Bihar News: देशभर में महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) को लेकर सियासी तपिश तेज हो गई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों को महिला आरक्षण से दिक्कत सिर्फ इसलिए है क्योंकि उन्हें डर है कि उनके परिवार के अलावा कोई और महिला सांसद न बन जाए। वहीं, एसपी (समाजवादी पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा की ‘बुरी नीयत’ और जनता का ध्यान भटकाने का जरिया बताते हुए पलटवार किया है।
‘पत्नी-बहन सांसद बनें, दूसरा कोई नहीं…’ सीएम सम्राट का हमल
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नारी शक्ति विधेयक को लेकर विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति आरक्षण का अपमान और धोखा हुआ है। विपक्ष के लोग इसका विरोध करके खुशी मना रहे हैं।सीएम सम्राट ने कांग्रेस और एसपी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों की सोच सिमटी हुई है। राहुल गांधी चाहते हैं कि उनकी बहन सांसद बनें, लेकिन उत्तर प्रदेश से कोई दूसरी महिला सांसद न बने। अखिलेश यादव चाहते हैं कि उनकी पत्नी सांसद बनें, लेकिन सबको यह मौका न मिले। लालू प्रसाद पहले भी बिल फड़वाने का नाटक करते थे। इनकी कोशिश सिर्फ इतनी रही कि सिर्फ घर की बेटियां ही सत्ता में रहें, बाहर की कोई न आए।
बिहार विधानसभा का उदाहरण देते हुए बोले सीएम
सम्राट चौधरी ने आंकड़ों के आधार पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि आज बिहार विधानसभा में मात्र 29 महिला विधायक हैं। अगर यह बिल पास हो जाता, तो कम से कम 129 महिलाएं विधायक बनतीं। उन्होंने भाजपा की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पंचायती राज और नगर निगम में 50% आरक्षण दिया गया, जिसके चलते 59% महिलाएं स्थानीय निकायों में हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल लागू होता, तो 816 में से 272 महिला सांसद बनकर देश का नेतृत्व करतीं।
सीएम ने तीन नए कानूनी बिलों (भारतीय न्याय संहिता) का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश को बनाने आए हैं और लगातार हिंदुस्तान की चिंता कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग बाहर की चिंता करते हैं। तीन बिल आने थे, तीनों का विरोध किया गया।
‘भाजपा की बुरी नीयत की हार’— अखिलेश यादव का पलटवार
वहीं, सीएम सम्राट के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए SP प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि जनता के बढ़ते विरोध और गुस्से को भटकाने के लिए BJP एक तथाकथित ‘महिला आरक्षण बिल’ लेकर आई थी।
अखिलेश ने कहा कि इस बिल की हार BJP की हार है। यह BJP की बुरी नीयत की भी हार है। भाजपा के सभी प्रयास और बिल या तो सिर्फ कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए होते हैं या फिर समाज को बांटने के लिए।
उन्होंने आगे कहा कि इस बार भाजपा इस बिल के जरिए महिलाओं की एकता को तोड़ना और उन्हें धोखा देना चाहती थी। लेकिन विपक्ष की एकता ने भाजपा की इस योजना को नाकाम कर दिया। अखिलेश यादव ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस ‘महिला आरक्षण बिल’ के जरिए, भाजपा सिर्फ ‘नारी’ को एक ‘नारा’ बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन विपक्ष के नेतृत्व में चली जन-जागरूकता ने उनकी ये चाल सफल नहीं होने दी।





















