अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और वे इसे पूरा करना चाहते हैं। ट्रंप के मुताबिक, भारत के साथ होने वाला यह समझौता पहले किए गए व्यापारिक समझौतों से अलग हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इसकी शर्तों या अंतिम रूप देने की तारीख के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं। रुबियो ने भी कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही है और इसे कुछ ही हफ्तों में पूरा किए जाने की उम्मीद है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है, लेकिन समझौते की घोषणा से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति बनना बाकी हो सकता है।
ट्रंप बोले—दोनों देश समझौते के करीब
एक प्रेस ब्रीफिंग में ट्रंप से पूछा गया कि क्या भारत के साथ व्यापार समझौता होने वाला है। जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ समझौता करना चाहता है और दोनों देश इसके काफी करीब हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित डील का स्वरूप पहले किए गए समझौतों जैसा नहीं होगा।
ट्रंप की “अलग तरह के समझौते” वाली टिप्पणी ने इस बातचीत को लेकर दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस अंतर का संबंध टैरिफ, बाजार तक पहुंच, आयात-निर्यात के नियमों या किसी अन्य व्यापारिक शर्त से है। समझौते का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि इसका भारत और अमेरिका के कारोबार पर क्या असर पड़ेगा।
रुबियो ने कहा—बातचीत पर करीबी नजर
भारत दौरे के दौरान रुबियो ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे खुद व्यापार वार्ता में सीधे शामिल नहीं हैं। उनके मुताबिक, बातचीत की जिम्मेदारी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और संबंधित वार्ताकारों की है। इसके बावजूद वे चर्चा पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
रुबियो ने उम्मीद जताई कि समझौते को पूरा होने में कई महीने नहीं लगेंगे और इसे कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि घोषणा से पहले हर महत्वपूर्ण विवरण पर स्पष्टता और सहमति होना जरूरी है। उनका तर्क है कि इतने अहम द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े समझौते में जल्दबाजी करने के बजाय सभी शर्तों को ठीक से तय करना बेहतर होगा।
अंतिम घोषणा से पहले जरूरी है हर बिंदु पर सहमति
व्यापार समझौतों में टैरिफ, बाजार तक पहुंच, वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार, नियामकीय नियम और अलग-अलग उद्योगों के हित जैसे कई विषय शामिल हो सकते हैं। इसलिए किसी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले दोनों पक्षों को उसके प्रभाव और शर्तों पर विचार करना पड़ता है।
रुबियो ने कहा कि सार्वजनिक घोषणा से पहले हर छोटी-बड़ी बात पर सहमति होना महत्वपूर्ण है, ताकि समझौते को लेकर भ्रम न रहे और द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने भारत के लिए संभावित नतीजे को फायदेमंद बताया, लेकिन उपलब्ध बयान में उन्होंने किसी खास उत्पाद, क्षेत्र या टैरिफ दर का उल्लेख नहीं किया। इसलिए समझौते के वास्तविक लाभ का आकलन उसके आधिकारिक विवरण के बाद ही किया जा सकेगा।
भारत की विविधता समझने पर रुबियो का जोर
रुबियो ने भारत के विशाल आकार और क्षेत्रीय विविधता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी बड़े देश को समझने के लिए केवल उसकी राजधानी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा करने से देश की अर्थव्यवस्था, लोगों और स्थानीय परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने यह भी माना कि विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में भारत के हर हिस्से को देख पाना संभव नहीं होगा। फिर भी, जितना संभव हो सके देश के अलग-अलग क्षेत्रों और उनकी विशेषताओं को जानना महत्वपूर्ण है। रुबियो की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों को केवल व्यापार वार्ता तक सीमित न रखकर व्यापक स्तर पर देखने की उनकी कोशिश को दर्शाती है।



























