बिहार के वैशाली जिले से पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। जांच प्रतिवेदन में त्रुटियों की पुष्टि होने और कर्तव्य निष्पादन में लापरवाही बरतने के आरोप में जिले के पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा ने पातेपुर अनुमंडल के हरलोचनपुर थानाध्यक्ष सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला हरलोचनपुर थाना कांड संख्या 23/26 से जुड़ा है, जिसकी अनुसंधान प्रक्रिया की समीक्षा में एसडीपीओ महुआ द्वारा कराई गई जांच में कई गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पकड़ी गई थीं।
किस-किस पर गिरी गाज?
जांच रिपोर्ट में मिली खामियों के बाद एसपी ने पुलिस अवर निरीक्षक राकेश कुमार यादव, जो हरलोचनपुर थाने के थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, के साथ ही पुलिस अवर निरीक्षक इन्द्रजीत कुमार और अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक सुमन झा को निलंबित किया है। तीनों निलंबित पुलिसकर्मियों को पुलिस केंद्र हाजीपुर में लाइन हाजिर किया गया है। बताया जा रहा है कि विभागीय स्तर पर आगे और कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
थानाध्यक्ष के निलंबन के बाद थाने का संचालन सुचारू रूप से चलाने के लिए एसआई सुबोध कुमार को नए थानाध्यक्ष के रूप में पदस्थापित किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि थाने की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता लाई जाए और क्षेत्र की जनता का पुलिस के प्रति भरोसा फिर से कायम किया जाए।
यूट्यूबर की गिरफ्तारी से शुरू हुई थी जंग
दरअसल, पूरे मामले की जड़ें हरलोचनपुर थाना पुलिस द्वारा यूट्यूबर कुंदन कुमार की गिरफ्तारी में छिपी हैं। पुलिस ने कुंदन कुमार को उनके घर से कथित तौर पर एक कट्टा और गोली के साथ गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में हंगामा शुरू हो गया। आरोप है कि गिरफ्तारी की कार्रवाई में जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, जिसके चलते मामला तूल पकड़ने लगा और धीरे-धीरे पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया।
ग्रामीणों ने निकाली बाइक रैली
गिरफ्तारी के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने बाइक रैली निकालकर पुलिस के खिलाफ आवाज उठाई। रैली के जरिए ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा और इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों में असंतोष गहराता गया।
हरलोचनपुर थानाध्यक्ष एवं 02 पुलिस पदाधिकारियों पर कृत कारवाई एवं नए थानाध्यक्ष के पदस्थापन के संबंध में…@bihar_police @dm_vaishali #hajipur#vaishali pic.twitter.com/SLDAUtVtGz
— Vaishali District Police, Bihar (@SpVaishali) September 2, 2026
मामला यहीं नहीं रुका। पूर्व राजद विधायक प्रेमा चौधरी के नेतृत्व में राजद के कई नेताओं ने बैठक करके इस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आंदोलन की चेतावनी दे दी थी। जब विरोध का स्वर तेज होने लगा, तो एसपी ने गंभीरता दिखाते हुए एसडीपीओ महुआ से पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई।
जांच में उजागर हुईं ये त्रुटियां
एसडीपीओ महुआ ने अनुसंधान और केस डायरी लेखन की प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की। जांच में सामने आया कि कांड संख्या 23/26 के अनुसंधान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन ठीक से नहीं किया गया और केस डायरी लेखन में भी त्रुटियां की गईं। पुलिस व्यवस्था में अनुसंधान और दस्तावेजीकरण को बेहद गंभीरता से देखा जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर न्यायालय में मुकदमे की दिशा तय होती है। किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक गड़बड़ी न सिर्फ मामले को प्रभावित करती है, बल्कि पुलिस की छवि पर भी असर डालती है।
एसपी के सख्त रुख का संदेश
एसडीपीओ का प्रतिवेदन मिलते ही एसपी शुभांक मिश्रा ने बिना देर किए तीनों दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी। प्रशासन का कहना है कि जांच में पाई गई प्रक्रियात्मक त्रुटियों और लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है। चाहे जो भी हो, नियमों की अनदेखी करने वालों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। इस कार्रवाई से पूरे जिले के पुलिसकर्मियों के बीच यह संदेश भी गया है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


























