Delhi News: दिल्ली में संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कुख्यात ‘नरेंद्र गैंग’ के दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से भारी मात्रा में अवैध हथियार और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इन बदमाशों की गिरफ्तारी से इलाके में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना नाकाम हो गई है।
भलस्वा झील के पास चली पुलिस की छापेमारी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शकूरपुर निवासी 25 वर्षीय रणधीर उर्फ विजय निवासी और स्वरूपपुर निवासी 28 वर्षीय परवेश उर्फ मोहम्मद दानिश के रूप में हुई है। पुलिस आयुक्त (डीसीपी) पंकज कुमार के मुताबिक, 11 अप्रैल को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली कि ये दोनों बदमाश भलस्वा झील के पास इकट्ठा होकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया।
ऐसे बरामद हुआ हथियारों का जखीरा
तलाशी लेने पर पुलिस को बड़ी सफलता मिली। परवेश के कब्जे से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए। वहीं, रणधीर के पास से एक देसी कट्टा और दो जिंदा कारतूस मिले। फिलहाल, दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करके आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
UP के अलीगढ़ से लाते थे अवैध हथियार
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परवेश और रणधीर ने बताया कि वे अवैध हथियारों की खरीदारी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से करते थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल की कीमत 30 से 35 हजार रुपये और एक देसी कट्टा 10 हजार रुपये में मिलता है। ये हथियार न सिर्फ वे खुद वारदातों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल करते थे, बल्कि गैंग के अन्य सदस्यों को भी इनकी सप्लाई करते थे।
पहले से है कई संगीन मामलों में शामिल
जांच में सामने आया है कि दोनों बदमाशों का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। परवेश पहले से लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामलों में नामजद है। वहीं, रणधीर के खिलाफ भी चोरी, स्नैचिंग और अन्य संगीन धाराओं के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस कर रही अन्य साथियों की तलाश
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी से नरेंद्र गैंग की राजधानी में सक्रिय आपराधिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा। फिलहाल, क्राइम ब्रांच की टीमें इनके अन्य साथियों और पूरे हथियारों के सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई हैं, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी वारदात को रोका जा सके।




















