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पृथ्वी से 560 प्रकाश वर्ष दूर मिला ‘सुपर अर्थ’, वैज्ञानिकों के होश उड़ा देने वाली खोज

अंतरिक्ष में मिला 'नरक जैसा' ग्रह

Super Earth: अंतरिक्ष के अनगिनत रहस्यों में से एक और नया राज खुला है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रहस्यमयी ग्रह की खोज की है, जिसे देखकर और जिन तथ्यों को जानकर दुनिया भर के एस्ट्रोनॉमर्स हैरान हैं। इस ग्रह का नाम TOI-561 b है, जिसे ‘सुपर अर्थ’ (Super Earth) का टैग दिया गया है। यह ग्रह पृथ्वी से करीब 560 प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा में स्थित है। आइए जानते हैं इस ‘नरक जैसे’ ग्रह की उन खासियतों के बारे में, जो इसे हमारी धरती से बिल्कुल अलग बनाती हैं:

लावा के महासागर और असीम गर्मी

इस ग्रह पर तापमान इतना भयानक है कि आपकी कल्पना से भी परे है। यहां का तापमान 1800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस वजह से इसकी सतह पूरी तरह से पिघले हुए पत्थरों यानी ‘लावा’ से ढकी हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यहां ‘मैग्मा ओशन’ (लावा के महासागर) बने हुए हैं।

11 घंटे में पूरा होता है एक साल!

TOI-561 b अपने तारे के बेहद करीब है, जिसकी वजह से यह बेतहाशा तेजी से उसका चक्कर लगाता है। यहां का एक साल महज 11 घंटे के बराबर है। यानी, जब तक आप पृथ्वी पर एक दिन में सुबह से शाम होने का इंतजार करते हैं, वहां एक पूरा साल बीत चुका होता है।

जहां सूरज कभी नहीं ढलता

इस ग्रह की एक खासियत यह भी है कि इसका एक हिस्सा हमेशा अपने सूरज (तारे) की तरफ रहता है। इसका मतलब है कि ग्रह के एक तरफ कभी रात नहीं होती, वहां हमेशा दिन बना रहता है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मौजूद मोटा वायुमंडल गर्मी को दूसरी तरफ (जहां रात होती है) भी पहुंचाता है।

वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना वायुमंडल

सबसे बड़ा हैरान करने वाला तथ्य यह है कि 1800 डिग्री की गर्मी के बावजूद इस ग्रह के पास एक मोटा वायुमंडल (Atmosphere) है। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि इतनी गर्मी में किसी ग्रह का वायुमंडल बचा नहीं रह सकता। और तो और, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से मिले नए डेटा से पता चला है कि इस वायुमंडल में पानी, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें मौजूद हो सकती हैं!

कैसे हुई ये खोज?

इस ग्रह की पहचान साल 2021 में नासा के TESS मिशन के जरिए हुई थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से इसका गहराई से अध्ययन किया। शोध से पता चला कि यहां लावा और वायुमंडल के बीच एक अनोखा संतुलन है—गैसें बाहर निकलती हैं और फिर वापस अंदर भी चली जाती हैं।

साइंस के लिए इस खोज का क्या मतलब है?

यह खोज सिर्फ एक नया ग्रह खोजने भर से कहीं ज्यादा अहम है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि TOI-561 b करीब 10 अरब साल पुराना है—यानी यह हमारे सूरज से भी लगभग दोगुना पुराना है। इसकी मौजूदगी यह साबित करती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में ही चट्टानी (Rocky) ग्रह बनने लगे थे। यह खोज वैज्ञानिकों की पुरानी धारणाओं को तोड़ती है और एक बार फिर यह साबित करती है कि अंतरिक्ष के अनगिनत रहस्यों को सुलझाना अभी बाकी है!

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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