बॉक्स ऑफिस पर भक्ति लहर, फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ ने मचाया धमाल

फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' भी दर्शकों के बीच खूब पसंद की जा रही है। फिल्म का बजट बेहद कम रखा गया है, लेकिन इसके एनिमेशन की गुणवत्ता देखकर आप हैरान रह जाएंगे। पर्दे पर दिख रहे दृश्य इतने खूबसूरत और परिष्कृत हैं कि इन्हें हॉलीवुड की एनिमेटेड फिल्मों से तुलना करने में कोई ज़रा-सा भी संकोच नहीं होता।

कम बजट, बेहतरीन एनिमेशन: जानें 'महाप्रभु जगन्नाथ' की पूरी कहानी!

HIGHLIGHTS

  • सुप्रीम कोर्ट से रास्ता मिला और बॉक्स ऑफिस पर धमाल
  • 105 मिनट की इस एनिमेटेड फिल्म ने बच्चों को बांधा
  • क्या 'महाप्रभु जगन्नाथ' भी बनेगी 40 गुना कमाई वाली फिल्म?
  • असुर 'अहम' की जबरदस्त ताकत के आगे कैसे झुके सब?

पिछले कुछ सालों में भारतीय सिनेमा की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वह जमाना गया जब बड़े स्टार्स और महंगे बजट को ही हिट होने की गारंटी माना जाता था। अब बॉक्स ऑफिस पर आस्था और भक्ति से जुड़ी फिल्में अपनी जगह बना रही हैं। सबसे ताजा उदाहरण है ‘हनुमान अंश’, जो मात्र दो करोड़ रुपये से भी कम लागत में बनकर स्क्रीन पर पहुंची और अपने बजट का रिकॉर्ड 40 गुना तक कमाई कर चुकी है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि दर्शकों के दिल में जगह बनाने के लिए भारी बजट नहीं, बल्कि सच्ची भावना और अच्छी कहानी चाहिए।

इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज

इसी कड़ी में इस वीक रिलीज हुई एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ भी दर्शकों के बीच खूब पसंद की जा रही है। फिल्म का बजट बेहद कम रखा गया है, लेकिन इसके एनिमेशन की गुणवत्ता देखकर आप हैरान रह जाएंगे। पर्दे पर दिख रहे दृश्य इतने खूबसूरत और परिष्कृत हैं कि इन्हें हॉलीवुड की एनिमेटेड फिल्मों से तुलना करने में कोई ज़रा-सा भी संकोच नहीं होता। शुरुआत से अंत तक फिल्म दर्शकों को — चाहे वे बड़े हों या बच्चे — कुर्सी से बांध कर रखती है। बच्चों के साथ फिल्म देखने गए अभिभावकों का कहना है कि सिनेमा हॉल में ‘सोनू-मीनू’ की आंखें पूरे 105 मिनट स्क्रीन से नहीं हटतीं।

रिलीज से पहले घिरी थी विवादों में

हर सफलता की कहानी के पीछे कुछ बाधाएं भी होती हैं, और इस फिल्म के साथ भी ऐसा ही हुआ। रिलीज से पहले ही फिल्म कानूनी उलझनों में फंस गई थी। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भगवान जगन्नाथ के एनिमेटेड चित्रण पर गंभीर आपत्ति जताई थी और फिल्म पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि भगवान के स्वरूप को एनिमेशन के माध्यम से दिखाना उचित नहीं है।

मामला अदालत तक पहुंचा, जहां सुप्रीम कोर्ट ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के अधिकार के आधार पर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, इस पूरे विवाद के चलते फिल्म की रिलीज करीब दो महीने तक अटकी रही। लेकिन अब जब फिल्म सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है, तो दर्शकों का प्यार उसे मिल रहा है।

स्टोरी प्लॉट: कलयुग में असुर ‘अहम’ का कहर

फिल्म की कहानी कलयुग की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है और यह महाप्रभु जगन्नाथ के अद्भुत कारनामों पर आधारित है। कहानी की शुरुआत होती है ‘अहम’ नाम के एक शक्तिशाली असुर से, जो ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करता है और उनसे एक अनोखा वरदान हासिल कर लेता है। वरदान के तहत उसे अपना अलग लोक बनाने की शक्ति मिलती है, जहां देवताओं का कोई दखल नहीं हो सकता।

अपने वरदान के बल पर अहम भक्तों और सभी दिव्य शक्तियों को एक रहस्यमयी पारे की दुनिया में कैद कर बंधक बना लेता है। धरती पर अधर्म और अंधकार फैल जाता है। इसी संकट के समय महाप्रभु जगन्नाथ, बालक बलराम और गरुड़ देव मिलकर असुर का सामना करने का संकल्प लेते हैं। कहानी का यही हिस्सा सबसे रोमांचक बनाया गया है, जहां भक्ति और शक्ति की जंग देखते हुए बनती है।

निर्देशन और तकनीकी खूबियां

फिल्म के निर्देशक श्रीपाद वारखेडकर को इस मुहिम में शाबाशी देनी होगी, जिन्होंने कम बजट में इतना शानदार उत्पाद तैयार किया है। फिल्म की कहानी सरल भाषा में कही गई है, जिससे बच्चे आसानी से समझ सकें, लेकिन इसका संदेश गहरा है, जो बड़ों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। एनिमेशन की स्टाइल रंगीन, जीवंत और आकर्षक है, जो बच्चों का ध्यान टिकाए रखती है। संगीत भी कहानी के भाव के साथ चलता है और भक्तिमय माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिल्म को हिंदी, उड़िया और तेलुगु — तीन भाषाओं में एक साथ रिलीज किया गया है। इससे ओडिशा के अलावा देश के कोने-कोने में बैठे दर्शक भी इस दिव्य कथा का आनंद ले सकते हैं। सेंसर बोर्ड से फिल्म को ‘यू’ सर्टिफिकेट मिला है, यानी यह हर उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त है। फिल्म की अवधि 105 मिनट है, जो एक परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर के लिए बिल्कुल सही मानी जाती है।

फिल्म का संदेश और वर्डिक्ट

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ सिर्फ एक एनिमेटेड फिल्म नहीं, बल्कि बच्चों और परिवारों के लिए एक सरल, भक्तिमय और दृश्यात्मक रूप से आकर्षक प्रस्तुति है। फिल्म एक सुंदर संदेश देती है — अहंकार और बल की तुलना में दिव्य ज्ञान और सच्ची भक्ति ही उस शक्ति का नाम है, जो किसी भी विपदा को पराजित कर सकती है। ‘अहम’ असुर का नाम भी इसी संदेश को दर्शाता है कि अहंकार कितना भी बड़ा हो जाए, आखिर में उसका अंत भक्ति और विनम्रता से होता है।

यदि आप इस वीकेंड पर परिवार के साथ किसी अच्छी फिल्म की तलाश में हैं, तो ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ आपकी शाम को यादगार बना सकती है। बच्चों के लिए यह मनोरंजन का खजाना है, जबकि बड़ों के लिए आस्था से जुड़ा एक शांतिदायक अनुभव। निश्चित रूप से, इस फिल्म को देखकर आप निराश नहीं होंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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