मोहन बाबू यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह 2026 का भव्य आयोजन

समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व लोकसभा सांसद ए.सी. षणमुगम और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला शिरकत कीं, जबकि विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती अनुराधा प्रसाद मौजूद रहीं। इस मौके पर भारत के जाने-माने समकालीन कलाकार परेश मैती को कला की दुनिया में उनकी अभूतपूर्व देन के लिए मानद डॉक्टरेट से नवाजा गया, वहीं राजीव शुक्ला को भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह 2026: तिरुपति कैंपस गर्व और खुशियों से गूंजा!

HIGHLIGHTS

  • तिरुपति में बेटियों का दबदबा, 75% टॉपर्स छात्राएं ही क्यों?
  • 3,516 विद्यार्थियों को डिग्री, मोहन बाबू यूनिवर्सिटी ने रचा इतिहास!
  • बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को मानद डॉक्टरेट, तिरुपति में धूम!
  • 25,000 विद्यार्थी सफल बनाने वाले डॉ. मोहन बाबू का सीक्रेट!

मोहन बाबू यूनिवर्सिटी का तिरुपति कैंपस दीक्षांत समारोह 2026 के दिन खुशियों और गर्व से महक उठा। इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विज्ञान और संबद्ध विषयों में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाले कुल 3,516 विद्यार्थियों को इस अवसर पर डिग्रियां प्रदान की गईं। वर्षों की मेहनत का फल पाकर विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी झलक रही थी, वहीं यूनिवर्सिटी के लिए यह दिन उसकी लगातार ऊपर बढ़ती शैक्षणिक पहचान का बड़ा पड़ाव भी था।

टॉपर्स में छात्राओं का दबदबा

इस बार के समारोह की सबसे चर्चित बात रही कि सभी शाखाओं के टॉपर्स में 75 प्रतिशत विद्यार्थी महिलाएं थीं। यानी हर चार में से तीन टॉपर्स बेटियां रहीं। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस संस्कृति की मिसाल है, जहां लैंगिक भेद की जगह योग्यता को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। संस्थान की ओर से बेटियों को बेहतर अवसर और मार्गदर्शन देने की लगातार कोशिशों का यही नतीजा सामने आया है।

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी से सजा मंच

समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व लोकसभा सांसद ए.सी. षणमुगम और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला शिरकत कीं, जबकि विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती अनुराधा प्रसाद मौजूद रहीं। इस मौके पर भारत के जाने-माने समकालीन कलाकार परेश मैती को कला की दुनिया में उनकी अभूतपूर्व देन के लिए मानद डॉक्टरेट से नवाजा गया, वहीं राजीव शुक्ला को भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इतनी बड़ी हस्तियों का एक साथ आना यूनिवर्सिटी और तिरुपति शहर, दोनों के लिए गर्व का विषय माना गया।

“अनुशासन और शिक्षा का मेल ही सफलता की कुंजी”

कुलाधिपति तथा श्री विद्यानिकेतन एजुकेशनल ट्रस्ट के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. एम. मोहन बाबू ने अपने संबोधन में बताया कि संस्थान की स्थापना के बाद से अब तक 25 हजार से अधिक विद्यार्थी यहां से स्नातक हो चुके हैं और उनमें कई लोग जिंदगी में काफी ऊंचाइयां छू चुके हैं। उन्होंने इसका श्रेय शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन पर दिए गए विशेष बल को दिया। उन्होंने कहा, “अच्छी शिक्षा के साथ गरिमा और अनुशासन जरूरी है; यही सच्चे शिक्षित व्यक्ति की पहचान है। माता-पिता का सम्मान और उनके त्याग को समझना वह मूल्य है, जिसे मैं चाहता हूं हर विद्यार्थी अपनी डिग्री के साथ ले जाए।”

“डिग्रीधारी ही नहीं, अवसरों के सृजक बनें युवा”

उप-कुलाधिपति विष्णु मंचू ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी की हमेशा कोशिश रही है कि ऐसे युवा तैयार हों, जो सिर्फ डिग्री हासिल करें नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाले बनें और समाज के लिए कुछ सार्थक करें। उन्होंने संकाय के समर्पण और छात्रों के परिश्रम की सराहना की और कहा कि इस वर्ष हर चार में से तीन टॉपर्स छात्राएं होना बड़े गर्व की बात है। उनके मुताबिक यह उसी मार्गदर्शन और अवसरों का परिणाम है, जो यूनिवर्सिटी हर विद्यार्थी को देने की कोशिश करती है।

“शिक्षा ही वह धरोहर है जो आजीवन साथ निभाती है”

मुख्य अतिथि ए.सी. षणमुगम ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को बदलती है और शिक्षित नागरिक राष्ट्र को बदल देते हैं। पद, पहचान और धन आते-जाते रहते हैं, लेकिन शिक्षा ही वह चीज है जो आखिर तक साथ रहती है। उन्होंने समझाया कि एक व्यक्ति को शिक्षित करने से एक जिंदगी बदलती है, लेकिन एक शैक्षणिक संस्थान खड़ा करने से हजारों जिंदगियां और आने वाली पीढ़ियां बदलती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “सपनों की मंजिल पर पहुंचकर पीछे मुड़कर किसी और को भी वहां तक ले जाना न भूलें। विनम्रता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ें; यही आपकी सबसे बड़ी डिग्री होगी।”

“गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत”

मानद उपाधि मिलने पर बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि बेहतरीन शिक्षा पाकर कोई भी विद्यार्थी अपनी पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर करियर की सर्वोच्च सीढ़ी तक पहुंच सकता है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में 51 प्रतिशत छात्राओं की मौजूदगी पर खुशी जाहिर की और कहा कि महिलाओं की शिक्षा ही समाज में सबसे बड़ा बदलाव लाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि डिग्री के साथ कोई एक अतिरिक्त प्रतिभा जरूर विकसित करें, चाहे वह खेल, विज्ञान, कला या संस्कृति में हो। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।

“कड़ी मेहनत ही सपनों को साकार करने का एकमात्र रास्ता”

मानद डॉक्टरेट से सम्मानित होने के बाद परेश मैती ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ एक उपाधि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने की जिम्मेदारी भी है। यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों में आशा की किरण देखते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी में कोई शॉर्टकट नहीं है। आत्मविश्वास बनाए रखें, लक्ष्य पर फोकस रखें और मेहनत करते रहें—सपने पूरे करने का एकमात्र रास्ता कड़ी मेहनत ही है।

ऐतिहासिक साल में और मजबूत हुई यूनिवर्सिटी की पहचान

यह दीक्षांत समारोह मोहन बाबू यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक दौर का हिस्सा रहा। पिछले कुछ समय में संस्थान ने उद्यमिता से जुड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों, कैंपस में स्टार्टअप-माहौल तथा प्लेसमेंट और इंडस्ट्री पार्टनरशिप का लगातार विस्तार किया है। इन प्रयासों के चलते यूनिवर्सिटी क्षेत्र के अग्रणी निजी विश्वविद्यालयों में अपनी जगह और मजबूत कर रही है, और दीक्षांत समारोह 2026 ने इसी बढ़त को एक बार फिर साबित कर दिया।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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