dhruv rathi london pradarshan: लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में आयोजित एक राजनीतिक सभा के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया, जब ध्रुव राठी के समर्थन में जुटे प्रदर्शनकारियों और उनके विरोध में आए दूसरे समूह के बीच नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को एक-दूसरे से दूर रखा। यह प्रदर्शन भारत की निर्वाचन व्यवस्था, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह सभा शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास हुई। इसमें ध्रुव राठी ने संबोधन दिया। प्रदर्शन में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा के साथ कुछ छात्र संगठनों और अन्य समूहों के प्रतिनिधि शामिल हुए। दूसरी ओर, इंडिया डायस्पोरा यूके के बैनर तले जवाबी प्रदर्शन किया गया। दोनों पक्षों ने अपने विचारों के समर्थन में नारे लगाए, जिससे कार्यक्रम स्थल पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरे की मदद से दोनों समूहों को अलग रखा। उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बड़ी झड़प या गंभीर चोट की पुष्टि नहीं की गई है।
पार्लियामेंट स्क्वायर में क्यों जुटे प्रदर्शनकारी?
आयोजकों और प्रदर्शनकारियों ने सभा के जरिए भारत की चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ आवाज उठाई गई। आयोजकों का कहना था कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने यह मांग भी उठाई कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में विपक्ष की भूमिका हो, ताकि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और जनता का भरोसा मजबूत रहे।
ध्रुव राठी ने सभा को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध दर्ज कराने की अहमियत पर बात की। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि भारत पर कभी शासन कर चुकी ब्रिटिश संसद के बाहर खड़े होकर भारतीय नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की बात कर रहे हैं। उनके संबोधन में भारत में विरोध-प्रदर्शनों और नागरिकों की आवाज से जुड़े सवाल भी शामिल थे।
जवाबी प्रदर्शन से बढ़ा तनाव
सभा के दौरान तनाव का कारण केवल राजनीतिक मुद्दे नहीं, बल्कि वहां मौजूद दो समूहों के अलग-अलग विचार भी थे। एक पक्ष चुनावी व्यवस्था और एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था, जबकि दूसरे पक्ष ने जवाबी प्रदर्शन के जरिए अपनी असहमति दर्ज कराई। दोनों ओर से नारेबाजी तेज हुई और कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया।
ऐसे आयोजनों में अलग-अलग राजनीतिक विचारों वाले लोगों का एक ही जगह मौजूद होना तनाव की आशंका बढ़ा सकता है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखी और भीड़ को नियंत्रित किया। मेट्रोपॉलिटन पुलिस की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन आगे किसी बड़ी टकराव की स्थिति में नहीं बदला। घटना को लेकर प्रकाशित रिपोर्टें पुलिस की भूमिका को मुख्यतः दोनों समूहों को अलग रखने और व्यवस्था बनाए रखने के रूप में बताती हैं।
प्रवासी भारतीयों के बीच राजनीतिक बहस
लंदन में हुआ यह प्रदर्शन विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के भीतर भारत के राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर जारी बहस की एक मिसाल है। प्रवासी भारतीय समूहों के कार्यक्रम अब केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं हैं; कई बार वे भारत की राजनीति, लोकतंत्र और सार्वजनिक नीतियों पर अपनी राय भी सामने रखते हैं। सोशल मीडिया के जरिए ऐसे आयोजनों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैलते हैं, जिससे उनका असर स्थानीय कार्यक्रम स्थल से आगे तक पहुंचता है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों और मांगों को स्वतंत्र रूप से जांचे गए निष्कर्षों से अलग समझना जरूरी है। किसी सभा में लगाए गए नारे या दिए गए बयान अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करते। इस मामले में आयोजकों ने चुनावी पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि जवाबी प्रदर्शन करने वाले समूह ने अपनी अलग राजनीतिक राय रखी। दोनों पक्षों की मौजूदगी और पुलिस की निगरानी इस बात को रेखांकित करती है कि विदेश में भी भारत से जुड़े राजनीतिक मुद्दे समुदायों के बीच चर्चा और मतभेद का विषय बने हुए हैं।


























