हुडेड पिटोहुई: दुनिया का इकलौता ऐसा पक्षी जिसे देखकर जानवर भी बढ़ता है पीछे

दिलचस्प बात यह है कि विज्ञान की दुनिया को इस पक्षी की जहरीली सच्चाई का पता 1990 के दशक में चला। न्यू गिनी के जंगलों में काम कर रहे शोधकर्ताओं ने जब इस पक्षी को पकड़ा, तो कुछ ही समय बाद उनके हाथों में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होने लगा।

दुनिया का सबसे जहरीला पक्षी! एक छुआ तो शरीर होगा सुन्न!

HIGHLIGHTS

  • सांप-बिच्छू भी दूर भागते हैं इस जहरीले पक्षी से!
  • खूबसूरत दिखता है ये पक्षी, लेकिन अंदर छिपा है मौत!
  • जहरीले मेंढक जैसा जहर लिए घूमता है ये खूबसूरत पक्षी!
  • जंगल के अनुभवी शिकारी भी नहीं छूते, जानिए क्यों डरते हैं!

Hooded Pitohui: जंगलों में रहने वाले जानवरों की दुनिया में बचने के लिए हर प्राणी के पास अपनी अलग रणनीति होती है। किसी के पास तेज दौड़ है, किसी में छलांग लगाने की क्षमता, तो कोई अपने रंग से शत्रु को धोखा देता है। लेकिन न्यू गिनी के घने जंगलों में एक ऐसा पक्षी रहता है जिसने बचाव का सबसे खतरनाक तरीका अपनाया है — जहर। इसका नाम है हुडेड पिटोहुई (Hooded Pitohui), जिसे आज पूरी दुनिया “सबसे जहरीले पक्षी” के रूप में जानती है।

पहचान में आसान, मुलाकात में खतरनाक

पापुआ न्यू गिनी के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में रहने वाला यह पक्षी दिखने में बेहद खूबसूरत है। इसके सिर पर गहरे काले रंग की हुड जैसी संरचना होती है, जबकि धड़ और पेट का हिस्सा चमकीले नारंगी-भूरे रंग का होता है। वैज्ञानिक भाषा में इसका नाम पिटोहुई डिक्रोअस (Pitohui dichrous) है।

यही मजेदार बात है — यह पक्षी किसी भी शिकारी से छिपता नहीं, बल्कि अपने चटकीले रंगों से खुलेआम घोषणा करता है कि “मुझसे दूर रहो।” विज्ञान में इस तकनीक को अपोसेमेटिज्म (Aposematism) कहा जाता है, यानी रंगों के जरिए चेतावनी देना।

जहर कहां छिपा होता है?

अब सबसे बड़ा सवाल — आखिर इस पक्षी में जहर आता कहां से है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हुडेड पिटोहुई के पंख, त्वचा और यहां तक कि उसके मांस में भी बैट्राकोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नाम का घातक जहर मौजूद रहता है। यही जहर दक्षिण अमेरिका के जानलेवा पॉइजन डार्ट फ्रॉग्स (जहरीले मेंढक) के शरीर में भी पाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी थोड़ी सी मात्रा भी नसों को बेअसर कर सकती है।

शोधकर्ताओं के हाथ का अनुभव — जब विज्ञान को मिली पहली सुर्ग

दिलचस्प बात यह है कि विज्ञान की दुनिया को इस पक्षी की जहरीली सच्चाई का पता 1990 के दशक में चला। न्यू गिनी के जंगलों में काम कर रहे शोधकर्ताओं ने जब इस पक्षी को पकड़ा, तो कुछ ही समय बाद उनके हाथों में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होने लगा। इसके बाद लैब में जांच की गई और बैट्राकोटॉक्सिन की मौजूदगी की पुष्टि हुई। यही वह ऐतिहासिक पल था जब दुनिया को पहली बार जहरीले पक्षी के बारे में पता चला।

पक्षी खुद अपने जहर से कैसे बचा रहता है?

