ऋषी तिवारी
देश के 10 राज्यों में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनावों ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। कुल 37 सीटों के लिए हुए इन चुनावों में बिहार में NDA के परचम को देखने को मिला, जबकि ओडिशा में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की। वहीं, हरियाणा में मतपत्र की गोपनीयता को लेकर उठे विवाद के चलते मतगणना में काफी देरी हुई और देर रात तक जीत-हार का फैसला लटका रहा।
बिहार में NDA की पांचों सीटों पर कमाल
बता दें कि सबसे ज्यादा सुर्खियां बिहार के राज्यसभा चुनावों ने बटोरीं, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पांचों सीटों पर कब्जा जमा लिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर आसानी से जीत गए। सबसे रोचक मुकाबला पांचवीं सीट के लिए रहा, जहां NDA के शिवेश कुमार ने महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर हराया।
महागठबंधन के लिए यह हार तब और ज्यादा चौंकाने वाली रही जब कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक ने मतदान से दूरी बनाई। इसके चलते महागठबंधन के उम्मीदवार पहली वरीयता के वोटों में तो आगे रहे, लेकिन दूसरी वरीयता के वोटों के अभाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। शिवेश कुमार को कुल 4202 वोटों का मूल्य मिला, जबकि अमरेंद्र धारी सिंह को 3700 वोटों का मूल्य प्राप्त हुआ।
ओडिशा में भाजपा का दबदबा
ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में भारी गहमागहमी रही। बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस के कई विधायकों की क्रॉस-वोटिंग ने भाजपा का काम आसान कर दिया। भाजपा ने दो सीटें जीतीं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार विजयी रहे। वहीं, भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय भी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। BJD के संतृप्त मिश्रा को ही एकमात्र सफलता मिल सकी।
हरियाणा में विवाद और देरी
हरियाणा में राज्यसभा चुनावों के दौरान मतपत्र की गोपनीयता का मुद्दा बड़ा विवाद बन गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक-दूसरे के विधायकों पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने कांग्रेस की याचिका खारिज करते हुए भाजपा नेता अनिल विज का वोट मान्य किया, लेकिन कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह का मत अमान्य कर दिया। इस पूरे प्रक्रिया में मतगणना 5 घंटे तक रुकी रही।
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7 राज्यों में निर्विरोध जीत
बिहार, ओडिशा और हरियाणा के अलावा 7 अन्य राज्यों में 26 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। इनमें असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के उम्मीदवारों ने, वहीं तेलंगाना में कांग्रेस और महाराष्ट्र में भाजपा व सहयोगी दलों के उम्मीदवारों ने बिना मुकाबले के सीटें हासिल कीं।
मुख्य नतीजे:
- बिहार: NDA पांचों सीटों पर विजयी।
- ओडिशा:भाजपा ने 2, BJD ने 1 और भाजपा समर्थित निर्दलीय ने 1 सीट जीती।
- पश्चिम बंगाल: TMC को 4, भाजपा को 1 सीट।
- तमिलनाडु: DMK को 3, AIADMK, PMK, कांग्रेस और DMDK को 1-1 सीट मिलीं।
- महाराष्ट्र: भाजपा को 3, शिवसेना, NCP (SP), RPI और NCP को 1-1 सीट पर कब्जा।
- असम:भाजपा को 2, UPPL को 1 सीट।
- छत्तीसगढ़:भाजपा ने दोनों सीटें जीतीं।
- तेलंगाना:कांग्रेस ने दोनों सीटें हासिल कीं।
- हिमाचल प्रदेश:कांग्रेस का कब्जा।






















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