Korowai : दुनिया में अनगिनत ऐसी जनजातियां हैं जो आज भी आधुनिक दुनिया से कटकर जंगलों में निवास करती हैं। इनमें से कुछ जनजातियां अपने रहन-सहन और रीति-रिवाजों को लेकर काफी चर्चा में रहती हैं। आज हम आपको दुनिया की ऐसी ही एक अनोखी जनजाति के बारे में बताने जा रहे हैं, जो जमीन पर नहीं बल्कि पेड़ों पर घर बनाकर रहती है। इन लोगों का ये रहने का तरीका देखकर आपको भी यकीन नहीं होगा।
कौन हैं ये लोग और कहां रहते हैं?
बता दें कि यह जनजाति ‘कोरोवाई’ (Korowai) के नाम से जानी जाती है। यह जनजाति इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत के घने जंगलों में निवास करती है। इन जंगलों में पहुंचना बहुत मुश्किल होता है, जिस वजह से इस जनजाति का पता दुनिया को बहुत देर से लगा।
साल 1974 में हुई थी खोज
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया को इस जनजाति के बारे में पता साल 1974 में लगा था। तब एक डच मिशनरी ने इस जनजाति की खोज की थी। इससे पहले कोरोवाई जनजाति के लोग यही मानते थे कि पूरी दुनिया में सिर्फ वही लोग हैं, उनके अलावा कोई और इंसान मौजूद नहीं है।
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क्यों पेड़ों पर बनाते हैं घर?
कोरोवाई जनजाति के लोग जमीन से करीब 6 से 12 मीटर (यानी करीब 50 फीट) की ऊंचाई पर पेड़ों पर अपने घर बनाते हैं। इन घरों की नींव पेड़ के मजबूत तनों पर टिकी होती है और छत पत्तियों से ढकी होती है। लेकिन सवाल है कि आखिर ये लोग जमीन पर क्यों नहीं रहते? इसका कारण सुरक्षा है। इतिहास में इन्हें दुश्मन कबीलों से खतरा रहा है। जमीन से इतनी ऊंचाई पर बने घर दुश्मनों की नजरों से बच जाते हैं और आक्रमण करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इन लोगों का मानना है कि पेड़ों पर रहने से उन्हें बुरी आत्माओं से भी सुरक्षा मिलती है।
कुख्यात ‘नरभक्षक’ के रूप में भी जाने जाते हैं
जानकारी के मुताबिक, कोरोवाई जनजाति के लोगों को नरभक्षी (Cannibals) भी कहा जाता है। हालांकि, ये लोग शिकार और मछली पकड़ने में भी काफी माहिर होते हैं। इनका निशाना बहुत सटीक माना जाता है। अपने खान-पान और रहने के तरीके के कारण यह जनजाति दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है।



















