असम में हालिया बेदखली अभियान को लेकर बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉक्टर शफीकुर रहमान ने चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मुस्लिम परिवारों को निशाना बनाया गया और कार्रवाई के दौरान उनके घरों के साथ कुछ मस्जिदें भी तोड़ी गईं। रहमान के मुताबिक, दो दिनों में 1,100 से अधिक परिवार बेदखली से प्रभावित हुए। हालांकि, ये आंकड़े और मस्जिदों को लेकर किए गए दावे उनके बयान पर आधारित हैं।
रहमान ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि असम की कार्रवाई को लेकर वह चिंतित हैं। उन्होंने दावा किया कि रविवार, 18 अक्टूबर को नगांव जिले के लुटुमरी-लोंगजाप आरक्षित वन क्षेत्र में 600 से अधिक मुस्लिम परिवारों के घर गिराए गए। उनके अनुसार, इससे एक दिन पहले यानी 17 अक्टूबर को असम के तीन जिलों में 547 परिवारों को बेदखल किया गया था।
दो दिनों में 1,100 से अधिक परिवार प्रभावित होने का दावा
शफीकुर रहमान ने अपने बयान में कहा कि 17 और 18 अक्टूबर की कार्रवाइयों को मिलाकर 1,100 से ज्यादा परिवारों को बेदखली का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय निवासियों के मुताबिक, अभियान के दौरान 10 मस्जिदें तोड़ी गईं। रहमान के दावे के अनुसार, इनमें कुछ मस्जिदें 50 साल से अधिक पुरानी थीं।
इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती। इसलिए इन्हें बांग्लादेशी नेता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। असम में बेदखली की कार्रवाई को लेकर प्रशासन का पक्ष और प्रभावित परिवारों की स्थिति समझने के लिए आधिकारिक जानकारी तथा विश्वसनीय स्थानीय रिपोर्टों को साथ देखना जरूरी है।
भारत में मुस्लिमों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
रहमान ने आरोप लगाया कि भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पर्याप्त रक्षा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां मानवता, कानून के शासन और सभ्य समाज के मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उनके बयान में असम की कार्रवाई के अलावा गुजरात में मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया।
उन्होंने अहमदाबाद की करीब 400 साल पुरानी मंचा मस्जिद के एक हिस्से को हटाने से जुड़े गुजरात हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। इसके साथ ही, उन्होंने सितंबर 2024 में गिर सोमनाथ में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को हटाए जाने की कार्रवाई का भी जिक्र किया। इन मामलों पर अदालतों और प्रशासन की कार्यवाही को समझने के लिए संबंधित आदेशों और सरकारी रिकॉर्ड का संदर्भ जरूरी है।
बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव न बढ़ने की अपील
भारत में मुस्लिमों की सुरक्षा को लेकर आलोचना करने के साथ ही रहमान ने बांग्लादेश के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि भारत की घटनाओं को लेकर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे बांग्लादेश में धार्मिक विभाजन या सामाजिक अशांति बढ़े।
रहमान ने अपने संदेश में लोगों से उकसावे में न आने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि किसी को भी ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देनी चाहिए, जिसमें देश के भीतर समुदायों के बीच तनाव बढ़े। उन्होंने अपनी बात का समापन शांति और सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना के साथ किया।
बेदखली कार्रवाई और दावों पर नजर
असम में बेदखली अभियान को लेकर रहमान का बयान ऐसे समय आया है, जब भूमि और आरक्षित वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बहस जारी है। ऐसी कार्रवाई में प्रभावित परिवारों की संख्या, जमीन की स्थिति, नोटिस और पुनर्वास जैसे मुद्दे अहम होते हैं। किसी भी दावे का मूल्यांकन करते समय सरकारी दस्तावेजों, अदालत के आदेशों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुष्ट जानकारी को देखना जरूरी है।
फिलहाल, रहमान ने अपने बयान में असम में 1,100 से अधिक परिवारों के बेदखल होने और 10 मस्जिदें तोड़े जाने का दावा किया है। उन्होंने इसे मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा से जोड़ते हुए भारत सरकार की आलोचना की। साथ ही, उन्होंने बांग्लादेश में लोगों से संयम बरतने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने को कहा है।



























