महर्षि नगर रामलीला में कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण वध

नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव के दौरान कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण वध का मंचन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचे।

सुलोचना-मंदोदरी संवाद ने रामलीला में भावुक किए दर्शक

HIGHLIGHTS

  • रामलीला के रोमांचक मंचन को देखने उमड़े श्रद्धालु
  • सेक्टर-110 में रामलीला, युद्ध के दृश्यों ने बांधा समां
  • कुंभकर्ण से अहिरावण तक, रामलीला में दिखा धर्मयुद्ध
  • मेघनाद वध के मंचन पर दर्शकों ने बजाई तालियां

नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में चल रहे दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को रामायण के कई प्रभावशाली प्रसंगों का मंचन किया गया। महर्षि नगर रामलीला में कुंभकर्ण वध, सुलोचना और मंदोदरी का संवाद, मेघनाद वध और अहिरावण वध जैसे दृश्यों ने दर्शकों को कथा के वीरतापूर्ण और भावनात्मक पक्षों से जोड़ा। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी पहुंचे। मंचन के दौरान युद्ध के रोमांचक दृश्य और परिवारों की पीड़ा से जुड़े प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहे।

युद्ध के दृश्यों के साथ दिखीं मानवीय संवेदनाएं

रामकथा के मंचन में कुंभकर्ण वध और मेघनाद वध के प्रसंगों ने धर्म और अधर्म के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। युद्ध के दृश्य दर्शकों में उत्सुकता जगाते रहे, वहीं सुलोचना और मंदोदरी के संवादों ने कथा में करुणा और मानवीय संवेदनाओं का पक्ष उभारा। इन दृश्यों के जरिए दर्शकों को यह भी देखने का अवसर मिला कि युद्ध का असर केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों और प्रियजनों को भी गहरी पीड़ा देता है।

अहिरावण वध के प्रसंग ने रामकथा की घटनाओं को आगे बढ़ाया और दर्शकों की रुचि बनाए रखी। मंच पर कलाकारों ने कथा को संवादों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। जैसे-जैसे प्रसंग आगे बढ़ते गए, दर्शक भी कथा के भावनात्मक उतार-चढ़ाव से जुड़ते नजर आए।

परिवारों के साथ पहुंचे श्रद्धालु

रामलीला स्थल पर शाम के समय श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की आवाजाही बनी रही। कई लोग परिवार के साथ कार्यक्रम देखने पहुंचे और धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। दर्शकों ने रामायण के प्रसंगों का आनंद लेने के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में भी भाग लिया। लोगों की निरंतर उपस्थिति से महोत्सव स्थल पर उत्साह और रौनक का माहौल रहा।

आयोजकों के अनुसार, महर्षि नगर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और धर्म की विजय के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मंचित प्रसंगों में सत्य, कर्तव्य, त्याग, सेवा और मर्यादा जैसे मूल्यों को प्रमुखता दी गई।

प्रतिदिन हो रहे धार्मिक कार्यक्रम

दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, वेदपाठ, भजन-कीर्तन, प्रवचन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह वैदिक अनुष्ठानों से दिन की शुरुआत होती है, जबकि शाम को भक्ति संगीत और रामलीला का मंचन श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ता है। इन कार्यक्रमों से महर्षि नगर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

महोत्सव में आने वाले लोग मां दुर्गा की आराधना के साथ रामकथा के जरिए भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ रहे हैं। रामलीला के प्रसंग नई पीढ़ी को परिचित कराने और परिवारों को सामूहिक रूप से धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल करने का अवसर भी दे रहे हैं।

स्कृति और मूल्यों का संदेश

आयोजकों ने बताया कि दुर्गा पूजा, विजयादशमी एवं श्रीरामलीला महोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। रामलीला के जरिए बच्चों और युवाओं को सत्य, त्याग, सेवा, कर्तव्य, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों की सीख देने का प्रयास किया जा रहा है।

मेघनाद वध जैसे प्रसंग यह संदेश देते हैं कि शक्ति का दुरुपयोग और अधर्म अंततः विनाश की ओर ले जाते हैं। वहीं सुलोचना और मंदोदरी के संवाद युद्ध के बीच परिवारों की पीड़ा और मानवीय संवेदनाओं को सामने लाते हैं। इस तरह रामलीला मनोरंजन के साथ विचार और सीख का माध्यम भी बन रही है। ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देते हैं।

गणमान्य अतिथि और आयोजन समिति की मौजूदगी

इस अवसर पर महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष एवं महर्षि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रीमान अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा श्री राहुल भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री दुर्गा पूजा, विजयादशमी एवं रामलीला महोत्सव के संयोजक रामेंद्र सचान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।

महर्षि नगर में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का संगम बना हुआ है। रामलीला और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में लोगों की निरंतर भागीदारी से स्पष्ट है कि रामकथा आज भी समाज को संस्कार, सद्भाव और मर्यादित जीवन की प्रेरणा देती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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