Shivraj Singh Chouhan as observer in Bihar: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से तेज बदलाव की अटकलें लगने लगी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को होने वाली अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक के बाद पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच, अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कवायद तेज हो गई है और भाजपा ने अपने अनुभवी नेता शिवराज सिंह चौहान को इस पूरे प्रक्रिया का पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) बनाया है।
बिहार के अगले दो-तीन दिन राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माने जा रहे हैं। भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी से इशारा मिल रहा है कि पार्टी किसी भी तरह की अनहोनी से बचने और नेता के चयन में पारदर्शता बरतना चाहती है। इस समय भाजपा के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है।
तेजस्वी के ‘टूट’ के दावे पर जेडीयू का पलटवार
इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो जेडीयू में बड़ा टूट हो सकता है। हालांकि, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस दावे को बेबुनियाद बताया।
संजय झा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जो लोग पार्टी में टूट की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने ही घर में झांक लेना चाहिए।” उन्होंने साफ किया कि नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री पद न रहें, लेकिन वह बिहार छोड़ने वाले बिल्कुल नहीं हैं। वह संसद सत्र के लिए दिल्ली जाएंगे, लेकिन उनका मुख्य ध्यान बिहार ही रहेगा। संजय झा ने यह भी स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार की विचारधारा और नीतियां ही आने वाली सरकार की नींव होंगी।
क्या है ‘दो उप-मुख्यमंत्री’ का फॉर्मूला?
नई सरकार के ढांचे को लेकर जेडीयू के अंदरखाने से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकार चलाने के लिए ‘दो उप-मुख्यमंत्री’ का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।
इस फॉर्मूले के तहत पहला चेहरा जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी का हो सकता है, जिनकी पार्टी और संगठन में पकड़ मजबूत मानी जाती है। वहीं, दूसरा बड़ा चेहरा निशांत कुमार हो सकते हैं। सूत्रों का मानना है कि निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री लगभग तय है और उन्हें धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति और जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जा रहा है।
नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति में सीमित भूमिका निभाने के बाद पार्टी की कमान कौन संभालेगा और भाजपा-जेडीयू का नया समीकरण कैसा होगा, इसका जवाब 14 अप्रैल के बाद साफ होने लगेगा। फिलहाल, बिहार की सियासत में हर घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



















