को दशकों पुरानी मांगों का न्याय मिलता है या इस बार भी आश्वासन हवा में रह जाता है, यह आगामी बोर्ड बैठक तय करेगी। तब तक किसान पक्ष अपने दस्तावेजों और जारी कार्यवृत्त के सहारे अपनी लड़ाई को संस्थागत रूप देने की तैयारी में जुटा है।























