Gurugram News: दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम स्थित 40 प्रतिष्ठित स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल के पीछे का अंतरराष्ट्रीय साजिश पुलिस ने खोल दी है। साइबर सेल ने इस मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अहमदाबाद से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसका सीधा कनेक्शन बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने महज कुछ हजार रुपयों के लालच में देश की आंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ किया।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि 28 जनवरी की सुबह गुरुग्राम के करीब 40 स्कूलों को एक साथ बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल प्राप्त हुए थे। इसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था और स्कूलों को खाली कराने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। साइबर पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू की और टेक्निकल सुरागों के आधार पर सौरभ विश्वास उर्फ माइकल नामक आरोपी को गिरफ्तार किया।
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कौन है सौरभ उर्फ माइकल?
पुलिस के अनुसार, सौरभ बांग्लादेश का निवासी है, जो पिछले नौ वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहा है। उसने ‘डंकी रूट’ के जरिए जंगलों से होते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की थी और पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में प्रवेश किया था। वहां उसने स्थानीय एजेंटों की मदद से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेज बनवाकर अपनी पहचान छुपाई। 12वीं पास सौरभ को तकनीक में गहरी रुचि थी। उसने डिजिटल मार्केटिंग और ग्राफिक्स सीख लिया और पिछले पांच साल से फ्रीलांसिंग करते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचता रहा।
साजिश का टर्निंग पॉइंट और क्रिप्टो का भुगतान
जांच में खुलासा हुआ कि साल 2024 में सौरभ का सोशल मीडिया के जरिये बांग्लादेश के ढाका निवासी मामुनूर राशिद से संपर्क हुआ। राशिद ने सौरभ को 300 फर्जी ईमेल आईडी बनाने का काम सौंपा। तकनीक में माहिर सौरभ ने एक ही दिन में 300 आईडी तैयार कर दीं। इस काम के बदले उसे केवल 250 यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) दिए गए। ये ईमेल आईडी भारत से बनवाई गई थीं ताकि जांच एजेंसियां भटक जाएं और असली अपराधी का पता न चल सके। इन्हीं में से एक आईडी का इस्तेमाल गुरुग्राम के स्कूलों को धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए किया गया, जिसके लिए बांग्लादेश और अमेरिका के सर्वर का उपयोग किया गया था।

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50 संदिग्धों का वॉट्सऐप ग्रुप
एसीपी साइबर प्रियांशु दीवान ने बताया कि सौरभ को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस को एक और बड़ी जानकारी मिली है। सौरभ एक वॉट्सऐप ग्रुप का हिस्सा था, जिसमें 50 से अधिक संदिग्ध लोग शामिल हैं। यह ग्रुप डिजिटल आतंक और फर्जी पहचान बनाने के कारोबार में लिप्त है। पुलिस अब इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की पहचान कर रही है। आरोपी की पत्नी भी बांग्लादेशी नागरिक है और बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रही है।
आगे की जांच और कार्रवाई
पुलिस ने सौरभ को रिमांड पर लिया है और उसके मोबाइल से महत्वपूर्ण डेटा रिकवर किए हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ मिलकर उन एजेंटों का पता लगाया जा रहा है जिन्होंने उसे फर्जी कागजात दिलाए थे। पुलिस को शक है कि बनाई गई अन्य ईमेल आईडी का इस्तेमाल देश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव फैलाने या ठगी के लिए किया जा सकता है। अभी पुलिस मार्च महीने में भी भेजे गए इसी तरह के धमकी भरे ईमेल की भी जांच कर रही है और सभी संबंधित रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है।




















