Nepal’s Unique City: अगर आपको लगता है कि भारतीय सड़कों पर गाय-भैंसों का आना-जाना ट्रैफिक के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, तो आपको नेपाल के एक खास शहर के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। यहां सड़कों पर न तो कोई पशुपालक है और न ही कोई आवारा मवेशी, बल्कि यहां एक-सींग वाले विशालकाय गैंडे और हाथी बेखौफ घूमते हैं। इंसान और जंगली जानवरों का यह अनोखा साथ यहां रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
हम बात कर रहे हैं नेपाल के प्रसिद्ध चितवन नेशनल पार्क के गेटवे शहर ‘सौराहा’ की।
होटल के लॉन से लेकर मोटरबाइक स्टैंड तक…
सौराहा में पर्यटकों के लिए कोई जंगल सफारी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती। कई बार तो ऐसा होता है कि पर्यटक जब होटल से बाहर निकलते हैं, तो उनके सामने से एक विशालकाय गैंडा आराम से गुजर जाता है। कभी ये जानवर होटल के लॉन पर चर्बी गर्म करते नजर आते हैं, तो कभी रेस्टोरेंट या मोटरबाइक स्टैंड के बीच से निकल जाते हैं।
आखिर शहर में आते क्यों हैं ये वन्यजीव?
इसके पीछे एक बड़ी वजह प्रकृति संरक्षण की सफलता है। चितवन नेशनल पार्क दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहां बाघ, गैंडे और हाथी एक साथ निवास करते हैं। 1970 के दशक में नेपाल में गैंडों की संख्या महज 100 के करीब रह गई थी, लेकिन सख्त संरक्षण कानूनों के चलते अब यह आंकड़ा 700 के पार पहुंच गया है।
चितवन पार्क के इर्द-गिर्द बने 750 वर्ग किलोमीटर के ‘बफर जोन’ में लगभग 45,000 से ज्यादा परिवार रहते हैं। जैसे-जैसे गैंडों की आबादी बढ़ी, उनका दायरा भी बढ़ता गया। अब ये जानवर नियमित रूप से गांवों और शहरों में घुसकर लोगों के बगीचों में चरने लगे हैं।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिल रहा बूस्ट
स्थानीय लोगों ने इन विशालकाय जानवरों के साथ रहना सीख लिया है। ज्यादातर समय ये गैंडे शांत स्वभाव के होते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। पर्यटकों के लिए यह नजारा किसी मैजिक से कम नहीं है। वे इनके साथ सेल्फी लेते हैं और वीडियो बनाते हैं।
सौराहा में पर्यटन की धमक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां कई होटल और रिसॉर्ट के नाम ही ‘राइनो’ (Rhino Lodge, Hotel Rhino Land आदि) पर रखे गए हैं। कई बार पर्यटक जंगल के अंदर गैंडा नहीं देख पाते, लेकिन सड़क पर आराम से घूमता हुआ गैंडा देखकर उनकी खुशी दोगुनी हो जाती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
हर दिन शांतिपूर्ण नहीं होता यह सह-अस्तित्व
हालांकि, यह तस्वीर हमेशा सुहानी नहीं रहती। जंगली जानवरों का इंसानों के बीच आना ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ (Human-Wildlife Conflict) को बढ़ावा दे रहा है। कभी-कभी भड़के हुए गैंडों के हमलों में लोग घायल हो जाते हैं, और दुर्भाग्यवश कुछ मौतें भी हुई हैं। किसानों की फसलें खराब होना आम बात हो गई है, जिसके चलते उन्हें रातों-रात फसलों की रखवाली के लिए ‘वॉच टावर’ बनाने पड़ते हैं।
























