नोएडा हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ? राजनीतिक और पुलिस जांच में खुलासे

Noida Protest: नोएडा के श्रमिकों के बीच जानबूझकर और गलत तरीके से फैलाया गया। श्रमिकों को भ्रमित करके यह संदेश दिया गया कि केंद्र सरकार ने वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन नोएडा के उद्योगपति इसे दबाकर बैठे हैं। मल्हन ने कहा कि जो मजदूर 30-40 साल से कंपनी में काम कर रहा है ।

नोएडा हिंसा में बाहरी तत्वों की भूमिका और कंपनियों का भविष्य
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HIGHLIGHTS

  • नोएडा हिंसा के बाद कंपनियों में चिंता की लहर
  • नोएडा हिंसा के बाद कंपनियों का ब्लैक लिस्ट होने का डर: व्यवसायियों की प्रतिक्रिया
  • नोएडा हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता की जांच जारी
  • नोएडा हिंसा के कारण ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है
  • नोएडा हिंसा में बाहरी तत्वों की भूमिका संदिग्ध

Noida News: दिल्ली एनसीआर के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ दिनों से जारी श्रमिकों का हिंसक प्रदर्शन शांत तो हो चला है, लेकिन इसने इस इंडस्ट्रियल हब को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाकर बर्बाद कर दिया है। जली हुई गाड़ियां, टूटे शीशे और ठप पड़ी फैक्ट्रियां अब उद्योग जगत की चिंता को दर्शाती हैं। नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी साजिश और सुनियोजित ‘मिस-इन्फॉर्मेशन कैंपेन’ करार दिया है।

हरियाणा के वेतन वृद्धि के नाम पर फैलाया गया भ्रम

एनईए के अध्यक्ष विपिन मल्हन का साफ कहना है कि यह आंदोलन कोई अचानक उपजा हुआ नहीं है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में न्यूनतम वेतन में 35% की वृद्धि की खबर को नोएडा के श्रमिकों के बीच जानबूझकर और गलत तरीके से फैलाया गया। श्रमिकों को भ्रमित करके यह संदेश दिया गया कि केंद्र सरकार ने वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन नोएडा के उद्योगपति इसे दबाकर बैठे हैं। मल्हन ने कहा कि जो मजदूर 30-40 साल से कंपनी में काम कर रहा है, वह अपनी ही रोजी-रोटी की फैक्ट्री में आग नहीं लगा सकता। भीड़ में शामिल बाहरी अराजक तत्वों ने ही गाड़ियों को फूंका और तोड़फोड़ की।

सप्लाई चेन टूटी, विदेशी कंपनियों से ब्लैकलिस्ट होने का खतरा

उद्योगपति सुहेल सेठ ने इस स्थानीय हिंसा को वैश्विक हालातों से जोड़कर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतों में 85 से 89 फीसदी तक की वृद्धि से पहले ही उद्योगपति परेशान थे। अब इस हिंसा ने ‘सप्लाई चेन’ को पूरी तरह तोड़ दिया है।

सुहेल सेठ ने चेतावनी दी, नोएडा में काम बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पूरे नहीं हो रहे हैं। विदेशी कंपनियां नोएडा की इकाइयों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी में हैं, जो देश की इमेज को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

पर्दे के पीछे के चेहरे बेनकाब करे प्रशासन: उद्योगपति

हालांकि, नोएडा की अधिकांश इंडस्ट्री आज खुल गई हैं, लेकिन गारमेंट एक्सपोर्ट की लगभग 35-40% इकाइयां अब भी बंद हैं। उद्योगपतियों ने प्रशासन से मांग की है कि वह उन चेहरों को जल्द बेनकाब करे जो पर्दे के पीछे से लेबर को भड़का रहे हैं।

उद्योग जगत ने सरकार से स्पष्ट मांग उठाई है कि ‘लिविंग स्टैंडर्ड’ और ‘क्षेत्रीय खर्चों’ के आधार पर वेतन नीति को एक बार फिर से स्पष्ट किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी कोई अफवाह न फैल सके। सुहेल सेठ ने आगाह करते हुए अंत में कहा कि यदि यह चिंगारी पूरे प्रदेश या देश में फैली, तो आर्थिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा।”

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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