Uproar at Delhi MCD meeting: दिल्ली नगर निगम (MCD) की सदन बैठक में पार्षदों के सालाना फंड को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। प्रत्येक पार्षद को सालाना 2 करोड़ रुपये का फंड देने के मुद्दे पर विपक्षी पार्षदों ने विरोध जताया। हंगामा बढ़ने के कारण महापौर प्रवेश वाही को कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बैठक के दौरान माइक तोड़ने और चाय फेंकने जैसे आरोप भी लगाए गए।
हालांकि, सदन में विरोध और नोकझोंक के बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सिंघोला में प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की क्षमता वाला संयंत्र स्थापित करना भी शामिल है। इसके अलावा, दिल्ली में त्योहारों के दौरान सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए 2500 अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती करने का फैसला लिया गया।
पार्षदों को सालाना 2 करोड़ रुपये के फंड पर क्यों हुआ विवाद?
एमसीडी की बैठक में पार्षदों के विकास कार्यों के लिए सालाना 2 करोड़ रुपये का फंड देने का मुद्दा विवाद की प्रमुख वजह बना। विपक्ष ने इस व्यवस्था को लेकर विरोध जताया, जिसके बाद सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
सदन के नेता जय भगवान यादव ने विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व में विपक्ष निगम की सत्ता में था, तब पार्षदों को 25 लाख रुपये का फंड भी जारी किया गया था। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था और निगम की नई परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त फंड पर भी चर्चा की जानी चाहिए।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए। बैठक में हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और महापौर को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सदन में नोकझोंक, माइक तोड़ने और चाय फेंकने के आरोप
बैठक के दौरान कांग्रेस की विपक्ष की नेता नाजिया दानिश की टिप्पणियों को लेकर विवाद बढ़ गया। इसके विरोध में आम आदमी पार्टी की पार्षद शगुफ्ता चौधरी और अन्य पार्षद महापौर के आसन के पास पहुंच गए। इस दौरान सदन में तीखी नोकझोंक हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
हंगामे के बीच विपक्ष पर माइक तोड़ने और चाय फेंकने के आरोप लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि का विवरण उपलब्ध नहीं है।
महापौर प्रवेश वाही ने बाद में प्रेसवार्ता में कहा कि सदन में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अनुशासनहीनता के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने संबंधित घटनाओं को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की बात कही।
हंगामे के बावजूद बैठक का एजेंडा आगे बढ़ाया गया और कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।
त्योहारों पर दिल्ली में तैनात होंगे 2500 अतिरिक्त सफाईकर्मी
दिल्ली में त्योहारों के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए MCD प्रशासन 2500 अतिरिक्त सफाईकर्मियों को तैनात करेगा। इसका उद्देश्य बाजारों, सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य प्रमुख इलाकों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है।
त्योहारों के समय सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही और कचरे की मात्रा बढ़ने के कारण सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से कचरा उठाने और नियमित सफाई के काम में मदद मिलने की उम्मीद है।
महापौर ने कहा कि निगम प्रशासन शहर की सफाई और जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने विपक्ष पर इन कार्यों में बाधा डालने का आरोप भी लगाया।
सिंघोला में बनेगा 700 मीट्रिक टन क्षमता वाला कचरा निस्तारण संयंत्र
एमसीडी बैठक में स्वीकृत महत्वपूर्ण प्रस्तावों में सिंघोला में कचरा निस्तारण संयंत्र की स्थापना शामिल है। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की होगी। महापौर के अनुसार, परियोजना पर काम शुरू हो चुका है।
दिल्ली में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में नई प्रसंस्करण क्षमता विकसित होने से कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना की समयसीमा और इसके पूरी तरह चालू होने की तारीख की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए एमसीडी की सख्ती
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली नगर निगम ने सभी 12 जोनों में धूल-प्रवण सड़कों की गहन सफाई और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। निगम अधिकारियों के मुताबिक, जमीनी स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि धूल नियंत्रण से जुड़े उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के अवैध निस्तारण पर रोक लगाने के लिए सभी 250 वार्डों में निर्धारित स्थल चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर धूल नियंत्रण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी संबंधित अधिकारियों को जारी की गई है।
निर्देशों के तहत कचरे के ढेर की अधिकतम ऊंचाई से कम से कम 3 मीटर ऊंची धूल और हवा रोकने वाली दीवारें लगाने, डंप की गई सामग्री को ढकने या नियमित रूप से गीला रखने और परिसर में पानी के छिड़काव की व्यवस्था चालू रखने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा, निर्माण और विध्वंस का मलबा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढकना अनिवार्य होगा, ताकि परिवहन के दौरान धूल न फैले।
125 स्थलों पर कैमरों से होगी 24 घंटे निगरानी
MCD के अनुसार, मलबा निस्तारण से जुड़े 125 स्थलों पर 360 डिग्री PTZ कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की लाइव फीड दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जिससे संबंधित स्थलों पर गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध डंपिंग पर नजर रखना, धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करना और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाना है। निगम ने सभी जोनों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने और आग लगने की घटनाओं से जुड़े मामलों में सख्ती बरतने के निर्देश भी दिए हैं।

























