श्रमिकों का दर्द: थकान, कम वेतन और अनसुनी आवाज़-प्रदर्शनकारियों की आपबीती

Noida Violence: प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की जंग से जुड़ा हुआ है। अवधेश मिश्रा नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "सरकारी कर्मचारियों की सैलरी तो बढ़ जाती है, लेकिन हमारी आवाज कोई नहीं सुनता।

सैलरी बढ़ोतरी में भेदभाव का आरोप, कर्मचारियों का विरोध तेज
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HIGHLIGHTS

  • 12 घंटे की मेहनत, सिर्फ 13 हजार वेतन—कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
  • “हमारी सुनवाई कब होगी?”—कम सैलरी पर भड़के प्रदर्शनकारी
  • सरकारी कर्मचारियों की बढ़ती सैलरी, निजी कर्मियों में आक्रोश
  • 13 हजार में 12 घंटे काम—इंसाफ की मांग में सड़कों पर कर्मचारी
  • कम वेतन और लंबी ड्यूटी से परेशान कर्मचारियों का प्रदर्शन

Noida News: महीने में 12 से 14 घंटे की मेहनत के बाद जेब में महज 13 हजार रुपये आएं, तो घर कैसे चलेगा? यह सवाल इन दिनों नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों के चेहरों पर साफ नजर आ रहा है। बढ़ती महंगाई और कम वेतन के विरोध में श्रमिकों का आक्रोश सड़कों पर उतरा, जिसे काबू करने के लिए पुलिस को कड़ा शिकंजा कसना पड़ा। बीते दिनों हिंसक झड़पों के बाद पुलिस ने 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि सरकार ने तत्काल राहत के तौर पर न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

श्रमिकों का दर्द: “सब्जी 100 के नीचे नहीं, बचाएंगे कहां से?”

प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की जंग से जुड़ा हुआ है। अवधेश मिश्रा नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “सरकारी कर्मचारियों की सैलरी तो बढ़ जाती है, लेकिन हमारी आवाज कोई नहीं सुनता। 12 घंटे काम करने के बाद 13 हजार रुपये में खाएंगे क्या, रहेंगे क्या और बचाएंगे क्या? आज एक बार की सब्जी 100 रुपये से नीचे नहीं मिलती।”

गाजियाबाद से आई सोनी की कहानी और भी भयावह है। उसने बताया, “13 हजार रुपये में क्या होता है? 5 हजार किराया, 4 हजार राशन… और कंपनी ने खाना देना भी बंद कर दिया है। जो टिफिन लाते हैं वो खा लेते हैं, जो नहीं ला पाते उन्हें सिर्फ चार पतली रोटियां मिलती हैं।” श्रमिकों की मांग साफ है—घर चलाने के लिए कम से कम 18 से 20 हजार रुपये महीना जरूरी है। शेर सिंह जैसे कर्मचारियों का मानना है कि सरकार की ओर से दी गई थोड़ी सी बढ़ोतरी का धन्यवाद तो करेंगे, लेकिन इससे ‘जिंदगी चलाने’ का सवाल हल नहीं होता।

सरकार का फैसला: 3 हजार की अंतरिम बढ़ोतरी, 20 हजार की खबर फेक

उग्र प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार ने सोमवार देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया। अलग-अलग श्रेणियों में अधिकतम करीब 3 हजार रुपये की अंतरिम (Interim) वृद्धि की गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

हालांकि, सरकार ने सोशल मीडिया पर फैली एक बड़ी अफवाह को भी किचकिचाते हुए खारिज किया। शासन ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये करने की खबर पूरी तरह से ‘मनगढ़ंत और झूठी’ है। अधिकारियों ने बताया कि अगले माह एक ‘वेज बोर्ड’ का गठन किया जाएगा, जो इस मामले की व्यापक समीक्षा कर स्थायी समाधान की सिफारिश करेगा।

पुलिस का शिकंजा: 7 एफआईआर, विदेशी फंडिंग की जांच शुरू

वहीं, कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसक प्रदर्शन के मामले में अब तक 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भीड़ को भड़काने वालों की पहचान कर ली गई है और आगे भी गिरफ्तारियां होंगी।

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस इस आंदोलन के पीछे ‘संगठित षड्यंत्र’ की भी जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि इस प्रदर्शन को राज्य या देश के बाहर से फंडिंग मिली हो सकती है, जिसकी जड़ें खोजी जा रही हैं।

सोशल मीडिया पर नजर

इस मामले में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी पुलिस की पैनी नजर है। फेसबुक और एक्स (X) पर भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट डालने के आरोप में अब तक दो एक्स हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस ने पिछले 24 घंटे में बनाए गए 50 से अधिक संदिग्ध बॉट हैंडल्स को भी चिन्हित किया है, जिनका इकलौता मकसद अफवाह फैलाकर माहौल को तूल देना था।

फिलहाल, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां प्रशासन कानून व्यवस्था और फंडिंग के रास्तों पर शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी तरफ बेसहारा श्रमिकों का संकल्प अडिग है। उनका कहना साफ है—”जब तक हमारी सैलरी हमारे हिसाब से (18-20 हजार) नहीं आ जाती, यह धरना जारी रहेगा।”

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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