UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘सास-बहू’ के मुद्दे पर जुबानी जंग तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा बिना नाम लिए ‘सास-बहू सीरियल’ को लेकर कसे गए तंज पर बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तीखा पलटवार किया है। ईरानी ने अखिलेश यादव को ‘कन्नौज छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़ने’ की खुली चुनौती दी है।
वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्मृति ईरानी ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है, उन्हें पुरानी बातों को याद करना अच्छा लगता है। लेकिन अगर आपमें इतना ही दम है, तो अपने पैतृक क्षेत्र (कन्नौज) को छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं। लेकिन सच्चाई यह है कि उनमें इतना दम नहीं है।
‘कामकाजी महिला’ पर टिप्पणी करने वालों को दी सलाह
संसद में अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी ने कहा, “कामकाजी महिला पर टिप्पणी करना आसान होता है, खासकर उनके लिए जिन्होंने जिंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की हो।” उन्होंने साफ किया कि उन्होंने अपनी पहचान किसी के आशीर्वाद से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से बनाई है। स्मृति ईरानी ने अपनी उपलब्धियों को याद कराते हुए कहा, “मुझ जैसी कामकाजी महिला ने किसी और के गढ़ (अमेठी) में जाकर परचम गाड़ा है और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हराया है।”
‘सीरियल छोड़ संसद पर ध्यान दें’
ईरानी ने सपा नेता पर सदन की गरिमा भूलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम जैसे लोग टैक्स भरते हैं, इसलिए नहीं कि सदन में सास-बहू की बातें हों। सीरियल से हटाकर संसद पर ध्यान लगाएं और महिलाओं के संबल हेतु आए अहम बिल का समर्थन करें।”
उन्होंने एक कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपी की राजनीति करने वाले नेता गांव-गांव और पात-पात घूमते हैं, ऐसे में एक गंभीर राजनेता के पास सीरियल देखने का टाइम ही नहीं होता है। हालांकि, ईरानी ने यह भी कहा कि अखिलेश के इस तरह के बयानों से एक बात साफ हो गई है कि उनका उत्तर प्रदेश में विपक्ष में रहना सुनिश्चित है।
अखिलेश यादव का शायराना पलटवार
स्मृति ईरानी के तीखे हमले के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव भी पीछे हटने वाले नहीं थे। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर चार लाइन की एक शायरी लिखकर बीजेपी और ईरानी पर जनता से दूर होने और साजिश रचने का आरोप लगाया।
अखिलेश ने लिखा:

हर बात से अगर साजिश की बू आई न होती,
यकीन करते लोग अगर बात जुमलाई न होती,
दरअसल अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती,
तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती.
यूपी का सियासी पारा हाई
चुनाव से पहले दोनों दिग्गज नेताओं के बीच यह जुबानी जंग सियासी गलियारों में हलचल मचा दिया है। एक ओर जहां बीजेपी ‘अमेठी पर जीत’ और ‘परिश्रम की राजनीति’ के नारे बुलंद कर रही है, वहीं सपा ‘जनता से जुड़ाव’ और ‘बीजेपी की नाकामी’ के नarrative पर कड़ाई से डटी हुई है। अब देखना होगा कि इस ‘सीरियल वार’ के अगले एपिसोड में सियासत किस मोड़ पर मुड़ती है।



















