Noida Protest: दिल्ली एनसीआर के नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत प्रदेशभर में हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शनों के मद्देनजर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी में एक हजार से लेकर लगभग तीन हजार रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हो जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद क्षेत्र के श्रमिकों को कितना मिलेगा?
यहां तीनों श्रेणियों के श्रमिकों की मजदूरी में सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है:
- अकुशल श्रमिक: 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये (कुल इजाफा: 2,377 रुपये)
- अर्धकुशल श्रमिक: 12,445 रुपये से बढ़ाकर 15,059 रुपये (कुल इजाफा: 2,614 रुपये)
- कुशल श्रमिक: 13,940 रुपये से बढ़ाकर 16,868 रुपये (कुल इजाफा: 2,928 रुपये)
अन्य नगर निगम क्षेत्रों में क्या होगा?
नोएडा-गाजियाबाद के अलावा अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी मजदूरी बढ़ाई गई है:
- अकुशल श्रमिक: 11,313 रुपये से बढ़कर 13,006 रुपये (1,693 रुपये बढ़ोतरी)
- अर्धकुशल श्रमिक: 12,445 रुपये से बढ़कर 14,306 रुपये (1,861 रुपये बढ़ोतरी)
- कुशल श्रमिक: 13,940 रुपये से बढ़कर 16,025 रुपये (2,085 रुपये बढ़ोतरी)
अन्य जिलों के श्रमिकों के लिए नई दरें
प्रदेश के अन्य जिलों में इजाफा थोड़ा कम हुआ है:
- अकुशल श्रमिक: 11,313 रुपये से बढ़कर 12,356 रुपये (1,043 रुपये बढ़ोतरी)
- अर्धकुशल श्रमिक: 12,445 रुपये से बढ़कर 13,591 रुपये (1,146 रुपये बढ़ोतरी)
- कुशल श्रमिक: 13,940 रुपये से बढ़कर 15,224 रुपये (1,284 रुपये बढ़ोतरी)
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि हालांकि वर्तमान में उद्योग जगत कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, निर्यात में कमी और उत्पादन लागत के दबाव से जूझ रहा है, लेकिन श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से देखते हुए यह ‘संतुलित फैसला’ लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे श्रमिकों को तत्काल राहत मिलेगी और उद्योगों की काम-काज पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा।
20,000 रुपये की खबर को सरकार ने बताया भ्रामक
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में साफ किया गया है कि यह वृद्धि केवल ‘तात्कालिक राहत’ के तौर पर दी गई है। आने वाले समय में अन्य श्रम कानूनों के तहत व्यापक समीक्षा करके वेज बोर्ड के माध्यम से इसका स्थायी समाधान किया जाएगा।
साथ ही, सोशल मीडिया पर तैर रही उन खबरों को सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक है और केवल आधिकारिक शासनादेश को ही मान्यता दी जाएगी।
सरकार ने अपने तर्क में कहा कि वह श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक विकास, दोनों के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध है और इसी संतुलन को ध्यान में रखकर यह ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।




















