लोकतंत्र के नए अध्याय की शुरुआत, संसद में ऐतिहासिक पेशकश

History of Indian Democracy: 2001 और 2003 के संशोधनों के बाद, सीटों के बंटवारे को 1971 की जनगणना पर फ्रीज़ कर 2026 तक के लिए रोक दिया गया था। नया बिल इस फ्रीज़ को हटाएगा। अब संसद कानून बनाकर तय करेगी कि परिसीमन का आधार कौन सी जनगणना (2011, 2021 या भविष्य की) होगी, जिसके आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों।

850 सीटों वाले नए परिसीमन से लेकर महिला आरक्षण तक (फाइल फोटो)
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HIGHLIGHTS

  • लोकसभा में 18 घंटे की मैराथन बहस: तीन ऐतिहासिक बिल पेश
  • 543 से 850 सीटें: लोकसभा की तस्वीर बदलने आया नया नक्शा
  • 2029 चुनाव से पहले पूरा होगा 33% महिला आरक्षण, 270 सीटों का फॉर्मूला
  • 'महिला आरक्षण बहाना, सत्ता कब्ज़ा असली मकसद'- राहुल गांधी
  • दक्षिण के राज्यों का विरोध: 'सीटें कम हुईं तो सड़कों पर उतरेंगे'

History of Indian Democracy: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) का दिन ऐतिहासिक तो है, लेकिन राजनीतिक तूफान के लिहाज से भी काफी भारी है। संसद के विशेष सत्र में आज वो तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं, जिनके बाद देश की विधायी संरचना पूरी तरह बदल जाएगी। लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन बिलों पर 18 घंटे की लंबी चर्चा का प्लान बनाया है, जो शुक्रवार तक भी खिंच सकती है।

सरकार का साफ कहना है कि इन बिलों का मकसद 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले जमीन पर उतारना है। हालांकि, विपक्ष इसे ‘महिला आरक्षण का ढकोसला’ और ‘सत्ता कब्ज़ा करने की साजिश’ बता रहा है।

आज पेश होंगे कौन से तीन बिल?

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीसरा बिल पेश करेंगे:

  1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रावधान। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें होंगी।
  2. परिसीमन विधेयक, 2026: निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाओं का नक्शा तैयार करने वाला बिल।
  3. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026:** दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करेगा।

कैसे मिलेगा 33% महिला आरक्षण का फायदा?

महिला आरक्षण कानून 2023 में तो पास हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन (सीटों का बंटवारा) ज़रूरी था। ये तीनों बिल उसी रुकावट को दूर करेंगे। सीटों की संख्या बढ़ने के बाद 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से 2029 की लोकसभा में 270 से ज्यादा महिला सांसद हो सकती हैं। यह फॉर्मूला राज्यों की विधानसभाओं पर भी लागू होगा।

जनसंख्या के आंकड़ों का ‘अनलॉक’

2001 और 2003 के संशोधनों के बाद, सीटों के बंटवारे को 1971 की जनगणना पर फ्रीज़ कर 2026 तक के लिए रोक दिया गया था। नया बिल इस फ्रीज़ को हटाएगा। अब संसद कानून बनाकर तय करेगी कि परिसीमन का आधार कौन सी जनगणना (2011, 2021 या भविष्य की) होगी, जिसके आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों। NDA सूत्रों के मुताबिक, सीटों का अंतिम जुगाड़ परिसीमन आयोग करेगा, इसलिए 850 सिर्फ ऊपरी सीमा है।

‘महिला आरक्षण बहाना, सत्ता कब्जा असली मकसद’: राहुल गांधी

इन बिलों ने सियासत का पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन सरकार जो प्रस्ताव लाई है, उसका आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इसे ‘परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल’ करके सत्ता पर कब्ज़ा करने की कोशिश बताया।

राहुल ने आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नज़रअंदाज़ कर OBC, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्से की चोरी की जा रही है। इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की पार्टियों (कांग्रेस, DMK, JMM, SP, CPI-M, RJD) ने बुधवार को मीटिंग की, जबकि गुरुवार सुबह SP सांसदों की अखिलेश यादव की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई।

दक्षिण के राज्यों ने खोला मोर्चा

सबसे बड़ा विरोध दक्षिण भारत के राज्यों से आ रहा है। DMK प्रमुख और तमिलनाडु CM एम.के. स्टालिन ने चेतावनी दी है कि अगर जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों की सीटें कम होती हैं, तो वे “सड़कों पर उतरेंगे”।

DMK सांसद पी. विल्सन का कहना है कि सरकार ने 815 और 35 के आंकड़ों का तर्क ही नहीं दिया है। उन्होंने कहा, “सरकार जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को सज़ा दे रही है।” वहीं, वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े की राय मानें तो, “सरकार महिला आरक्षण का इस्तेमाल बहाने के तौर पर कर रही है, ताकि दक्षिणी राज्य सीटों में बदलाव को मजबूरन स्वीकार कर लें।”

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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