हरियाणा के फैसले ने उड़ाई नोएडा के फैक्ट्री मालिकों की नींद

हरियाणा में मजदूरों के पक्ष में लिए गए एक फैसले ने नोएडा के श्रमिकों को और उग्र कर दिया, जिससे आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। नोएडा में मजदूरों का आंदोलन आज (सोमवार) अचानक हिंसक हो गया। जो कि पिछले एक सप्ताह से श्रमिक अपनी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हालात बिगड़ गए।

हरियाणा सरकार के 'वरदान' ने नोएडा में फूंकी आग, मजदूरों का आंदोलन हुआ उग्र
---Advertisement---

HIGHLIGHTS

  • 20,000 रुपये सैलरी की मांग पर अड़े नोएडा के श्रमिक
  • नोएडा फेज-2 में तोड़फोड़ और पथराव
  • वेतन वृद्धि के रौदे में फैक्ट्रियां रहीं ठप
  • फरीदाबाद-नोएडा सैलरी अंतर बना बवाल की जड़
  • भेदभाव के खिलाफ सड़कों पर उतरे मजदूर

Noida Labor Protest: दिल्ली एनसीआर के नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर मजदूरों का आक्रोश आज (सोमवार) को हिंसक रूप ले चुका है। पिछले एक सप्ताह से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा आंदोलन अब सड़कों पर उतर गया है, जिसे काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गोले दागने पड़े। दिलचस्प बात यह है कि इस हिंसक प्रदर्शन की जड़ में कोई स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि आसपास के राज्य हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का सरकार का फैसला है।

हरियाणा के फैसले ने दिया आंदोलन को बूस्ट

दरअसल, हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने 1 अप्रैल को ऐलान कर 11 अप्रैल से राज्य में न्यूनतम मजदूरी में लगभग 35 फीसदी की बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,275 रुपये से बढ़ाकर 15,220 रुपये, अर्ध-कुशल का 12,430 रुपये से बढ़ाकर 16,780 रुपये, कुशल श्रमिकों का 13,704 रुपये से बढ़ाकर 18,500 रुपये और हाई-स्किल्ड श्रमिकों का वेतन 14,389 रुपये से बढ़ाकर 19,425 रुपये मासिक कर दिया गया है। हरियाणा सरकार का यह ‘वरदान’ अब नोएडा के लिए चिंगारी बन गया है।

‘रिचा ग्लोबल’ का फरीदाबाद-नोएडा विवाद

नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हान ने भी माना कि आंदोलन के पीछे हरियाणा सरकार का वेतन बढ़ाने का फैसला ही मुख्य वजह है। सबसे पहले यह आग सेक्टर 83 (फेज-2) स्थित ‘रिचा ग्लोबल कंपनी’ से लगी। इस कंपनी की एक यूनिट हरियाणा के फरीदाबाद में भी है। हरियाणा सरकार के फैसले के बाद कंपनी प्रबंधन ने फरीदाबाद यूनिट में टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 20,000 और नॉन-टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 15,000 रुपये कर दी।

जैसे ही इस बात की जानकारी नोएडा स्थित रिचा ग्लोबल की चार अन्य फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को हुई, उन्होंने भी समान वेतन की मांग उठा दी। एक कर्मचारी रमेश कुमार (नाम बदला हुआ) का कहना है, “काम एक जैसा है, तो वेतन में भेदभाव क्यों? जब कंपनी फरीदाबाद में हरियाणा के बराबर वेतन दे सकती है, तो नोएडा में क्यों नहीं?”

आंदोलन ने लिया हिंसक रूप, फूटी पत्थरबाजी

सोमवार सुबह जैसे ही फैक्ट्रियों में काम शुरू होने का समय आया, मजदूरों ने काम का बहिष्कार कर दिया। धीरे-धीरे यह विरोध प्रदर्शन रिचा ग्लोबल से निकलकर आसपास की अन्य एक्सपोर्टर और होजरी कंपनियों में फैल गया। हालात तब बिगड़े जब मदरसन कंपनी के बाहर प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश में आकर पत्थरबाजी शुरू कर दी और कई वाहनों में आग लगा दी। इससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र का यातायात बाधित हो गया और कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।

मजदूरों की 6 मुख्य मांगें

प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं:

  1.  सभी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 20,000 रुपये मासिक की जाए।
  2. 30 नवंबर तक बोनस की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए।
  3. किसी भी कर्मचारी को बिना कारण सेवा से नहीं निकाला जाए।
  4. ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से किया जाए और इसमें कोई कटौती न हो।
  5. हर कर्मी को रविवार को साप्ताहिक अवकाश मिले।
  6. अगर रविवार को काम कराया जाता है, तो उसका भुगतान दोगुना किया जाए।

गतिरोध बरकरार, प्रशासन की नींद उड़ी

हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। श्रम आयुक्त समेत अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन के साथ घंटों तक बातचीत की। प्रशासन का दावा है कि मजदूरों की अधिकांश मांगें मान ली गई हैं, लेकिन श्रमिकों का कहना है कि सबसे अहम मुद्दे यानी ‘वेतन वृद्धि’ को लेकर अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है और कंपनी प्रबंधन टालमटोल कर रहा है। जब तक वेतन वृद्धि को लेकर कोई लिखित या स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक मजदूरों का आंदोलन जारी रहेगा। हरियाणा की एक नीतिगत बदलाव की गूंज अब उत्तर प्रदेश के औद्योगिक हब में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौती बनकर सामने आई है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment