मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने चुनावी हार के बाद सड़क के प्रदर्शन को राजनीतिक हथियार बना लिया है और इससे दिल्ली की जनता को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के नाम पर लगातार अव्यवस्था फैलाना उचित नहीं है।
बता दें आज शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने विपक्षी दलों और सीजेपी को घेरा। प्रसाद के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से विपक्षी नेता अलग-अलग मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे आम लोगों को असुविधा हो रही है।
“विपक्ष ने सड़क के प्रदर्शन को हथियार बनाया”
रविशंकर प्रसाद ने हालिया उपचुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए इसे जनता का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत ऐसे समय में मिली है, जब विपक्ष दिल्ली में प्रदर्शन कर रहा है। भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी विरोध प्रदर्शन के अधिकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन हार के बाद सड़क पर प्रदर्शन को राजनीतिक हथियार बनाना अलग बात है।
प्रसाद ने विपक्षी दलों के बीच एकजुटता पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार, अलग-अलग नेता और दल प्रदर्शन में शामिल हुए, लेकिन उनके बीच साझा रणनीति या स्पष्ट उद्देश्य दिखाई नहीं दिया। उन्होंने राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी, ममता बनर्जी और वामपंथी दलों का नाम लेते हुए कहा कि विपक्षी नेता बारी-बारी से प्रदर्शन में पहुंचे। प्रसाद ने आरोप लगाया कि इस राजनीतिक गतिविधि का असर दिल्ली के आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जनता ने विपक्ष को नकार दिया है और विपक्षी दल अपनी हार की निराशा में प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा सांसद ने इसे “लोकतंत्र की अराजकता पर विजय” बताते हुए दावा किया कि चुनावी नतीजों के बाद विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जनता के फैसले को स्वीकार न करने जैसा है।
ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों को लेकर सवाल
भाजपा नेता ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर विपक्ष के पुराने आरोपों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से ईवीएम पर सवाल उठाता रहा है। प्रसाद के मुताबिक, जब विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं तो ईवीएम को सही बताते हैं, लेकिन भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत पर मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाते हैं।
उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा की जीत के बाद विपक्ष ने ईवीएम को लेकर आपत्ति जताई। अब, उनके अनुसार, विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को मुद्दा बना लिया है। प्रसाद ने दावा किया कि एसआईआर देश में पहली बार नहीं हो रहा और इसके लिए कानून में प्रावधान मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है।
एसआईआर और 13 करोड़ मतदाताओं का आंकड़ा
मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने या प्रभावित होने के विपक्षी दावे पर प्रसाद ने अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल किया कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, क्या उनके नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए? उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं, उनके नामों की जांच जरूरी है।

प्रसाद ने अपने संसदीय क्षेत्र पटना साहिब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी करीब 40 हजार मतदाताओं के नाम हटे हैं, लेकिन उन्होंने इसे सूची की समीक्षा का आवश्यक हिस्सा बताया। उनके अनुसार, मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहराए गए नामों की पहचान करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
भाजपा नेता ने आंकड़ों का ब्योरा देते हुए दावा किया कि करीब 2.89 करोड़ मतदाता मृत पाए गए, 6.3 करोड़ लोग अपने क्षेत्र से स्थानांतरित हो चुके थे, एक करोड़ नाम डुप्लीकेट थे और तीन करोड़ मतदाता अनुपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों को जोड़ने पर आंकड़ा करीब 13 करोड़ तक पहुंचता है। ये आंकड़े प्रसाद ने अपने बयान में दिए; विपक्ष ने इस प्रक्रिया और इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
बांग्लादेशी घुसपैठियों पर भी उठाया सवाल
प्रसाद ने मतदाता सूची की चर्चा के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी विदेशी नागरिक को भारत की मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि मतदाता सूची की जांच पर आपत्ति जताने के बजाय, अगर किसी को आंकड़ों या प्रक्रिया पर संदेह है तो वह कानूनी रास्ता अपना सकता है और अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
विपक्ष की ओर से एसआईआर और मतदाता सूची में नामों की कटौती पर उठाए जा रहे सवालों के बीच भाजपा ने इसे नियमित और कानून के तहत होने वाली प्रक्रिया बताया है। वहीं, प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह मुद्दा ईवीएम, एसआईआर और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर केंद्रित हो गया है।

