सोशल मीडिया पर लोग अक्सर पूछते हैं कि इतना जहरीला जीव खुद कैसे जिंदा रह पाता है? जवाब है — प्रकृति का कमाल। रिसर्च में सामने आया है कि हुडेड पिटोहुई खुद जहर का निर्माण नहीं करता। दरअसल, यह कुछ खास प्रकार के मेलिराइड बीटल्स और कीड़ों का सेवन करता है, जिनमें यह टॉक्सिन स्वाभाविक रूप से मौजूद होता है। समय के साथ इस पक्षी का शरीर इन विषाक्त पदार्थों को सहन करने में पूरी तरह माहिर हो गया है और यह जहर को अपनी त्वचा तथा पंखों में जमा कर लेता है। यानी जहर उसका हथियार भी है और कवच भी।

जनजातियां पीढ़ियों से जानती हैं इसका खौफ

वैज्ञानिकों से पहले न्यू गिनी की आदिवासी जनजातियां इस पक्षी के बारे में सब कुछ जानती थीं। ये लोग सदियों से जंगलों में शिकार कर अपना भोजन जुटाते हैं, लेकिन हुडेड पिटोहुई को छूने से कतराते हैं।

स्थानीय शिकारी बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें इस पक्षी की पहचान सिखाई जाती है — उसका रंग, उड़ने का अंदाज और आवाज ही काफी है यह समझने के लिए कि यह पक्षी हाथ नहीं लगाने वाला है। इलाके की कई लोककथाओं में उन लोगों का जिक्र मिलता है जिन्होंने गलती से इसे छुआ और घंटों तक शरीर में दर्द व सुन्नपन झेलना पड़ा।

इंसानी शरीर पर क्या असर होता है?

अगर कोई व्यक्ति इस पक्षी के संपर्क में आता है, तो त्वचा पर जलन, खुजली और सुन्नपन शुरू हो जाता है। ज्यादा मात्रा में जहर शरीर में पहुंचने पर मांसपेशियों का काम करना रुक सकता है और व्यक्ति अस्थायी रूप से पक्षाघात का शिकार हो सकता है। इसीलिए इसे छूते समय चेहरे, आंखों या घाव वाली त्वचा के संपर्क में आना और भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है।

जहर का असली मकसद — सिर्फ हमला नहीं, बचाव

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जहर का प्राथमिक उद्देश्य शिकारी जानवरों से बचाव करना है। सांप, बाज या अन्य हमलावर इस पक्षी को शिकार बनाने से पहले ही पीछे हट जाते हैं। यानी यह पक्षी बिना लड़े ही अपनी सुरक्षा कर लेता है — और यही इसे प्रकृति की सबसे समझदार प्रजातियों में से एक बनाता है।

क्या हुडेड पिटोहुई की एक से ज्यादा प्रजातियां हैं?

जी हां! पिटोहुई (Pitohui) परिवार की कई प्रजातियां न्यू गिनी में पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से हुडेड पिटोहुई सबसे अधिक विषाक्त मानी जाती है। इसीलिए इसे ही “वर्ल्ड्स मोस्ट पॉइजनस बर्ड” का खिताब दिया गया है।

हुडेड पिटोहुई साबित करता है कि प्रकृति के पास बचाव के अनगिनत तरीके हैं और हर बार वह हमें चौंकाने से बाज नहीं आती। जहां एक ओर सांप और बिच्छू जैसे जीव जहर के लिए जाने जाते हैं, वहीं आकाश में उड़ने वाला यह सुंदर पक्षी भी अपने पंखों में मौत छिपाए घूमता है। सोशल मीडिया पर इसकी कहानी एक बार फिर वायरल हो रही है और लोग हैरान हैं कि जहरीला पक्षी भी हो सकता है!

Sandhya Samay News

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