इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल के दरवाजे पर पहुंचने वाले मरीजों को यही उम्मीद होती है कि वहां उन्हें साफ-सुथरा भोजन और बेहतर देखभाल मिलेगी। लेकिन महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक सरकारी अस्पताल ने इसी उम्मीद पर कड़ा प्रहार किया है। कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में एक मरीज के भोजन में कॉकरोच मिलने का मामला अब पूरी तरह गर्म हो गया है। घटना से भड़के राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रशासन को खुली अदालत में घेर दिया है और डीन के चैंबर में ही धरना देकर तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई है।
आंखों की सर्जरी के इंतजार में भर्ती मरीज को मिला ऐसा “खाना”
पूरा मामला 28 अगस्त की रात का है, जब अस्पताल के वार्ड नंबर 6 में भर्ती एक मरीज को भोजन दिया गया। आंखों की सर्जरी के लिए भर्ती इस मरीज की थाली में जो चीज निकली, उसे देखकर वहां मौजूद सभी लोग सकते में आ गए। गर्म खाने की थाली में अपनी जगह बनाए बैठा था एक कॉकरोच। इस घटना ने सिर्फ उस एक मरीज को नहीं, बल्कि उसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों को भी हिलाकर रख दिया। इसके बाद से अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की क्वॉलिटी और रसोई की साफ-सफाई को लेकर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
पहले न मरीज से मुलाकात, न घटना की जांच
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने शुरुआत में न तो संबंधित मरीज से मुलाकात की और न ही घटना की कोई ठोस जांच शुरू की। जब प्रशासन की इस लापरवाही की बात सामने आई, तो आक्रोश भड़क उठा और मनसे के पदाधिकारी सीधे अस्पताल पहुंच गए।
MNS पदाधिकारी डीन के चैंबर तक पहुंचे
MNS के जनहित एवं विधि विभाग के ठाणे शहर अध्यक्ष स्वप्निल महिंद्रकर के नेतृत्व में पार्टी के पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने डीन डॉ. स्वप्नाली कदम के चैंबर में ही धरना शुरू कर दिया। मनसे के इस आंदोलन के बाद जाकर डीन ने मरीज से मुलाकात की। यह बात खुद इस बात का सबूत है कि अगर दबाव नहीं बनता, तो शायद मरीज से मुलाकात तक नहीं होती।
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
स्वप्निल महिंद्रकर ने कहा कि मरीज की थाली में कॉकरोच मिलने के बाद भी प्रशासन ने उसकी साधारण सी मुलाकात तक नहीं की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मामले को सिर्फ मरीज का बयान दर्ज करके दफन नहीं किया जाए। खाना सप्लाई करने वाले ठेकेदार की तत्काल जांच हो और दोषी पाए जाने पर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
मनसे का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है, जब इस अस्पताल में खाने को लेकर शिकायत सामने आई हो। इससे पहले भी भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिल चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकला।
चार दिन बाद भी FDA तक नहीं पहुंचा खाने का सैंपल!
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि 28 अगस्त को जब मरीज के खाने में कॉकरोच मिला, तो चार दिन बीत जाने के बावजूद संबंधित खाने का सैंपल जांच के लिए अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास क्यों नहीं भेजा गया? जब तक सैंपल की लैब जांच नहीं होगी, तब तक घटना की असली वजह सामने नहीं आएगी और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा। मामला मरीजों की जिंदगी और सेहत से जुड़ा है, ऐसे में कार्रवाई में इतनी देरी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
अस्पताल प्रशासन ने दिया दो दिन में जांच पूरी करने का आश्वासन
मनसे के दबाव के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच अगले दो दिनों में पूरी करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह आश्वासन कितना ठोस साबित होता है, यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर भोजन की गुणवत्ता से किसी भी सूरत में समझौता नहीं हो सकता, क्योंकि वहां भर्ती ज्यादातर मरीज कमजोर स्वास्थ्य के साथ होते हैं। दूषित या गंदा भोजन उनके इलाज को पटरी से उतार सकता है और नई बीमारियों का खतरा पैदा कर सकता है।
























