नोएडा रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का अनोखा आध्यात्मिक संदेश

नोएडा के सेक्टर-46 रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक स्टॉल राजयोग ध्यान, आत्मिक शांति और क्रोध-अहंकार जैसे भीतर के रावण पर विजय का संदेश दे रहा है।

नोएडा में ब्रह्माकुमारीज ने बताया दशहरे का असली मतलब

HIGHLIGHTS

  • रावण दहन से पहले जानिए भीतर के रावण की सच्चाई
  • क्रोध-अहंकार ही असली रावण, ब्रह्माकुमारीज का संदेश
  • रामलीला मेले में आत्मिक शांति का संदेश दे रहीं बहनें
  • भीतर के रावण को कैसे हराएं, जानिए राजयोग का महत्व

नवरात्रि और दशहरे के पर्व के बीच नोएडा के सेक्टर-46 स्थित रामलीला ग्राउंड में आयोजित मेले में इस बार आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मपरिवर्तन का संदेश भी लोगों तक पहुंच रहा है। यहां ब्रह्माकुमारीज के सेक्टर-46 केंद्र की ओर से विशेष आध्यात्मिक स्टॉल लगाया गया है। इस स्टॉल के माध्यम से मेले में आने वाले लोगों को राजयोग ध्यान, मानसिक शांति, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों के महत्व से परिचित कराया जा रहा है। स्टॉल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों को पहचानकर उन पर विजय पाने का अवसर भी है।

ब्रह्माकुमारीज के स्टॉल पर राजयोग ध्यान और आत्मिक शांति का संदेश

ब्रह्माकुमारीज सेक्टर-46 केंद्र की प्रभारी एवं स्टॉल की प्रमुख संचालिका बीके लीना दीदी के नेतृत्व में यहां आध्यात्मिक संदेशों, चित्रों और चार्ट्स के माध्यम से लोगों को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मेले में पहुंचने वाले आगंतुक इन संदेशों के जरिए आत्मचिंतन, मन की स्थिरता और अपने व्यवहार में सकारात्मकता लाने के महत्व को समझ रहे हैं।

बीके लीना दीदी ने बताया कि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य केवल परंपराओं का निर्वहन करना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे जीवनोपयोगी संदेशों को अपनाना भी है। रामलीला और दशहरे से जुड़ी परंपराएं बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं। इसी भावना को अपने दैनिक जीवन में उतारना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन ला सके।

दशहरा केवल पुतला दहन नहीं, अपने भीतर की बुराइयों पर विजय का पर्व

दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले का दहन बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्माकुमारीज के आध्यात्मिक स्टॉल पर इसी प्रतीकात्मक संदेश को व्यक्तिगत जीवन से जोड़कर समझाया जा रहा है। यहां लोगों को बताया जा रहा है कि क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच जैसी प्रवृत्तियां व्यक्ति की आंतरिक शांति को प्रभावित करती हैं।

जब तक मनुष्य इन कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास नहीं करता, तब तक बाहरी उत्सव का संदेश उसके जीवन में पूरी तरह साकार नहीं हो पाता। इसलिए दशहरे को आत्ममंथन के अवसर के रूप में भी देखना चाहिए। अपने व्यवहार में संयम लाना, दूसरों के प्रति सम्मान रखना, गलतियों को स्वीकार करना और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना ही आंतरिक विजय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस संदेश के माध्यम से आगंतुकों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे केवल प्रतीकात्मक रूप से बुराई के अंत का उत्सव न मनाएं, बल्कि अपने जीवन में भी अच्छे विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों को स्थान दें।

राजयोग ध्यान से सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन की प्रेरणा

स्टॉल पर राजयोग ध्यान के महत्व को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है। बीके लीना दीदी के अनुसार, नियमित आत्मचिंतन और ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को अपने विचारों को समझने तथा उन्हें सकारात्मक दिशा देने में मदद कर सकता है। जीवन में आने वाली चुनौतियों के बीच धैर्य बनाए रखना, परिस्थितियों को संतुलित दृष्टिकोण से देखना और मन को शांत रखने का अभ्यास व्यक्तिगत जीवन के लिए उपयोगी है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में से प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के लिए निकालें। इस दौरान व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और भावनाओं पर ध्यान दे सकता है। नियमित अभ्यास से आत्मअनुशासन विकसित करने और प्रतिक्रियात्मक व्यवहार के स्थान पर सोच-समझकर निर्णय लेने की आदत को बढ़ावा मिल सकता है।

स्टॉल पर दिया जा रहा संदेश यही है कि सच्ची विजय तब सार्थक होती है, जब व्यक्ति के जीवन में शांति, प्रेम, पवित्रता और शुभभावनाओं का विस्तार हो। आध्यात्मिकता का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि जीवन के व्यवहारिक पक्ष में भी सकारात्मक बदलाव लाना है।

सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान

ब्रह्माकुमारीज के इस आध्यात्मिक प्रयास में व्यक्तिगत परिवर्तन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। आगंतुकों को बताया जा रहा है कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत स्वयं से होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में विनम्रता, सहयोग, सहनशीलता और सम्मान को स्थान दे, तो पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में बेहतर वातावरण बनाने में योगदान मिल सकता है।

दूसरों के प्रति शुभभावना रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना, आपसी मतभेदों को समझदारी से सुलझाना और समाज में सद्भाव बनाए रखना ऐसे मूल्य हैं, जिन्हें दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है। इस दृष्टिकोण से आध्यात्मिक संदेश केवल व्यक्तिगत शांति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है।

ब्रह्माकुमारी बहनों और सहयोगियों का रहा योगदान

सेक्टर-46 रामलीला ग्राउंड में लगाए गए इस स्टॉल को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में ब्रह्माकुमारीज केंद्र की बहनों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस आयोजन में बीके ऋतुभेन, बीके रेनू बहन, विजया बहन, रंजना बहन, सुचित्रा बहन, रविंदर भाई, श्रीओम भाई, पंकज भाई और माथुर भाई सहित अन्य सहयोगियों ने योगदान दिया।

स्टॉल के माध्यम से मेले में आने वाले लोगों तक आत्मिक शांति, राजयोग ध्यान और आत्मपरिवर्तन का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। त्योहारों के उल्लास के बीच यह पहल लोगों को कुछ पल रुककर अपने विचारों और जीवनशैली पर विचार करने की प्रेरणा देती है।

कुल मिलाकर, नोएडा के सेक्टर-46 रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का यह आध्यात्मिक स्टॉल दशहरे के संदेश को जीवन के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ता है। इसका मुख्य संदेश है कि बुराई पर विजय की शुरुआत अपने भीतर से होती है। जब व्यक्ति क्रोध और अहंकार जैसी कमजोरियों पर नियंत्रण रखने, सकारात्मक सोच अपनाने तथा प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीने का प्रयास करता है, तभी त्योहार की भावना वास्तविक अर्थों में जीवन का हिस्सा बनती है।

Sandhya Samay News

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