Dwarka Dussehra 2026:राष्ट्रपति मुर्मु, CM रेखा गुप्ता द्वारका दशहरा समारोह में

Dwarka Dussehra 2026: दिल्ली के द्वारका दशहरा समारोह 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, CM रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा शामिल हुए। जानिए 221 फीट रावण दहन और आयोजन की खास बातें।

राष्ट्रपति मुर्मु, रेखा गुप्ता द्वारका दशहरा समारोह में

HIGHLIGHTS

  • द्वारका दशहरा में पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मु, रावण दहन
  • दिल्ली में 221 फीट रावण, राष्ट्रपति मुर्मु पहुंचीं
  • द्वारका में रावण दहन, राष्ट्रपति मुर्मु भी पहुंचीं
  • रेखा गुप्ता संग राष्ट्रपति मुर्मु ने देखा दशहरा

Dwarka Dussehra 2026: दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 में आज मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर दशहरा समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया। द्वारका सेक्टर-10 स्थित रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए। भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस पर्व पर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। समारोह का प्रमुख आकर्षण 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन रहा।

बता दें कि द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में रामायण के प्रसंगों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और मर्यादा का संदेश दिया गया। राष्ट्रपति की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया। दशहरे के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग रामलीला के समापन और रावण दहन को देखने के लिए जुटे।

द्वारका दशहरा समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी

द्वारका में आयोजित दशहरा समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति रही। राष्ट्रपति ने विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की विजय से जुड़ी परंपरा में हिस्सा लिया। रामलीला के दौरान राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया गया, जिसके बाद रावण दहन के साथ कार्यक्रम का मुख्य धार्मिक प्रसंग पूरा हुआ।

दशहरा भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म, न्याय और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम की ओर से रावण पर विजय को केवल एक पौराणिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और नकारात्मक शक्तियों पर नैतिक मूल्यों की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दशहरे की पूर्व संध्या पर देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं भी दी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी संदेश में इस पर्व को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया गया। इस संदेश का मूल भाव समाज में सद्भाव, सकारात्मकता और अच्छे मूल्यों को मजबूत करने से जुड़ा है।

CM रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा भी समारोह में शामिल

बता दें कि द्वारका के दशहरा समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। राष्ट्रपति के साथ मुख्यमंत्री और मंत्री की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।

दिल्ली में दशहरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। रामलीला समितियां हर वर्ष इस पर्व के माध्यम से भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। ऐसे आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से त्योहार के सामाजिक महत्व को भी प्रमुखता मिलती है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा के संबोधन से जुड़ी किसी विशिष्ट टिप्पणी या बयान की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इसलिए उनके नाम से कोई अपुष्ट बयान जोड़ने के बजाय कार्यक्रम में उनकी भागीदारी और आयोजन के महत्व पर ध्यान देना जरूरी है।

221 फीट ऊंचा रावण बना द्वारका दशहरे का मुख्य आकर्षण

इस वर्ष द्वारका के दशहरा समारोह की सबसे खास बात 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन रहा। द्वारका श्री रामलीला सोसायटी ने अपनी 15वीं रामलीला के तहत इस भव्य आयोजन की तैयारी की थी। सेक्टर-10 स्थित रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को लेकर पहले से ही लोगों में उत्सुकता थी।

विशाल रावण का पुतला समारोह को आकर्षक बनाने के साथ-साथ दशहरे की पारंपरिक पहचान को भी दर्शाता है। रावण दहन के दौरान लोगों के लिए यह क्षण भगवान श्रीराम की विजय और बुराई के अंत का प्रतीक बनता है।

रामलीला में रावण, कुंभकरण और मेघनाद से जुड़े प्रसंगों का मंचन दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ता है। विजयादशमी पर इन प्रसंगों का समापन भगवान श्रीराम की विजय के साथ होता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए द्वारका में दशहरा समारोह आयोजित किया गया।

द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की रामलीला क्यों है खास?

द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की ओर से आयोजित रामलीला क्षेत्र के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। वर्ष 2026 में इसकी 15वीं रामलीला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर संपन्न हुआ।

रामलीला के अलग-अलग दिनों में रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। इनमें भगवान राम का वनवास, सीता हरण, लंका दहन, रामसेतु निर्माण और राम-रावण युद्ध जैसे प्रसंग शामिल रहे। इन दृश्यों के माध्यम से दर्शकों को रामायण की कथा से परिचित कराने के साथ उसके नैतिक संदेशों को भी सामने रखा गया।

रामलीला का महत्व केवल मंच पर होने वाले अभिनय तक सीमित नहीं है। इसमें कलाकारों, आयोजकों, तकनीकी टीमों और स्थानीय लोगों की भागीदारी होती है। यह आयोजन सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी उदाहरण है।

दशहरा देता है बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन इस त्योहार के प्रमुख आकर्षण हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध कर धर्म और न्याय की स्थापना की थी।

हालांकि, दशहरे का संदेश आज के सामाजिक जीवन में भी प्रासंगिक है। यह पर्व लोगों को अहंकार, क्रोध, अन्याय और नकारात्मक सोच से दूर रहने की प्रेरणा देता है। रावण दहन को प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर मौजूद बुराइयों को समाप्त करने के संकल्प से भी जोड़कर देखा जाता है।

द्वारका में आयोजित समारोह ने इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा की मौजूदगी के बीच आयोजित कार्यक्रम ने विजयादशमी के धार्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।

दिल्ली में दशहरा समारोहों की रही खास रौनक

द्वारका के अलावा दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी के अवसर पर रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजधानी में दशहरा हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। इन आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी अवसर मिलता है।

द्वारका सेक्टर-10 का आयोजन इस बार 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले और राष्ट्रपति की मौजूदगी के कारण विशेष चर्चा में रहा। कार्यक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि रामलीला और दशहरा भारतीय समाज में सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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