उत्तराखंड में आज भूकंप के दो झटके दर्ज किए गए। रात 8:08 बजे उत्तरकाशी में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि इससे पहले बागेश्वर में 2.8 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। हाल के दिनों में राज्य के अलग-अलग इलाकों में भूकंपीय गतिविधियां सामने आई हैं।
इससे पहले 6 अक्टूबर को चमोली जिले में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। उसके झटके उत्तराखंड के कई हिस्सों के साथ दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किए गए थे।
चमोली में 6 अक्टूबर को आया था 4.9 तीव्रता का भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, चमोली में भूकंप रात 10:23 बजे आया था। इसका केंद्र जमीन से करीब 13 किलोमीटर की गहराई पर था। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने भी भूकंप का समय और केंद्र इसी के अनुरूप बताया था।
झटके महसूस होने पर देहरादून में कुछ लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी लोगों ने धरती हिलने का एहसास किया था।
उत्तराखंड में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
उत्तराखंड का गढ़वाल-कुमाऊं क्षेत्र हिमालयी भूकंपीय पट्टी का हिस्सा है, जहां जमीन के भीतर लगातार भूगर्भीय हलचल होती रहती है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से धरती की परतों में दबाव बनता है। यह दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आ सकता है।
क्षेत्र की प्रमुख भूगर्भीय संरचनाओं में मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) शामिल है, जो लघु हिमालय और उच्च हिमालय के बीच की महत्वपूर्ण सीमा है। शोध में उत्तराखंड के कई पुराने भूकंपों का संबंध इस संरचना के आसपास की भूगर्भीय गतिविधियों से जोड़ा गया है।
पुराने भूकंप भी पहुंचा चुके हैं नुकसान
उत्तराखंड में 1991 का उत्तरकाशी भूकंप और 1999 का चमोली भूकंप बड़े नुकसान का कारण बने थे। हालांकि, किसी भूकंप की तीव्रता और उसके प्रभाव का आकलन अलग-अलग बातों पर निर्भर करता है—जैसे उसका केंद्र, गहराई, स्थानीय भूगर्भ और आसपास की इमारतें।
विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया झटकों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कोई बड़ा भूकंप आने वाला है। भूकंप की सटीक वजह और सक्रिय फॉल्ट की पहचान के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अंतिम आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण का इंतजार करना जरूरी है।



























