‘दूसरा’ फिल्म रिव्यू: ‘दूसरा’ में क्या है खास, जानिए फिल्म का पूरा रिव्यू

Doosra Movie Review: अभिनय देव की फिल्म 'दूसरा' क्रिकेट की ऐतिहासिक जीत को एक लड़की की आजादी और आत्मसम्मान की कहानी से जोड़ती है। जानिए फिल्म की कहानी, अभिनय और खूबियां।

'दूसरा' फिल्म रिव्यू: क्रिकेट, बगावत और आजादी की कहानी

HIGHLIGHTS

  • एक टी-शर्ट सेलिब्रेशन और लड़की की आजादी की कहानी
  • अभिनय देव की 'दूसरा' कितनी दमदार, पढ़ें पूरा रिव्यू
  • नेटवेस्ट ट्रॉफी की जीत से जुड़ी अनोखी फिल्म 'दूसरा'
  • क्या 'दूसरा' जीत पाएगी दर्शकों का दिल? पढ़ें रिव्यू

Doosra Movie Review: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में साल 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी की जीत आज भी खास जगह रखती है। लॉर्ड्स की बालकनी में तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली का टी-शर्ट लहराना सिर्फ एक जश्न नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के नए आत्मविश्वास की पहचान बन गया था। निर्देशक अभिनय देव की फिल्म ‘दूसरा’ इसी ऐतिहासिक पल को एक अलग नजरिए से देखती है। फिल्म में क्रिकेट के मैदान पर मिली जीत का रिश्ता एक ऐसी लड़की के संघर्ष से जोड़ा गया है, जो सामाजिक बंदिशों को तोड़कर अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना चाहती है।

‘दिल्ली बेली’ जैसी फिल्म के निर्देशन के लिए पहचाने जाने वाले अभिनय देव इस बार खेल, समाज और महिला स्वतंत्रता को एक साथ लाने की कोशिश करते हैं। करीब 78 मिनट की यह फिल्म पारंपरिक स्पोर्ट्स ड्रामा से अलग है। यहां क्रिकेट मैच के रोमांच से ज्यादा अहमियत उस बदलाव की है, जो किसी ऐतिहासिक घटना से एक आम इंसान के भीतर पैदा हो सकता है।

Doosra Movie Review: क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी तारा नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका बचपन राजस्थान के एक रूढ़िवादी परिवार में बीत रहा है। उसके आसपास की दुनिया में परिवार की प्रतिष्ठा, सामाजिक परंपराओं और पुरानी मान्यताओं को काफी महत्व दिया जाता है। ऐसे माहौल में तारा के लिए अपनी इच्छाओं के मुताबिक जिंदगी जीना आसान नहीं है।

वह अपने परिवार से जुड़ी हुई है, लेकिन उसके भीतर अपनी पहचान बनाने और स्वतंत्र रूप से फैसले लेने की इच्छा भी है। परिवार और समाज की तय की गई सीमाएं उसके सपनों के रास्ते में खड़ी होती हैं। इसी दौरान भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड को हराकर नेटवेस्ट ट्रॉफी जीतती है।

लॉर्ड्स में सौरव गांगुली का जश्न तारा के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन जाता है। जिस तरह भारतीय टीम दबाव के बीच मुकाबला जीतती है, उसी तरह तारा भी अपनी परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाती है। फिल्म इस समानता के जरिए बताती है कि जीत का अर्थ केवल ट्रॉफी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने जीवन पर अपना अधिकार स्थापित करना भी है।

अभिनय देव का निर्देशन कितना प्रभावशाली है?

‘दूसरा’ की सबसे दिलचस्प बात इसका विषय और उसे प्रस्तुत करने का तरीका है। अभिनय देव क्रिकेट की एक जानी-पहचानी घटना को केवल पुरानी यादों के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उसे महिला स्वतंत्रता और सामाजिक बदलाव से जोड़ते हैं।

फिल्म में वास्तविक क्रिकेट फुटेज और काल्पनिक कहानी का मेल इसे सामान्य पारिवारिक ड्रामा से अलग बनाता है। पुराने मैच के दृश्य उस दौर के भारतीय क्रिकेट की आक्रामकता और आत्मविश्वास को याद दिलाते हैं, जबकि तारा की कहानी व्यक्तिगत आजादी की अहमियत सामने रखती है।

