ऋषी तिवारी
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के एक बयान ने राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया है। सपकाल ने छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के बाद उनके खिलाफ पुणे पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई भाजपा नेता की शिकायत के बाद की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सपकाल के बयान ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का रास्ता खोला है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला उस समय गरमाया जब मालेगांव नगर निगम के उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाया गया। इसके खिलाफ शिवसेना और अन्य संगठनों ने जमकर विरोध किया। इस मुद्दे पर मीडिया से बातचीत के दौरान हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि जिस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘स्वराज्य’ की स्थापना की और वीरता का परिचय दिया, उसी परंपरा से प्रेरित होकर टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने टीपू को भारत का ‘सच्चा सपूत’ और बहादुर योद्धा बताते हुए कहा कि उन्हें शिवाजी महाराज के समकक्ष वीरता के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
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पुलिस की कार्रवाई और आरोप
पुणे सिटी पुलिस ने पुणे भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे की शिकायत पर पार्वती पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है। घाटे का आरोप है कि शिवाजी महाराज को हिंदू समाज भगवान की तरह पूजता है, ऐसे में उनकी तुलना टीपू सुल्तान से करना करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 192, 196(1), 196(2), 352 और 356(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि यह टिप्पणी सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली है।
फडणवीस ने दिखाया गुस्सा, मांगी माफी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल के बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। फडणवीस ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना कर आम लोगों को मुगल शासन से मुक्त कराया। ऐसे महान व्यक्तित्व की तुलना टीपू सुल्तान से करना बहुत निंदनीय और शर्मनाक है।” उन्होंने सपकाल से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग की है।
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ओवैसी का जवाब- ‘टीपू शेर थे’
जहां एक तरफ भाजपा और शिवसेना नेता इस बयान पर आक्रोश जता रहे हैं, वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपकाल के बयान का बचाव करते हुए भाजपा पर हमला बोला। ओवैसी ने कहा, “टीपू सुल्तान अपने मुल्क को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए शहीद हो गए। अंग्रेजों को उनसे इतना डर था कि लड़ाई के बाद डेढ़ घंटे तक उनकी लाश पड़ी रही, लेकिन कोई हिम्मत नहीं कर पाया। उनका शरीर तक गर्म था।” ओवैसी ने आगे कहा, “क्या यह झूठ है कि एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब में लिखा कि भारत की मिसाइल तकनीक टीपू के सपनों को पूरा करने जैसा है? गांधी जी ने भी ‘यंग इंडिया’ में लिखा था कि टीपू सुल्तान हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं।”
शरद पोंक्षे का प्रतिआरोप
इस विवाद पर मराठी अभिनेता शरद पोंक्षे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सेक्युलरिज्म और वक्फ बोर्ड एक्ट जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि देश के बंटने का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जो लोग संविधान की रक्षा की बात करते हैं, उन्हें उनकी फोटो लगानी चाहिए जिन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ लाया। टीपू सुल्तान की फोटो लगाना और हिंदुओं को जगाना… यह हालात 1947 जैसे हैं। हर 75 साल में देश का एक टुकड़ा हो रहा है।”





















