Kurukshetra News: हरियाणा में अचानक बदले मौसम ने धान उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुरुक्षेत्र की अनाज मंडियों में तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश के कारण खुले में रखा धान भीग गया। मौसम में अचानक आए बदलाव की वजह से किसानों और आढ़तियों को अपनी उपज ढकने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। ऐसे में मंडियों में पहुंच चुकी फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बारिश के कारण कई स्थानों पर मंडी परिसर में पानी जमा होने की स्थिति भी सामने आई है। एक ओर किसान अपनी उपज को खराब होने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धान के उठान में देरी से मंडियों में खुले में रखे स्टॉक की चिंता बढ़ गई है। खेतों में अभी धान की कटाई बाकी होने के कारण मौसम की मार किसानों के लिए दोहरी परेशानी बन गई है।
मंडी में जलभराव से निपटने के लिए विशेष टीमें तैनात
बारिश के बाद मंडी परिसर में जमा पानी की निकासी प्रशासन के सामने अहम चुनौती बन गई। थानेसर मार्केट कमेटी के सचिव हरजीत सिंह के मुताबिक, जलभराव की समस्या दूर करने के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। मंडी की नालियों में जमा धान के छिलकों और अन्य कचरे को हटाकर सफाई कराई जा रही है, जिससे बारिश का पानी जल्द बाहर निकाला जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, मंडी परिसर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। पानी जमा रहने से धान की बोरियों और खुले में रखी उपज को अतिरिक्त नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में निकासी व्यवस्था को जल्द सामान्य बनाना जरूरी है।
मार्केट कमेटी को उम्मीद है कि सफाई और पानी निकासी का काम पूरा होने के बाद मंडी में सामान्य गतिविधियां बहाल करने में मदद मिलेगी।
कुरुक्षेत्र मंडी में 16.12 लाख क्विंटल धान की आवक
धान खरीद सीजन के दौरान कुरुक्षेत्र की मंडियों में बड़ी मात्रा में उपज पहुंच चुकी है। मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक लगभग 16 लाख 12 हजार क्विंटल धान मंडियों में आ चुका है।
इसमें से करीब 15 लाख 10 हजार क्विंटल धान की सरकारी खरीद की जा चुकी है। वहीं, लगभग 11 लाख 78 हजार क्विंटल धान का उठान भी पूरा हो चुका है। हालांकि, खरीद और उठान के बीच अंतर के कारण मंडी परिसर में अभी भी बड़ी मात्रा में धान खुले में रखा हुआ है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब ढाई लाख क्विंटल धान उठान की प्रतीक्षा में है। बारिश के बाद इस स्टॉक की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि खुले में रखी फसल को नमी से बचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि मौसम साफ रहने पर शेष धान का उठान इसी सप्ताह तेज गति से पूरा कराया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रगति मौसम की स्थिति और परिवहन व्यवस्था पर भी निर्भर करेगी।
तूफान से बिजली आपूर्ति प्रभावित, जनरेटर से चल रहा काम
तेज हवाओं और तूफान का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं रहा। मंडी क्षेत्र के कुछ स्थानों पर बिजली के खंभे उखड़ने और तार टूटने की जानकारी सामने आई, जिसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इससे मंडी में होने वाले नियमित कामकाज पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई।
बिजली विभाग को समस्या की सूचना दे दी गई है। विभागीय कर्मचारी क्षतिग्रस्त व्यवस्था की मरम्मत में जुटे हैं। बिजली बहाल होने तक जरूरी कार्यों को जारी रखने के लिए जनरेटरों का सहारा लिया जा रहा है।
मंडी में धान की तुलाई और अन्य जरूरी गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। बिजली आपूर्ति जल्द बहाल होना भी धान खरीद और उठान की प्रक्रिया को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
खेतों में खड़ी धान की फसल ने बढ़ाई किसानों की चिंता
कुरुक्षेत्र की मंडियों में रखी उपज के साथ-साथ खेतों में खड़ी धान की फसल को लेकर भी किसान चिंतित हैं। इससे पहले हुई बारिश के कारण धान की कटाई में देरी होने की बात सामने आई थी। अब दोबारा मौसम बिगड़ने से कटाई और उपज को सुरक्षित मंडी तक पहुंचाने की चुनौती बढ़ गई है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार खराब मौसम की स्थिति में कटाई, सुखाई और भंडारण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। मंडी में पहुंच चुकी फसल को भी समय पर उठाया जाना जरूरी है, ताकि खुले में रखे धान को बारिश और नमी से बचाया जा सके।
हालांकि, मौजूदा बारिश से कुल कितने क्विंटल धान को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, इसका सटीक आकलन अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल पूरी फसल के नुकसान का कोई निश्चित आंकड़ा देना उचित नहीं होगा। नुकसान का सही अनुमान लगाने के लिए प्रभावित उपज की जांच और स्थिति का आकलन जरूरी है।
प्रशासन से जल्द राहत की उम्मीद
बारिश के बाद किसानों और आढ़तियों की निगाहें अब पानी निकासी, बिजली आपूर्ति की बहाली और धान के उठान पर टिकी हैं। मंडी में बड़ी मात्रा में उपज खुले में रखे होने के कारण समय पर उठान और सुरक्षित भंडारण का महत्व बढ़ गया है।
प्रशासन और मार्केट कमेटी के सामने फिलहाल तीन प्रमुख चुनौतियां हैं—मंडी से पानी निकालना, बाधित बिजली व्यवस्था को ठीक कराना और उठान के इंतजार में रखे धान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना।
यदि मौसम साफ रहता है और उठान की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है, तो किसानों को राहत मिल सकती है। वहीं, खेतों में खड़ी फसल की कटाई के लिए भी अनुकूल मौसम जरूरी है। फिलहाल किसान उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासनिक व्यवस्थाएं जल्द दुरुस्त हों, जिससे बारिश के कारण पैदा हुई परेशानियों को कम किया जा सके।



























