Mumbai News: महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को लेकर देशभर में जारी सियासी बहस के बीच, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने इस बिल का पूरा समर्थन करते हुए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को ‘तत्काल’ लागू करने की मांग उठाई है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पर अस्थायी तौर पर रोक लगाने की अहम अपील की है।
पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत के हवाले से उद्धव ठाकरे के बयान में कहा गया, “शिवसेना का रुख इस मसले पर बिल्कुल स्पष्ट है। महिला आरक्षण विधेयक 2023 में संसद में पारित हो चुका है, इसलिए 33 फीसदी आरक्षण को तत्काल लागू किया जाना चाहिए।”
परिसीमन पर गहरी चिंता जताई
उद्धव ठाकरे ने महिला आरक्षण के नाम पर हो रहे राजनीतिक हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिसीमन के मसले पर अस्थायी तौर पर विराम लगाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यह व्यापक राष्ट्रीय एकता के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारे लिए यह किसी एक पार्टी के राजनीतिक भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि देश के भविष्य का सवाल है। इसलिए, इस पर और अधिक चर्चा और विचार-विमर्श जरूरी है।”
पीएम मोदी ने कहा- ‘इस मौके को जाने न दें’
महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में अपना संबोधन दिया। पीएम मोदी ने इसे लोकतंत्र की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, “जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं। उस समय समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है। आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर सुधार होता रहता है, यही लोकतंत्र की ड्यूटी है।”
पीएम ने आगे कहा, “हम सब भाग्यवान हैं कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। मैं चाहता हूं कि सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें।”
क्यों जुड़ा है परिसीमन से मसला?
दरअसल, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। बता दें कि महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक किया जा सकता है। संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों में बढ़ोतरी की जाएगी।
विपक्षी दलों का लगातार कहना है कि सरकार परिसीमन के चक्कर में महिला आरक्षण को लागू करने में टालमटोल कर रही है। उधव ठाकरे का यह बयान भी इसी विपक्षी कसौटी पर खरा उतरता है और सरकार पर तत्काल लागू करने का दबाव बढ़ाता है।





















