विधायकों की ‘ट्रेनिंग’ के नाम पर कांग्रेस ने बदला प्लान

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस (फाइल फोटो)
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संध्या समय न्यूज


Haryana News : हरियाणा में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दो सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की आशंका के बीच कांग्रेस ने सतर्कता बरतते हुए अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के शिमला भेज दिया है। पार्टी का मानना ​​है कि विपक्ष द्वारा विधायकों को लुभाने की कोशिश की जा सकती है, ऐसे में यह कदम ‘फ्लोर मैनेजमेंट’ का हिस्सा है।

कांग्रेस की बड़ी रणनीति

कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए यह फैसला लिया है। आज (13 मार्च) नेता विपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा के आवास पर हुई बैठक के बाद लगभग सभी विधायक दो छोटी टूरिस्ट बसों और निजी गाड़ियों में शिमला के लिए रवाना हो गए। कांग्रेस के प्रवक्ता आदित्य सुरजेवाला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने बताया, “हिमाचल में विधायकों को मतदान प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी जाएगी। सभी विधायक 16 मार्च को विधानसभा में सीधे मतदान करने के लिए लौटेंगे।”

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मैदान में तीन प्रत्याशी, दो सीटें

हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मैदान में तीन उम्मीदवार होने से चुनाव दिलचस्प बन गया है। बीजेपी ने संजय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त कर्मवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है। वहीं, भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।

उम्मीदवारों की प्रोफाइल

  • संजय भाटिया (भाजपा): पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाने वाले संजय भाटिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं और भाजपा के पूर्व राज्य महासचिव रह चुके हैं। उनके पास संगठनात्मक राजनीति का गहरा अनुभव है।
  • कर्मवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस): राज्य सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी रहे कर्मवीर सिंह बौद्ध पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिए मौका दिया है।
  • सतीश नांदल (निर्दलीय): पूर्व में इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के नेता रहे नांदल ने 2009, 2014 और 2019 में गढ़ी सांपला-किलोई सीट से भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वे हुड्डा के कट्टर विरोधी माने जाते हैं।

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संख्या का खेल

90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 31 वोटों की जरूरत होती है। भाजपा:3 निर्दलीयों समेत 48 विधायकों के साथ आराम से एक सीट जीतने की स्थिति में है। कांग्रेस: 37 विधायकों के साथ एक सीट पर कब्जा करने में सक्षम है, लेकिन उसके पास ज्यादा बचत वोट नहीं हैं। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के प्रवेश ने समीकरणों को बदलने की आशंका बढ़ा दी है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा विधायकों को शिमला भेजना उसकी चिंता को दर्शाता है कि कहीं कोई विधायक क्रॉस-वोटिंग न कर दे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 16 मार्च को होने वाले मतदान में क्या नतीजे आते हैं।

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