दक्षिण अमेरिका के जंगलों का ‘चलने वाला पेड़’, सच्चाई जानकर उड़ जाएंगे होश

Socratea exorrhiza: पेड़ों को हमेशा एक जगह स्थिर रहने वाला माना जाता है, लेकिन दुनिया भर में एक ऐसे रहस्यमयी पेड़ की कहानी प्रचलित है, जो खुद चलकर धूप की तलाश में अपनी जगह बदल लेता है। मध्य और दक्षिण अमेरिका के घने वर्षावनों में पाया जाने वाला यह पेड़ दशकों से पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए एक कौतूहल का विषय रहा है।

क्या सच में चलता है 'वॉकिंग पाम' का पेड़?
---Advertisement---

HIGHLIGHTS

  • पैरों जैसी जड़ों वाला रहस्यमयी पेड़
  • क्या यह सच में इंसानों की तरह चलता है?
  • जानें सॉक्रेटीया एक्सोरहिजा की असली कहानी
  • इस पेड़ की ऊपर उठी जड़ें बाढ़ से बचने का हैं अनोखा तरीका!
  • रहस्य गल्प था: अमेजन के उस रहस्यमयी पेड़ की असलियत

Walking Palm: प्रकृति के रहस्य अक्सर मानवीय मस्तिष्क को हैरान कर देते हैं। कभी-कभी ये रहस्य इतने अद्भुत होते हैं कि सच और कल्पना के बीच की सीमा मिट जाती है। ऐसा ही एक दावा दशकों से दुनिया भर में प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि दक्षिण अमेरिका के घने जंगलों में एक ऐसा पेड़ पाया जाता है जो ‘चलता’ है। लेकिन क्या यह सच है? आइए जानते हैं उस तस्वीर की सच्चाई जिसे विज्ञान देखता है।

सोक्रेटिया एक्सोराइज़ा: जिसे ‘वॉकिंग पाम ट्री’ कहा जाता है

इस रहस्यमयी पेड़ का वैज्ञानिक नाम ‘सॉक्रेटीया एक्सोरहिजा’ (Socratea exorrhiza) है। यह एक विशेष प्रकार का पाम ट्री (ताड़ का पेड़) है, जो मुख्य रूप से इक्वाडोर, कोस्टा रिका, पेरू, कोलंबिया और ब्राजील के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाया जाता है।

इसे ‘वॉकिंग ट्री’ (चलने वाला पेड़) क्यों कहा जाता है? इसका कारण इसकी अनोखी जड़ें हैं। दूसरे पेड़ों की तरह इसकी जड़ें जमीन के अंदर नहीं, बल्कि ऊपर उठी हुई हैं। ये जड़ें एक तरह से छाती के बराबर फैलकर जमीन में गहराई तक जाती हैं, जो किसी जीव के पैरों जैसी संरचना का एहसास कराती हैं। पहली नजर में लगता है जैसे यह पेड़ किसी विशालकाय प्राणी की तरह खड़ा है।

‘चलने वाले पेड़’ की कहानी कहां से शुरू हुई?

यह दावा पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। ट्रैवल गाइडबुक्स और जंगलों में घूमने वाले पर्यटकों ने लंबे समय तक यह कहानी फैलाई। दावा किया गया कि यह पेड़ धूप या ज्यादा मजबूत जमीन की तलाश में रोजाना कुछ सेंटीमीटर और साल में कई मीटर तक अपनी जगह बदल लेता है। इसका तना जरा-सा झुका हुआ होता है और जड़ें एक तरफ ज्यादा फैली होती हैं, जिसे देखकर लोगों ने यह यकीन कर लिया कि पेड़ सच में ‘पैर’ उठाकर आगे बढ़ रहा है।

विज्ञान की जांच: क्या पेड़ सच में चलता है?

जब इस मिथ को वैज्ञानिकों ने अपनी कसौटी पर कसा, तो पूरा दावा खोखला निकला। अब तक हुई किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन (Scientific Studies) में इस बात का जरा भी सबूत नहीं मिला कि Socratea exorrhiza अपनी जगह बदलता है।

विज्ञान कहता है कि इस पेड़ का तना वहीं रहता है, जहां इसका बीज पहली बार उगा था।

तो फिर ये जड़ें और ‘चलने’ का भ्रम कैसे बना?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जो हरकत लोगों को चलने जैसी लगती है, वह वास्तव में इसके जड़ों के बढ़ने और संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। इस पेड़ की ऊपर उठी हुई जड़ें (Stilt roots) किसी जादू के लिए नहीं हैं, बल्कि ये उसे दलदली और नरम जंगल की जमीन में जीवित रखने का जरिया हैं।

स्थिरता का राज: भारी बारिश से भीगी मिट्टी में जहां दूसरे पेड़ आसानी से गिर जाते हैं, वहीं ये ऊपरी जड़ें इसे जमीन में कील की तरह गहराई से थामकर मजबूती प्रदान करती हैं। भ्रम पैदा करने वाली प्रक्रिया: इस पेड़ की नई जड़ें एक तरफ उगती रहती हैं, जबकि दूसरी तरफ की पुरानी जड़ें धीरे-धीरे मर कर सड़ जाती हैं। इस बदलाव और मिट्टी के थोड़े खिसकने के कारण देखने में ऐसा लगता है कि पेड़ अपनी दिशा बदलकर आगे बढ़ रहा है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment