महर्षि नगर में रावण वध: रामलीला ने दिया सत्य और धर्म की विजय का संदेश

The Killing of Ravana in Maharshi Nagar:नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में राम-रावण युद्ध और रावण वध का मंचन हुआ। दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव ने सत्य, धर्म और मर्यादा का संदेश दिया।

रावण वध का मंचन देख भावुक हुए दर्शक, रामलीला ने दिया बड़ा संदेश

HIGHLIGHTS

  • राम के बाण से रावण का अंत, महर्षि नगर में गूंजे जय श्रीराम के नारे
  • नोएडा में भव्य रावण वध: रामलीला देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
  • रावण वध के साथ महर्षि नगर में बुराई पर अच्छाई की शानदार जीत
  • महर्षि नगर रामलीला में दिखा रोमांचक युद्ध, रावण वध पर गूंजा परिसर

The Killing of Ravana in Maharshi Nagar: नोएडा सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को राम-रावण युद्ध और रावण वध का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के हाथों रावण का वध होते ही मेला परिसर जयकारों और ‘सत्य की विजय’ के संदेश से गूंज उठा। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और दर्शकों ने इस प्रसंग को देखा। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक उत्साह और मेले की रौनक से पूरा परिसर जीवंत नजर आया।

रावण वध का मंचन रामलीला के प्रमुख प्रसंगों में से एक रहा। जैसे ही श्रीराम ने रावण का अंत किया, दर्शकों ने असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। मेले में लगी दुकानों पर भी लोगों की अच्छी-खासी भीड़ रही। परिवारों और बच्चों ने रामलीला देखने के साथ मेले का आनंद लिया।

रामलीला से मिला सत्य और मर्यादा का संदेश

महर्षि नगर रामलीला में दिखाया गया रावण वध केवल एक पौराणिक युद्ध का दृश्य नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों की याद दिलाने वाला प्रसंग भी है। रामकथा बताती है कि शक्ति, धन और प्रभाव के बावजूद अहंकार, अन्याय और छल का रास्ता व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है। इसके विपरीत, सत्यनिष्ठा, कर्तव्य और सदाचार के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों के सहारे आगे बढ़ सकता है।

रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों तक सत्य, त्याग, सेवा, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों की सीख पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण वध जैसे दृश्य यह संदेश देते हैं कि शक्ति का दुरुपयोग और अधर्म अंततः विनाश का कारण बनते हैं। वहीं, सुलोचना और मंदोदरी के संवाद युद्ध की विभीषिका, परिवारों की पीड़ा और मानवीय संवेदनाओं को सामने लाते हैं।

दुर्गा पूजा और रामलीला महोत्सव में धार्मिक कार्यक्रम

महोत्सव के दौरान प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, वेदपाठ, भजन-कीर्तन, प्रवचन और आरती सहित कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह के वैदिक अनुष्ठानों से लेकर शाम के भक्ति संगीत और रामलीला मंचन तक महर्षि नगर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के साथ रामकथा के जरिए भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार, दुर्गा पूजा, विजयादशमी और श्रीरामलीला महोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। रामलीला के मंचन से नई पीढ़ी को सत्य, त्याग, सेवा, कर्तव्य, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणा देने का प्रयास किया जा रहा है।

सामाजिक जीवन में भी प्रासंगिक है रावण वध का संदेश

रावण वध का संदेश आज के सामाजिक जीवन में भी उतना ही प्रासंगिक है। ईमानदारी केवल व्यक्तिगत गुण नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की मजबूती का आधार है। अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना, सच का साथ देना और अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना रामकथा की अहम सीख है।

विजयादशमी का पर्व लोगों को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लालच, छल और बेईमानी जैसी बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। रामलीला का यह प्रसंग याद दिलाता है कि वास्तविक विजय केवल किसी विरोधी को पराजित करने में नहीं, बल्कि अपने आचरण को सत्यनिष्ठ, न्यायपूर्ण और मर्यादित बनाने में है।

कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

मीडिया प्रभारी ए.के. लाल ने बताया कि इस अवसर पर महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष एवं महर्षि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा राहुल भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे। महोत्सव के संयोजक रामेंद्र सचान के साथ शिशिर श्रीवास्तव, विनोद श्रीवास्तव और विनीत श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम बन रहा है। रावण वध के मंचन के साथ लोगों तक यही प्रेरणा पहुंची कि असत्य चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः विजय सत्य, धर्म और ईमानदारी की ही होती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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