कॉकरोच प्रोटेस्ट में उतरे वकील, पुलिस ने पकड़ा; CJI का आदेश

दिल्ली में SIR के विरोध और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निकले वकीलों को पुलिस ने हिरासत में लिया। SCBA ने चिंता जताई; CJI सूर्यकांत ने रिहाई के लिए कहा।

दिल्ली में ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’: वकीलों को पुलिस ने हिरासत में लिया, CJI सूर्यकांत का आदेश

HIGHLIGHTS

  • जंतर-मंतर मार्च से पहले वकील गिरफ्तार
  • दिल्ली पुलिस ने 100 वकील पकड़े
  • SIR विरोध में सड़कों पर उतरे वकील
  • वकीलों की हिरासत पर SCBA नाराज

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहा कॉकरोच प्रोटेस्ट आज शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों तक पहुंच गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की अदालतों से जुड़े वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट परिसर से जंतर-मंतर की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया।

बता दें कि रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 100 वकीलों को हिरासत में लेकर यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रखा गया। घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने पुलिस की कथित कार्रवाई पर चिंता जताई और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से हस्तक्षेप की अपील की। खबरों के अनुसार, CJI ने पुलिस अधिकारियों से हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा करने के लिए कहा।

SCBA ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता

SCBA ने 10 अक्टूबर को पारित प्रस्ताव में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे वरिष्ठ और युवा वकीलों, खासकर महिला वकीलों, के खिलाफ कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। एसोसिएशन ने कहा कि उसे कई वकीलों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली है।

प्रस्ताव में CJI से संबंधित अधिकारियों के सामने मामला तुरंत उठाने और हिरासत में मौजूद वकीलों की स्थिति का पता लगाने का आग्रह किया गया। SCBA ने यह भी कहा कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिन लोगों को हिरासत में रखने का वैध आधार न हो, उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग भी की गई।

एसोसिएशन ने कथित बल प्रयोग और हिरासत की परिस्थितियों की जांच कर कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई करने की अपील की है। प्रस्ताव की प्रति CJI के समक्ष तत्काल विचार के लिए रखने की बात भी कही गई।

महिला वकीलों से बदसलूकी का आरोप

हिरासत में ली गईं एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुमिता हजारिका ने ‘बार एंड बेंच’ को बताया कि कुछ महिला वकीलों के साथ अज्ञात कांस्टेबलों ने बदसलूकी की। उनके मुताबिक, महिला वकीलों को ऐसी वैन में ले जाया गया जिसका इस्तेमाल अपराध के आरोपियों को ले जाने के लिए किया जाता है। ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं; पुलिस की कार्रवाई और हिरासत के हालात को लेकर SCBA ने जांच की मांग की है।

जंतर-मंतर मार्च से पहले कड़ी सुरक्षा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र व युवा संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने आवेदन देर से दिए जाने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं को इसकी वजह बताया।

प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, 23 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई। लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाई गईं। मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं को लेकर भी प्रतिबंधों की घोषणाएं की गई थीं।

विमान से उतरते ही CJP नेताओं को हिरासत में लेने का दावा

CJP ने आरोप लगाया कि उसके नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के भीतर से ही हिरासत में लिया गया। वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।

पार्टी की ओर से साझा किए गए वीडियो में दीपके पुलिस अधिकारियों से कहते सुनाई देते हैं, “हम यहां गिरफ्तारी देने के लिए आए हैं, आइए और हमें गिरफ्तार कीजिए।” CJP का कहना है कि उसके नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पहले से योजना बनाकर कार्रवाई की गई। पार्टी ने इसे आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए तीनों नेताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की।

SIR को लेकर क्या हैं प्रदर्शनकारियों के आरोप?

कॉकरोच प्रोटेस्ट का केंद्र चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। वे इस प्रक्रिया पर जवाबदेही तय करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को दुरुस्त करना और डुप्लिकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।

यह विरोध वकीलों तक सीमित नहीं है। CJP के साथ छात्र और युवा संगठन भी आंदोलन में शामिल हैं, जबकि विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, वकीलों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर SCBA की मांग है कि हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति स्पष्ट की जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो और मामले की जांच हो।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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