4 Day workweek regime: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह उठते ही ऑफिस की चिंता और देर रात तक चलने वाली शिफ्ट्स ने लोगों का जीवन तनावपूर्ण बना दिया है। ऑफिस और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच फंसे लोगों को खुद के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। लेकिन, क्या हो अगर आपको हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करना हो और वो भी पूरी सैलरी पर? कहीं यह कोई सपना तो नहीं? जी नहीं, यह सच है! दुनिया के कई देशों में यह ‘सपना’ अब हकीकत बन चुका है, जहां ‘4-डे वर्क वीक’ का नया कार्य मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
क्या है यह ‘100-80-100’ फॉर्म्यूला?
4-डे वर्क वीक यानी सप्ताह में केवल चार दिन काम करना। इसके पीछे एक विशेष ‘100-80-100’ मॉडल काम करता है। इसका सीधा मतलब है- कर्मचारियों को 100% सैलरी मिलती है, वे 80% समय ही काम करते हैं, लेकिन कंपनी उनसे 100% प्रोडक्टिविटी की अपेक्षा करती है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को कम समय में बेहतर ढंग से काम करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि उन्हें अपने निजी जीवन के लिए भी पर्याप्त समय मिल सके।
यूरोप से एशिया तक, कौन से देश अपना रहे हैं यह मॉडल?
इस क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत यूरोप से मानी जाती है। देशों की बात करें तो बेल्जियम (Belgium) ने अपने कर्मचारियों को 4 दिन काम करने का कानूनी अधिकार दे दिया है। वहीं, पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस जैसे देश इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आजमा रहे हैं।
अब यह ट्रेंड सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया में भी इसकी रफ्तार देखने लायक है। काम के घंटों के लिए मशहूर जापान की सरकार भी अब अपने लोगों को राहत देने के लिए इस मॉडल को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, फिलीपींस में ऊर्जा (Energy) बचाने के मकसद से सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन कार्य सप्ताह लागू किया जा चुका है।
रिसर्च क्या कहती है?
क्या कम काम करने से प्रोडक्टिविटी घटती है? शोध रिपोर्ट्स कहती हैं- बिल्कुल नहीं! रिसर्च से पता चला है कि जब कर्मचारियों को सप्ताह में सिर्फ 4 दिन काम करना होता है, तो उनकी कार्यक्षमता (Efficiency) में वृद्धि होती है। कम समय में काम खत्म करने का दबाव उन्हें ज्यादा फोकस्ड और एनर्जेटिक बनाता है। इससे ‘बर्नआउट’ (Burnout) यानी अत्यधिक थकान का स्तर कम होता है, जिससे मानसिक और शारीरिक सेहत बेहतर रहती है। हैप्पी एंप्लाईज़ (Happy Employees) कंपनियों के लिए बेहतर रिजल्ट लाते हैं, जिससे कंपनी की कुल आय में भी इजाफा होता है।
भारत की क्या है स्थिति?
भारत में अभी यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू नहीं हुई है, लेकिन नए लेबर कोड्स (Labour Codes) में इसकी झलक जरूर दिखाई दे रही है। नए नियमों के मुताबिक, कर्मचारी 4 दिन काम करके 3 दिन की छुट्टी ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें दिन में 12 घंटे तक काम करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत के आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में भी यह मॉडल धीरे-धीरे अपनाया जा सकता है।























