बिहार में बाढ़ का कहर: 18 जिले डूबे, 6.65 लाख लोग बेहाल

पटना की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। जिले के 9 प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी इस वक्त बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। गंगा और पुनपुन के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के चलते नदी किनारे बसे गांवों और मोहल्लों में पानी भरने लगा है।

बिहार में बाढ़ से हाहाकार, जानें अपने जिले का हाल

HIGHLIGHTS

  • पटना के घरों तक घुसा बाढ़ का पानी, 9 प्रखंड प्रभावित
  • 9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, बिहार में बढ़ी चिंता
  • गंगा-गंडक उफान पर, पटना समेत 18 जिलों में मचा हड़कंप
  • बिहार बाढ़: SDRF-NDRF की 36 टीमें मैदान में, बचाव जारी

बिहार में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा, गंडक और पुनपुन समेत कई नदियों के उफान पर आने के बाद राज्य के 18 जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 6.65 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। राजधानी पटना समेत कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है और एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दी गई हैं।

पटना के 9 प्रखंडों में 2.32 लाख लोग बाढ़ की चपेट में

राजधानी पटना की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। जिले के 9 प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी इस वक्त बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। गंगा और पुनपुन के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के चलते नदी किनारे बसे गांवों और मोहल्लों में पानी भरने लगा है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, जिसके चलते आवागमन ठप हो गया है और लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

पानी का जलस्तर बढ़ने की खबर मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री और भोजन की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन की टीमें निचले इलाकों में डेरा डालकर लोगों की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

भूखे न रहें प्रभावित, 8 सामुदायिक रसोई केंद्र चालू

बाढ़ पीड़ितों को भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने 8 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन शुरू किया है। इन केंद्रों से अब तक करीब 5,900 थाली भोजन लोगों तक पहुंचाया जा चुका है। रसोई केंद्रों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसी को भूखे रहने की नौबत न आए।

प्रशासन का कहना है कि जब तक बाढ़ की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, रसोई केंद्र चलते रहेंगे। इसके अलावा प्रभावित लोगों के ठिकानों की जांच कर उन्हें राहत शिविरों में सुरक्षित स्थान भी दिया जा रहा है।

9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, तटबंधों की 24 घंटे निगरानी

बिहार की बाढ़ स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह नदियों का उफान पर होना है। इस समय गंगा, गंडक और पुनपुन समेत 9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खासकर तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ने से अधिकारी पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।

गंगा समेत अन्य नदियों के जलस्तर और तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। जल विभाग की टीमें तटबंधों पर पहरा दे रही हैं, ताकि कहीं रिसाव या दरार जैसी स्थिति पैदा होने पर तुरंत मरम्मत की जा सके। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे सुरक्षित स्थानों की ओर पहले से तैयारी बनाए रखें।

27 एसडीआरएफ और 9 एनडीआरएफ टीमें मैदान में

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए 27 एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) और 9 एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें तैनात कर दी गई हैं। इन टीमों के जरिए फंसे लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, टीमों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी व्यक्ति बिना मदद के न रहे। जरूरत पड़ने पर और अधिक टीमें भेजी जा सकती हैं। प्रशासन का पूरा फोकस इस बात पर है कि मानवीय नुकसान न हो और प्रभावित लोगों को भोजन, पीने का पानी व बुनियादी सुविधाएं लगातार मिलती रहें।

18 जिलों में बाढ़, लोगों को परेशानी

पूरे राज्य की बात करें तो बिहार के 18 जिलों में बाढ़ का पानी फैल चुका है, जिससे 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में खेती की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों की चिंता भी गहराई है। पशुओं को सुरक्षित जगह पर ले जाने की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों में रहने-सहने की व्यवस्था के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात की गई हैं, ताकि जलजनित बीमारियों से बचाव किया जा सके।

लोगों से अपील, सुरक्षा निर्देशों का रखें ध्यान

प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। जिन इलाकों में पानी भर गया है, वहां के लोगों से कहा गया है कि वे बिजली के खंभों और तारों से दूरी बनाए रखें तथा गहरे पानी में बिना जरूरत न जाएं। किसी भी आपात स्थिति में लोग प्रशासन की हेल्पलाइन पर संपर्क कर तुरंत मदद ले सकते हैं।

मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के मद्देनजर अगले कुछ दिनों में स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक प्रशासन और लोगों दोनों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। बाढ़ से पीड़ित हर परिवार तक राहत पहुंचाने को लेकर सरकार और प्रशासन दिन-रात काम कर रहे हैं।

Sandhya Samay News

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