राज्यसभा में ‘विपक्ष के नेता’ पद दांव पर!, महाराष्ट्र की सीट पर कांग्रेस की रणनीति

महाराष्ट्र की सुरक्षित सीट को लेकर कांग्रेस ने MVA साथियों से मांगी सपोर्ट (फाइल फोटो)

ऋषी तिवारी


महाराष्ट्र के राजनीतिक पटल पर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य से राज्यसभा की 7 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो चुकी है और 16 मार्च को मतदान होना तय है। इस चुनाव में सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं, लेकिन सबसे रोचक दौर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर देखने को मिल रहा है। एमवीए के पास विधानसभा की संख्या के हिसाब से केवल एक ही सुरक्षित सीट है, और इसी एक सीट को लेकर गठबंधन के साथी आपस में आमने-सामने खड़े हो गए हैं।

एक सीट, तीन दावेदार

खास बात यह है कि यह सीट राकांपा के वरिष्ठ नेता शरद पवार के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हो रही है, ऐसे में एनसीपी (राकांपा) का दावा स्वाभाविक माना जा रहा था। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के पास विधायकों की संख्या अधिक होने के कारण उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी इस पर कब्जा जमाने का दावा किया था। लेकिन अब तीसरे खिलाड़ी कांग्रेस ने भी इस सीट के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

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कांग्रेस का ‘बड़ा’ मकसद

कांग्रेस के लिए यह सीट सिर्फ एक संसदीय सीट नहीं, बल्कि राज्यसभा में अपनी पकड़ बनाए रखने का सवाल बन गई है। पार्टी की मंशा है कि राज्यसभा में ‘विपक्ष के नेता’ (Leader of Opposition) का पद बनाए रखने के लिए इस सीट को जीतना अनिवार्य है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद हासिल करने के लिए किसी भी दल के पास कुल सदस्यों की कम से कम 10% (यानी 25 सदस्य) सीटें होना जरूरी है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 27 सदस्य हैं, लेकिन इस साल होने वाले 72 सीटों के चुनाव के बाद इस संख्या के 25 से नीचे गिरने का खतरा मंडरा रहा है।

खड़गे का पद खतरे में?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का राज्यसभा का कार्यकाल इस साल जून में समाप्त होने वाला है। इसके अलावा पहले चरण में अभिषेक मनु सिंघवी, रजनी पाटिल, फुलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी जैसे वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अगर कांग्रेस इन चुनावों में अपनी स्थिति नहीं बचा पाई, तो उसे राज्यसभा में विपक्ष के नेता का महत्वपूर्ण पद खोना पड़ सकता है। इसी वजह से महाराष्ट्र की यह एकमात्र सुरक्षित सीट कांग्रेस के लिए ‘डू या डाई’ की स्थिति बन गई है।

उद्धव ठाकरे से बातचीत और प्रस्ताव

इस स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ते हुए अपने साथी दलों से बातचीत शुरू कर दी है। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्नीथला ने उद्धव ठाकरे से फोन पर संपर्क किया है। उन्होंने उद्धव ठाकरे से इस सीट को कांग्रेस को देने का अनुरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने इसके बदले विधान परिषद में रिक्त होने वाली सीट का ऑफर शिवसेना (यूबीटी) को दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि ऐसा करने से राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया अलायंस’ और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी दोनों ही मजबूत होंगी।

Sandhya Samay News

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