Mira Bhayandar News: महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच सेल-4 ने एमडी ड्रग्स के निर्माण और तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के पटनचेरु स्थित पशमैलाराम औद्योगिक क्षेत्र में छापा मारकर कथित अवैध रासायनिक फैक्ट्री का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में एमडी ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला 44.699 किलोग्राम नियंत्रित रासायनिक पाउडर जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 27.06 लाख रुपये बताई गई है। मामले में अब तक कुल 25 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की बिक्री तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ड्रग्स बनाने के लिए आवश्यक रसायनों की आपूर्ति, प्रयोगशाला उपकरणों की व्यवस्था, उत्पादन, तस्करी और वित्तीय लेनदेन से जुड़े लोग भी कथित तौर पर शामिल थे। जांच के दौरान महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना तक फैले इस नेटवर्क की कड़ियां सामने आई हैं।
नालासोपारा से शुरू हुई जांच, कई राज्यों तक पहुंची पुलिस
बता दें कि इस पूरे मामले का खुलासा 24 जून 2026 को नालासोपारा पूर्व के प्रगति नगर इलाके में हुआ था। पुलिस के मुताबिक, प्रिया वॉशिंग सेंटर के पास बाबा पार्किंग क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अविनाश उर्फ सोनू अय्यर (22) और रविकांत राम (23) को पकड़ा गया था। उनके पास से 112 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब 3.36 लाख रुपये आंकी गई।
इस बरामदगी के बाद तुलिंज पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट समेत संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। शुरुआती जांच के बाद प्रकरण की जिम्मेदारी मीरा-भाईंदर वसई-विरार पुलिस की क्राइम ब्रांच सेल-4 को सौंपी गई। इसके बाद जांच टीम ने आरोपियों के संपर्कों, रासायनिक पदार्थों की आपूर्ति और ड्रग्स के उत्पादन से जुड़े संभावित ठिकानों की पड़ताल शुरू की।
गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी सामने आईं अवैध फैक्ट्रियां
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को गुजरात के कच्छ जिले और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एमडी ड्रग्स के कथित अवैध निर्माण से जुड़े ठिकानों की जानकारी मिली। इन स्थानों पर कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों के साथ रसायन, नकदी और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रयोगशाला उपकरण जब्त किए गए।
पुलिस के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में कुल 69 किलोग्राम 871 ग्राम एमडी, 260 लीटर रसायन और ड्रग्स निर्माण से संबंधित अन्य सामग्री बरामद की गई है। अलग-अलग राज्यों में की गई इन कार्रवाइयों से जांच एजेंसियों को कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके आपूर्ति तंत्र को समझने में मदद मिली।
इस मामले में महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों के अलावा मुंबई, गुजरात और उत्तर प्रदेश से जुड़े संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में मुर्तुजा पात्रावाला उर्फ मोंटो उर्फ हसनैन भोपाली, शुभम मोरे, सलीम इस्माइल उर्फ डोला, साबिर देवलेकर उर्फ किंग मेमन और मोहम्मद तहरीम सिद्दीकी समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
तेलंगाना में छापा, नियंत्रित रसायन बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को क्राइम ब्रांच सेल-4 की टीम ने तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के पशमैलाराम औद्योगिक क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान रमेश बाबू साके को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह मेफेड्रोन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नियंत्रित रसायन 2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन का अवैध उत्पादन और आपूर्ति कर रहा था।
छापेमारी में 44.699 किलोग्राम रासायनिक पाउडर के साथ निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले अन्य रसायन और प्रयोगशाला उपकरण भी जब्त किए गए। बरामद रासायनिक पाउडर की अनुमानित कीमत 27.06 लाख रुपये बताई गई है।
इस कार्रवाई में साइबराबाद पुलिस आयुक्तालय के पटनचेरु पुलिस विभाग ने स्थानीय स्तर पर सहयोग किया। अंतरराज्यीय समन्वय के जरिए की गई इस कार्रवाई को ड्रग्स के कथित उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नशीले पदार्थों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक फैला था नेटवर्क
मीरा-भाईंदर पुलिस की जांच के मुताबिक, इस गिरोह में अलग-अलग भूमिकाएं निभाने वाले लोग सक्रिय थे। कुछ पर एमडी ड्रग्स के उत्पादन में शामिल होने, कुछ पर आवश्यक रसायनों और लैब उपकरणों की आपूर्ति करने, जबकि अन्य पर नशीले पदार्थों की तस्करी, बिक्री और वित्तीय लेनदेन में भूमिका निभाने का आरोप है।
जांच में सामने आए संपर्कों के तार नालासोपारा, मुंबई, कल्याण, नेरल और जलगांव के अलावा गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा तेलंगाना तक जुड़े पाए गए हैं। कई राज्यों में फैले इन कथित संपर्कों के कारण पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर जांच और कार्रवाई करनी पड़ी।
अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि जब्त रासायनिक पदार्थों की आपूर्ति किन लोगों के जरिए की जाती थी, कथित फैक्ट्रियों में तैयार होने वाले नशीले पदार्थ कहां भेजे जाते थे और इस पूरे कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन का दायरा कितना बड़ा था।



