निर्देशक का प्रयास कई जगह प्रभाव छोड़ता है। हालांकि, फिल्म की सीमित अवधि के कारण तारा के संघर्ष और उसके भावनात्मक बदलाव को कुछ और विस्तार मिल सकता था। इसके बावजूद, एक ऐतिहासिक खेल घटना को सामाजिक विषय के साथ जोड़ना एक दिलचस्प सिनेमाई प्रयोग है।

प्लाबिता बोरठाकुर और बाकी कलाकारों का अभिनय

तारा के किरदार में प्लाबिता बोरठाकुर फिल्म की प्रमुख ताकत हैं। उन्होंने अपने अभिनय में एक ऐसी लड़की की उलझन, बेचैनी और भीतर पल रहे विरोध को सहजता से सामने रखा है, जो परिवार से रिश्ता तोड़ना नहीं चाहती, लेकिन अपनी स्वतंत्रता से समझौता भी नहीं करना चाहती।

उनके अभिनय की खासियत यह है कि किरदार की भावनाएं केवल संवादों से नहीं, बल्कि चेहरे के हावभाव और खामोशी से भी व्यक्त होती हैं। इससे तारा का संघर्ष वास्तविक महसूस होता है।

अंकुर विकल ने तारा के पिता की भूमिका में प्रभावशाली काम किया है। उनका किरदार उस सोच को दर्शाता है, जिसमें बेटी के प्रति लगाव होने के बावजूद पुरानी सामाजिक धारणाएं फैसलों पर हावी रहती हैं। बाल कलाकार त्विशा जोशी अपनी मासूमियत से प्रभावित करती हैं। समीधा गुरु और कृष्णा गोकानी समेत अन्य कलाकार भी कहानी को आगे बढ़ाने में सहयोग करते हैं।

सौरव गांगुली के मुकदमे से क्यों चर्चा में आई ‘दूसरा’?

फिल्म की रिलीज से पहले सौरव गांगुली द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किए जाने से ‘दूसरा’ सुर्खियों में आ गई। गांगुली और उनकी अधिकृत बायोपिक से जुड़ी निर्माता कंपनी लव फिल्म्स एलएलपी ने आरोप लगाया कि फिल्म में उनकी पहचान, व्यक्तित्व और 2002 के लॉर्ड्स सेलिब्रेशन का व्यावसायिक इस्तेमाल उचित अनुमति के बिना किया गया है।

उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 22 अक्टूबर को अदालत ने 23 अक्टूबर के लिए प्रस्तावित सिनेमाघर रिलीज पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले की आगे सुनवाई तय की।

फिल्म निर्माताओं का पक्ष रहा कि ‘दूसरा’ गांगुली की बायोपिक नहीं, बल्कि एक लड़की की कहानी है, जो क्रिकेट की ऐतिहासिक घटना से प्रेरणा लेती है। हालांकि, रिलीज पर अंतरिम राहत मिलने का अर्थ विवाद का अंतिम निपटारा होना नहीं है।

संगीत और तकनीकी पक्ष

राम संपत का संगीत फिल्म के भावनात्मक माहौल को सहारा देता है। क्रिकेट के पुराने दृश्यों और तारा की निजी जिंदगी के बीच संबंध स्थापित करने में एडिटिंग की अहम भूमिका है। फिल्म का छोटा रनटाइम इसकी कहानी को संक्षिप्त रखता है, हालांकि कुछ दृश्यों में किरदारों की भावनाओं को अधिक समय देने की गुंजाइश नजर आती है।

Doosra Movie Review: देखें या नहीं?

‘दूसरा’ उन दर्शकों को पसंद आ सकती है, जो फिल्मों में मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश और नए विचार देखना चाहते हैं। प्लाबिता बोरठाकुर का अभिनय, अभिनय देव का प्रयोगात्मक निर्देशन और भारतीय क्रिकेट की यादगार घटना से जुड़ा कथानक इसकी प्रमुख खूबियां हैं।

फिल्म की पटकथा कुछ जगह अधिक विस्तार मांगती है, लेकिन इसका केंद्रीय विचार प्रभावशाली है। यह याद दिलाती है कि किसी एक व्यक्ति का साहस दूसरों के भीतर भी बदलाव की इच्छा जगा सकता है।

कुल मिलाकर, ‘दूसरा’ क्रिकेट और महिला स्वतंत्रता के बीच एक दिलचस्प रिश्ता स्थापित करने की कोशिश करती है। अगर आप पारंपरिक क्रिकेट फिल्म के बजाय सामाजिक सरोकारों वाली कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अलग सिनेमाई अनुभव हो सकती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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